जम्मू-कश्मीर के दो युवाओं ने किया एवरेस्ट फतह, ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूर्व CM ने दी बधाई

यह टीम राजधानी दिल्ली से 1 अप्रैल 2021 को रवाना हुई थी. वहीं, माउंट एवरेस्ट की सफलतापूर्वक चढ़ाई के बाद दल 1 जून 2021 को वापस बेस कैंप पहुंचा.

Everest Summit: जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स में प्राचार्य कर्नल ओएस थापा ने कहा है कि टीम को इस सबसे मुश्किल सफर में दो चक्रवात और कई बर्फीले तूफानों का सामना करना पड़ा, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी.

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    श्रीनगर. दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) की सफल चढ़ाई कर जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के दो युवाओं- महफूज इलाही (Mehfooz Ellahi) और इकबाल खान (Iqbal Khan) ने इतिहास रच दिया है. उनकी इस उपलब्धि पर राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्लाह और महबूबा मुफ्ती ने बधाई दी है. दोनों युवा जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग की तरफ से आयोजित माउंट एवरेस्ट शिखर सम्मेलन का हिस्सा थे.

    महफूज दक्षिण कश्मीर के कुपवाड़ा के रहने वाले हैं. जबकि, मोहम्मद इकबाल खान कुपवाड़ा में सिपाही हैं. दोनों ने पांच अन्य पर्वारोहियों के साथ मिलकर एवरेस्ट की चोटी तक का सफर किया है. इस उपलब्धि के साथ ही महफूज जवाहन इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग पहलगाम के पहले कश्मीरी नागरिक शिक्षक बने, जिन्होंने एवरेस्ट फतह किया.

    न्यूज18 से बातचीत के दौरान महफूज ने कहा है कि माउंट एवरेस्ट चढ़ना उनका सपना था, जिसे पूरा करने में जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग ने मदद की है. महफूज के मुताबिक, वे बचपन से ही पर्वत चढ़ना चाहते थे और पेशेवर पर्वतारोही बनने के लिए उन्होंने एडवांस कोर्स किया. इसके बाद वे जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग में शिक्षक हैं. वे बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर के युवाओं में हुनर की कमी नहीं है, लेकिन उस टैलेंट को बाहर लाने की सख्त जरूरत है.

    इकबाल खान ने बताया कि सफर मुश्किलों से भरा था, लेकिन जम्मू-कश्मीर का नाम रोशन करने की भावना ने कमजोर नहीं पड़ने दिया. आखिरकार उन्होंने इस मुश्किल लक्ष्य को देश के अन्य हिस्सों से आए पर्वतारोहियों के साथ पार कर लिया. अब्दुल्ला, मुफ्ती और सीपीआई (एम) के नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने दोनों कश्मीरियों के बधाई दी है और कश्मीर की असल पहचान बताया है.

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    जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स में प्राचार्य कर्नल ओएस थापा ने कहा है कि टीम को इस सबसे मुश्किल सफर में दो चक्रवात और कई बर्फीले तूफानों का सामना करना पड़ा, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी. पहली बार अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में संस्था के दो झंडों के साथ-साथ राष्ट्रीय ध्वज भी फहराया. कर्नल थापा ने बताया कि उनकी टीम में 6 सिपाही थे. जबकि, महफूज इलाही एकमात्र आम नागरिक थे.

    उत्तराखंड के सैन्य हवलदार चंद्र नेगी भी टीम का हिस्सा थे. उन्होंने कहा कि यह कभी नहीं भूलने वाला अनुभव है. उन्होंने बताया कि यह एक संयुक्त प्रयास था, जिसे टीम ने सहस और उत्साह के साथ पूरा किया. सबसे बड़ी बात उस दौरान यह थी कि हमने भारत की एकजुटता को समझा. नेगी ने कहा कि कश्मीरी लोग केवल सुंदर नहीं होते, बल्कि वे दिल से भी खूबसूरत होते हैं और वे साहस और जुनून की मिसाल हैं.

    महफूज इलाही से पहले एवरेस्ट चढ़ने वाली पहली कश्मीरी महिला का सम्मान नाहिदा मंजूर को मिला था. यह टीम राजधानी दिल्ली से 1 अप्रैल 2021 को रवाना हुई थी. वहीं, माउंट एवरेस्ट की सफलतापूर्वक चढ़ाई के बाद दल 1 जून 2021 को वापस बेस कैंप पहुंचा.

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