भारत आते ही काम पर लग जाएगा राफेल, जानें इस फायटर जेट की 10 खास ताकत

भारत आते ही काम पर लग जाएगा राफेल, जानें इस फायटर जेट की 10 खास ताकत
भारतीय वायुसेना को साल 2022 तक 36 राफेल मिल जाएंगे.

भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) को साल 2022 तक 36 राफेल मिल (Rafale Fighter Jet) जाएंगे. 18 राफेल हाशीमारा बेस पर तैनात होंगे. जिससे चीन पर नजर होगी और 18 राफेल हरियाणा के अंबाला में तैनात होंगे, जिससे पाकिस्तान पर नजर होगी. आइए जानते हैं, भारत को मजबूत करने में ये लड़ाकू विमान कैसे कारगर साबित होंगी:-

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नई दिल्ली. भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) के बेड़े में शामिल होने के लिए 6 राफेल फाइटर जेट (Rafale Fighter Jet) ने फ्रांस से उड़ान भर दी है. इन पांचों फाइटर प्लेन को सात भारतीय पायलट उड़ाकर अंबाला एयरबेस ला रहे हैं. फ्रांस से भारत आते समय पांचों फाइटर प्लेन (Fighter Jet) को 28 जुलाई को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अल डाफरा एयरबेस पर उतारा जाएगा. राफेल भारत आते ही काम में लग जाएगा. इसके लिए वायुसेना के अधिकारियों ने कमर कस ली है. इन मल्टी-रोल फाइटर जेट्स के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी.

भारतीय वायुसेना को साल 2022 तक 36 राफेल मिल जाएंगे. 18 राफेल हाशीमारा बेस पर तैनात होंगे. जिससे चीन पर नजर होगी और 18 राफेल हरियाणा के अंबाला में तैनात होंगे, जिससे पाकिस्तान पर नजर होगी.

आइए जानते हैं, भारत को मजबूत करने में ये लड़ाकू विमान कैसे कारगर साबित होंगी:-
राफेल अत्याधुनिक हथियारों से लैस है, प्लेन के साथ मेटेअर मिसाइल भी है. विमान में फ्यूल क्षमता- 17,000 किलोग्राम किलोग्राम है. पहले तय किया गया था कि राफेल के ट्रायल के लिए स्पाइस 2000 बम की जरूरत हो सकती है, इसलिए इसकी डिलीवरी में देरी हुई.
अंबाला एयरबेस चीन की सीमा से 200 किमी की दूरी पर है. यहीं पर, राफेल 17वीं स्क्वाड्रन गोल्डन एरोज राफेल की पहली स्क्वाड्रन होगी. इसमें ताकतवर एम 88 इंजन लगा हुआ है.
राफेल की अधिकतम स्पीड 2,130 किमी/घंटा है बताया जा रहा है कि राफेल एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है. जबकि स्कैल्प मिसाइल की रेंज 300 किलोमीटर है.
राफेल डीएच (टू-सीटर) और राफेल ईएच (सिंगल सीटर), दोनों ही ट्विन इंजन, डेल्टा-विंग, सेमी स्टील्थ कैपेबिलिटीज के साथ चौथी जनरेशन का फाइटर है. ये न सिर्फ फुर्तीला है, बल्कि इससे परमाणु हमला भी किया जा सकता है.
इस फाइटर जेट को रडार क्रॉस-सेक्शन और इन्फ्रा-रेड सिग्नेचर के साथ डिजाइन किया गया है. इसमें ग्लास कॉकपिट है. इसके साथ ही एक कम्प्यूटर सिस्टम भी है, जो पायलट को कमांड और कंट्रोल करने में मदद करता है.
राफेल में एक एडवांस्ड एवियोनिक्स सूट भी है. इसमें लगा रडार, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन सिस्टम और सेल्फ प्रोटेक्शन इक्विपमेंट की लागत पूरे विमान की कुल कीमत का 30% है.
इस जेट में आरबीई 2 एए एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) रडार लगा है, जो लो-ऑब्जर्वेशन टारगेट को पहचानने में मदद करता है. राफेल का रडार सिस्टम 100 किमी के दायरे में भी टारगेट को डिटेक्ट कर लेता है.
राफेल सिंथेटिक अपरचर रडार (SAR) भी है, जो आसानी से जाम नहीं हो सकता, जबकि इसमें लगा स्पेक्ट्रा लंबी दूरी के टारगेट को भी पहचान सकता है. किसी भी खतरे की आशंका की स्थिति में इसमें लगा रडार वॉर्निंग रिसीवर, लेजर वॉर्निंग और मिसाइल एप्रोच वॉर्निंग अलर्ट हो जाता है और रडार को जाम करने से बचाता है.
राफेल में आधुनिक हथियार भी लगे हैं. जैसे- इसमें 125 राउंड के साथ 30 एमएम की कैनन है. ये एक बार में साढ़े 9 हजार किलो का सामान ले जा सकता है.
राफेल फाइटर जेट को माली अफगानिस्तान, इराक और लीबिया में इस्तेमाल किया जा चुका है. राफेल फाइटर जेट में भारतीय वायुसेना के हिसाब से फेरबदल किए गए हैं यानी इंडियन एयरफोर्स के हिसाब से ये बिल्कुल सटीक है.
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