भारतीय सेना में दिखेगा 'शक्ति' का पराक्रम, पहला महिला सैनिक दस्ता शामिल

भारतीय सेना में शामिल हुए महिला सैनिकों का पहला दस्ता.

भारतीय सेना में शामिल हुए महिला सैनिकों का पहला दस्ता.

पहले सेना में महिलाएं शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिये सेना का अधिकारी पदों पर पहुंच सकती थीं लेकिन अब तस्वीर बदल गई है. जवान रैंक पर भर्ती के बाद महिला सैनिकों का पहला दस्ता भारतीय सेना में दस्तक दे चुका है. ये पुरुष सैनिकों के साथ मिलकर देश की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी उठाएंगी.

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बेंगलुरु. भारतीय सेना में अब महिलाएं भी देश की सुरक्षा का जिम्मा उठाती नजर आएंगी. बेंगलुरु के कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस (CMP C&S) में महिला सैनिकों के दस्ते ने कड़ी ट्रेनिंग के बाद उन्हें भारतीय सेना में शामिल किया गया है, जहां वे अपना पराक्रम दिखाती नजर आएंगी. पहले महिला सैनिकों के बैच में कुल 83 महिलाएं शामिल हैं, जिन्होंने द्रोणाचार्य परेड ग्राउंड ऑफ कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस सेंटर एंड स्कूल में अटेस्टेशन परेड में हिस्सा लेकर देश का मान बढ़ाया. इस दौरान सीएमपी सेंटर एंड स्कूल के कमांडेंट ब्रिगेडियर सी दयालन भी मौजूद रहे और महिला सैनिकों को उनकी सफलता पर बधाई और शुभकामनाए दीं.

61 हफ्ते की कड़ी ट्रेनिंग

महिला सैनिकों के पहले बैच की ट्रेनिंग 6 जनवरी 2020 को शुरू हुई थी. इस महिला दस्ते ने कुल 61 हफ्ते तक कड़ी ट्रेनिंग ली है. जिसमें से सैनिकों ने पहले 19 हफ्ते बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग और फिर प्रोवोस्ट और एडवांस मिलिट्री-पुलिस ट्रेनिंग हासिल की. ट्रेनिंग के तहत महिला सैनिकों को पुलिसिंग ड्यूटी और युद्धबंदियों के प्रबंधन के साथ-साथ सभी वाहनों के मेंटेनेंस, ड्राइविंग और सिग्नल कम्युनिकेशन की भी ट्रेनिंग दी गई है. इस ट्रेनिंग के बाद ये महिला सैनिक पुरुष साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की सुरक्षा में अपनी भूमिका अदा कर सकेंगी.

पहली बार जवान रैंक पर महिलाओं की भर्ती
अब तक भारतीय सेना में महिला केवल सैन्य अधिकारी हैं. पहली बार ऐसा हो रहा है कि महिलाओं को गैर-अधिकारी श्रेणी में शामिल किया गया है. जवान के रैंक पर पहली बार महिलाओं की भर्ती की गई है. सेना में महिला अधिकारियों की भर्ती 1992 में शुरू हुई थी. उस वक्त महिला सिर्फ शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत ही चुनिंदा विंग और ब्रांच में ही कार्य कर सकती थीं. शॉर्ट सर्विस कमीशन होने के चलते वे सिर्फ लेफ्टिनेंट कर्नल के पद तक ही पहुंच सकती थीं.

स्थायी कमीशन ने बदली तस्वीर

साल 2019 में सेना ने महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन देने का ऐलान किया था. लेकिन उससे पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने उन 332 महिला अधिकारियों को भी स्थाई कमीशन देने का आदेश दे दिया था जो पिछले कई सालों से सेना में अपनी सेवाएं दे रही थीं.  स्थायी कमीशन के मायने ये हैं कि अब सेना में महिला अधिकारी भी कर्नल ब्रिगेडियर या फिर जनरल रैंक के पद तक पहुंचने के लिए योग्य मानी जाएंगी. साल 2017 में महिलाओं को जवान रैंक पर भर्ती करने का फैसला लिया गया था. भारतीय सेना साल 2030 तक करीब 1700 महिला सैनिकों को कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में शामिल करने का प्लान बना रही है ताकि धीरे-धीरे कर उन्हें सेना का अहम हिस्सा बनाया जा सके.

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