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नागरिकता संशोधन बिल 2019 को मुस्लिम लीग के 4 सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

News18Hindi
Updated: December 12, 2019, 11:55 AM IST
नागरिकता संशोधन बिल 2019 को मुस्लिम लीग के 4 सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
सुप्रीम कोर्ट

CAB 2019: इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के सांसदों ने आज नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (Citizenship Amendment Bill 2019) के खिलाफ शीर्ष अदालत (Supreme Court) में याचिका दायर कर दी है. ये विधेयक सोमवार को लोकसभा (Lok Sabha) और बुधवार को राज्‍यसभा (Rajya Sabha) में बहुमत से पारित हो चुका है. विपक्ष का कहना है कि बिल मुस्लिम विरोधी है और संविधान की मूलभावना के खिलाफ है.

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  • Last Updated: December 12, 2019, 11:55 AM IST
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नई दिल्‍ली. संसद से पारित नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (Citizenship Amendment Bill 2019) को लेकर विरोध का सिलसिला जारी है. संसद (Parliament) और सड़क पर विरोध के बाद अब इस विधेयक को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती दे दी है. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के चार सांसदों ने आज इस विवादास्‍पद विधेयक के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर इसकी संवैधानिकता पर सवाल खड़े किए हैं. बता दें कि लीग ने पहले ही कहा था कि अगर ये विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो जाता है, तो आईयूएमएल इसे कोर्ट में चुनौती देगी. कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता कपिल सिब्‍बल (Kapil Sibbal) मुस्लिम लीग की ओर से मामले की पैरवी करेंगे.

विपक्ष के मुताबिक मुस्लिमों के खिलाफ है सिटिजनशिप बिल
आईयूएमएल का कहना है कि नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) संविधान के अनुच्‍छेद-14 (Article-14) के तहत मिले समानता के अधिकार का उल्‍लंघन करता है, क्‍योंकि इसे धर्म (Religion) के आधार पर बनाया गया है. वहीं, विपक्ष (Opposition) का कहना है कि ये विधेयक मुस्लिमों (Muslim) के खिलाफ है. ये विधेयक पाकिस्‍तान (Pakistan), अफगानिस्‍तान (Afghanistan) और बांग्‍लादेश (Bangladesh) में धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्राप्‍त करने की छूट देता है. विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक हिंदू, सिख, जैन, पारसी, ईसाई और बौद्ध शरणार्थियों को भारत की नागरिकता हासिल करने में आसानी होगी.

विरोध के बाद भी कई दलों ने बिल के समर्थन में दिया वोट

विधेयक को लोकसभा (Lok Sabha) में सोमवार को देर रात तक हुई चर्चा के बाद 80 के मुकाबले 311 मतों से पारित कर दिया गया. वहीं, राज्‍यसभा (Rajya Sabha) में बुधवार को इस विधेयक के पक्ष में 125, जबकि विरोध में 105 वोट पड़े. विधेयक का बीजेपी (BJP), जदयू (JDU) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अलावा एआईएडीएमके (AIADMK), बीजेडी (BJD), टीडीपी (TDP) और वाईएसआर कांग्रेस (YSR Congress) ने समर्थन किया. संसद के उच्‍च सदन में साढ़े छह घंटे की बहस के बाद गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने जवाब देते हुए कहा कि ये विधेयक तीन देशों से आए अल्‍पसंख्‍यक शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने के लिए लाया गया है. साथ ही स्‍पष्‍ट किया कि बिल किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं है. उन्‍होंने कहा कि भारतीय मुस्लिमों को डरने की कोई जरूरत नहीं है.

सोनिया गांधी ने कहा - संवैधानिक इतिहास का 'काला दिन'
कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने कहा कि यह भारत के संवैधानिक इतिहास का 'काला दिन' है. इस विधेयक के पारित होने से देश के बहुलवाद पर छोटी मानसिकता की जीत हुई है. उन्‍होंने विधेयक के राज्‍यसभा से पारित होने के तुरंत बाद कहा कि बिल संविधान में मिले समानता के अधिकार और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करने के खिलाफ है.साथ ही ये विधेयक उस सिद्धांत को भी खारिज करता है, जिसके तहत भारत को धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा से इतर सभी लोगों के लिए मुक्‍त राष्‍ट्र माना जाता है. बता दें कि असम समेत पूर्वोत्‍तर के कई राज्‍यों के इस विधेयक का जबरदस्‍त विरोध हो रहा है. गुवाहटी में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है. साथ बुधवार शाम 7 बजे से अगले 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गईं. वहीं, त्रिपुरा में पहले ही 48 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गई हैं.

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First published: December 12, 2019, 11:25 AM IST
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