बांस के सहारे 5 दिन तक भूखा-प्यासा समुद्र में तैरता रहा मछुआरा, आखिर में ऐसे बची जान

कोलकाता पहुंचने के बाद रबींद्रनाथ ने बताया कि भूख से बेहाल और बिना लाइफ जैकेट के उनके 11 साथियों की एक-एक करके मौत हो गई, जबकि उन्होंने धैर्य और दृढ़ इच्छा बनाए रखी.

News18Hindi
Updated: July 15, 2019, 7:16 PM IST
बांस के सहारे 5 दिन तक भूखा-प्यासा समुद्र में तैरता रहा मछुआरा, आखिर में ऐसे बची जान
मछुआरा रबींद्रनाथ दास
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Updated: July 15, 2019, 7:16 PM IST
बंगाल की खाड़ी में बिना भोजन और लाइफ जैकेट के पांच दिन तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ते रहे एक मछुवारे को बांग्लादेशी जहाज ने बचा लिया. समुद्र में अपने 14 साथियों के मछली पकड़ने गए रबींद्रनाथ दास की नाव पलट गई थी. इस हादसे में उसके अन्य साथी तो डूब गए, लेकिन दास एक बांस के सहारे पांच दिन तक तैरते रहे और बांग्लादेशी सीमा पर पहुंच गए. यहां उसे चिटगोंग के तट के पास एक जहाज पर मौजूद क्रू ने बचा लिया. दास का फिलहाल कोलकाता के अस्पताल में इलाज चल रहा है.

दक्षिण 24 परगना जिले के नारायणपुर के रहने वाले रबींद्रनाथ दास 4 जुलाई को अपने 13 साथ बंगाल की खाड़ी में मछली पकड़ने निकले थे. 6 जुलाई को तेज तूफान की वजह से अचानक उनकी नाव पलट गई. इस दौरान रबींद्रनाथ 9 साथियों के समुद्र में कूद गए, लेकिन तीन मछुआरे नाव के नीचे दब गए. उन्होंने जहाज से ईंधन ड्रम उतारकर उन्हें बांस और रस्सी से बांध दिया.

5 दिन तक रहा भूखा
कोलकाता पहुंचने के बाद रबींद्रनाथ ने बताया कि भूख से बेहाल और बिना लाइफ जैकेट के उनके 11 साथियों की एक-एक करके मौत हो गई, जबकि उन्होंने धैर्य और दृढ़ इच्छा बनाए रखी. दास ने बताया कि इन 5 दिनों तक उन्होंने कुछ नहीं खाया. बस जब भूख ज्यादा लगती तो पानी पी लिया करते थे.

'कई दिनों तक भतीजे को कंधे पर बैठाए रखा'
आखिरकार, 10 जुलाई को वह चिटगोंग के पास पहुंच गए. वहां बांग्लादेश के जहाज की उन पर नजर पड़ी. दो घंटे के प्रयास के बाद रबींद्रनाथ को बचा लिया गया. दास ने बताया कि उन्हें बचाए जाने से कुछ घंटे पहले उनका भतीजा डूब गया था. हम साथ-साथ तैरते रहे. वह काफी डरा हुआ था. दास ने बताया कि मैंने कई दिनों तक उसे कंधे पर बैठाए रखा, लेकिन मेरे बचाए जाने से कुछ देर पहले वह डूब गया.

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First published: July 15, 2019, 7:15 PM IST
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