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166 सालों में पहली बार बंद हुई भारतीय यात्री ट्रेनें, जानें ये क्यों जरूरी था

News18Hindi
Updated: March 22, 2020, 6:28 PM IST
166 सालों में पहली बार बंद हुई भारतीय यात्री ट्रेनें, जानें ये क्यों जरूरी था
(प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

भारत में पहली पैसेंजर ट्रेन 1853 में पहली बार चलाई गई थी. इसके बाद भारत में ट्रेनों और यात्रियों की संख्या बढ़ती चली गई. ऐसा पहली बार होगा जब 31 मार्च के लिए यात्री ट्रेनें एकदम थम जाएंगी

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  • Last Updated: March 22, 2020, 6:28 PM IST
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ये कई दिनों से माना जा रहा था कि दुनिया का चौथा बड़ा रेल नेटवर्क भारतीय रेलवे (Indian Railway) कोरोना वायरस (Corona Virus) से बचाव के लिए यात्री ट्रेनों का आपरेशन बंद कर सकता है. ऐसा ही हुआ है. 166 सालों में ये पहला मौका है जबकि भारतीय रेलवे ट्रेनों का संचालन बंद कर रहा है. ट्रेनों के पहिए थम जाएंगे.

भारतीय रेलवे रोज 20,000 से ज्यादा यात्री ट्रेनें संचालित करता है. ये ट्रेनें 31 मार्च तक थम जाएंगी. इन ट्रेनों से रोज करीब ढाई करोड़ लोग सफर करते हैं. केवल मुंबई की लोकल ट्रेनों से ही रोज 80 लाख लोग आते-जाते हैं.

भारतीय ट्रेनों से चूंकि बहुत बड़े पैमाने पर लोग यात्राएं करते हैं. इनमें भीड़ भी बहुत होती है. जो कोरोना वायरस के लिहाज से बड़ा खतरा है.

पिछले दो-तीन दिनों से ट्रेनों में फिर भीड़ बढ़ने लगी थी. घर लौटने वालों का स्टेशन पहुंचना शुरू गया था. ये इस बीमारी के फैलाव के लिहाज से नई समस्या को जन्म दे सकता था. हाल में ट्रेनों में कई कोरोना ग्रस्त लोगों को यात्रा करते हुए पकड़ा भी गया था. लिहाजा ये कदम उठाना जरूरी था.



अभी ये साफ नहीं है कि भारतीय रेलवे क्या छोटी दूरी की ट्रेनों का संचालन रोकेगा. लेकिन लंबी दूरी की सभी ट्रेनों रोक दी गई हैं. देश में लंबी दूरी की करीब 3500 ट्रेनें चलती हैं.

थम जाएंगी मुंबई लोकल ट्रेनें भी
मुंबई की लोकल ट्रेनें हमेशा खचाखच भरी रहती हैं. इन ट्रेनों में भारी भरकम लोगों का रोज यात्रा करना कोरोना संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकता था. मुंबई की लोकल ट्रेनों में उसकी क्षमता से तीन गुना ज्यादा लोग यात्राएं करते हैं.

अन्य शहरों में भी मेट्रो का संचालन रुका
इसी तरह दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता में भी बड़े पैमाने पर लोग मेट्रो का इस्तेमाल करते हैं. इनसे भी रोज लाखों लोग यात्रा करते हैं. इन शहरों में मेट्रो को रोक दिया गया है.

भारतीय ट्रेनें पहली बार रुकी हैं 
भारतीय यात्री ट्रेनों का इतिहास 166 साल पुराना है. इतने सालों में भारतीय ट्रेनों लगातार चलती रही हैं. इनके आपरेशन एकसाथ इस तरह से कभी नहीं रुके हैं. भारत में पहली पैसेंजर ट्रेन मुंबई से थाणे के बीच 16 अप्रैल 1853 के दिन शुरू हुई थी. उसके बाद भारत में रेल नेटवर्क और ट्रेनों की संख्या बढ़ती चली गई.

माल गाड़ी चलती रहेंगी
भारतीय रेलवे ने जहां देशभर में यात्री ट्रेनें बंद करने का फैसला किया गया है तो वहीं माल गाड़ियां चलती रहेंगी. भारतीय रेलवे देशभऱ में कई तरह की ट्रेनें संचालित करता है, जिसमें राजधानी, शताब्दी, एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं.

दुनिया का चौथा बड़ा नेटवर्क 
भारतीय रेल (आईआर) एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क तथा सरकारी स्वामित्व वाला विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है.

विश्व युद्ध और बंटवारे में नहीं रुकी थीं ट्रेनें
भारत में ट्रेनों का संचालन शुरू होने के बाद दुनियाभर में दो विश्व युद्ध हुए. फिर बंटवारा हुआ. इसके अलावा भारत ने इस दौरान कई महामारियों का भी सामना किया लेकिन कभी यात्री ट्रेनों के चक्के नहीं थमे. ये पहली बार हुआ. ये जरूरी भी था, क्योंकि कोरोना संक्रमण की बीमारी है, जो भीड़ में लगातार एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में फैलती है.

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First published: March 22, 2020, 6:13 PM IST
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