सेना के जवानों ने एसडीएम समेत 5 चुनाव अधिकारियों को पीटा, एफआईआर दर्ज

जम्मू-कश्मीर में चुनाव ड्यूटी पर तैनात एसडीएम ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अनंतनाग के पुलिस उपायुक्त को कॉल करने की कोशिश की तो जवानों ने उनका और उनके ड्राइवर का फोन भी छीन लिया.


Updated: April 17, 2019, 4:55 PM IST
सेना के जवानों ने एसडीएम समेत 5 चुनाव अधिकारियों को पीटा, एफआईआर दर्ज
सांकेतिक फोटो.

Updated: April 17, 2019, 4:55 PM IST
सेना के जवानों के खिलाफ दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड में चुनाव ड्यूटी पर तैनात एसडीएम के साथ मारपीट के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है. मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी की शिकायत पर रणवीर पीनल कोड (RPC) की धारा-323 और 341 के तहत जवानों के खिलाफ बुधवार को मामला दर्ज कर लिया गया है.

डूरु के एसडीएम गुलाम रसूल वानी ने मंगलवार को बताया कि वह कुछ अधिकारियों के साथ काजीगुंड के उजरू में एक चुनावी बैठक में शामिल होने के लिए जा रहे थे. इसी दौरान सेना के कुछ जवानों ने उनके और चार अन्य अधिकारियों के साथ बदसुलूकी की. उन्होंने सरकारी वाहन को नुकसान पहुंचाने के साथ ही ड्राइवर की भी पिटाई की. वानी की ओर से सेना के खिलाफ दी गई लिखित शिकायत में कहा गया है कि जब उन्होंने ड्राइवर को बचाने की कोशिश की तो उन्हें भी कॉलर पकड़कर घसीटा गया, लातें मारी गईं और गालियां दी गईं.

शिकायत के मुताबिक, सेना के जवानों ने अपने हथियारों के सेफ्टी लॉक खोलकर बंदूकें उन पर तान दीं. जवानों ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी. उन्हें अनंतनाग के पुलिस उपायुक्त के पहुंचने के बाद ही छोड़ा गया. उन्होंने शिकायत में सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ मारपीट, अधिकारियों के खिलाफ हिंसा और सरकारी काम में व्यवधान पहुंचाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की गुहार लगाई. वानी ने यह आरोप भी लगाया कि जब उन्होंने अनंतनाग के उपायुक्त को कॉल करने की कोशिश की तो जवानों ने उनका और उनके ड्राइवर का फोन छीन लिया.

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घटना उस वक्त हुई जब सेना ने हाईवे पर आम लोगों के लिए रास्ता बंद कर दिया था. वानी ने कहा कि जवान किसी भी आम नागरिक के वाहन को हाईवे पर नहीं जाने दे रहे थे. जब मैंने अपना परिचय दिया तो हमें हाईवे पर जाने दिया गया. कुछ दूरी पर आर्मी की एक और पार्टी खड़ी थी, जिन्होंने हमारे साथ मारपीट की. बता दें कि कश्मीर में आम नागरिकों के लिए हर रविवार और बुधवार को हाईवे पर प्रवेश की अनुमति नहीं होती है. दोनों दिन सिर्फ सेना हाईवे का इस्तेमाल कर सकती है. घटना के दिन हाईवे आम नागरिकों के लिए बंद नहीं था, लेकिन सेना के मूवमेंट के कारण लोगों को रोका गया था.

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कश्मीर प्रशासनिक सेवा अधिकारी संगठन ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए उच्च अधिकारियों के समक्ष मामला उठाया है. संगठन ने बताया कि हमने उच्च अधकारियों को पूरे मामले की जानकारी दे दी है. साथ ही मामले की त्वरित जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. सेना ने अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया है, लेकिन श्रीनगर में एक प्रवक्ता ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है.
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