कश्मीर में आर्टिकल 370 और 35A हटाने से पहले मोदी सरकार ने दिए थे 5 अहम संकेत

अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले कश्मीर में चप्पे चप्पे पर सुरक्षाबलों की तैनाती की गई थी. बावजूद इसके गृह मंत्री ने घाटी की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी ली और सुरक्षाबलों को स्पष्ट संदेश दे दिया कि आतंकियों को उन्हीं की भाषा में जोरदार जवाब दिया जाना चाहिए.

अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 8:48 PM IST
कश्मीर में आर्टिकल 370 और 35A हटाने से पहले मोदी सरकार ने दिए थे 5 अहम संकेत
भाजपा की रणनीति को इन पांच संकेतों के बाद भी कोई नहीं जान सका. (फोटो-पीटीआई)
अमित पांडेय
अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 8:48 PM IST
ऐसा नहीं है कि केन्द्र सरकार ने कश्मीर से धारा 370 हटाने का फैसला एकाएक लिया. सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों से इसकी तैयारी की जा रही थी, जिसमें हर पहलू का आकलन किया गया. इस फैसले के लिए अलग-अलग एजेंसियों से राय भी ली गई और कानून के जानकारों के साथ मशविरा भी लिया गया था. कुछ फैसले पहले लिए गए जिसका असर देखा गया और फिर आहिस्ता-आहिस्ता कदम इस अहम फैसले की ओर आगे बढ़ाए गए.

पहला संकेत
जम्मू कश्मीर में पंचायत चुनाव करवाना. 11 दिसंबर 2018 को जम्मू कश्मीर में पंचायत चुनाव खत्म हुए, जिसमें 40,000 पंच और सरपंच चुने गए. सरकार का दावा था कि 74 फीसदी पोलिंग पूरे राज्य में हुई है. हालांकि कई जगह ऐसी थी जहां सिर्फ एक ही उम्मीद्वार था और कश्मीर के मुकाबले जम्मू में मतदान का प्रतिशत ज्यादा था. बावजूद इसके सरकार को ये संकेत मिल चुका था कि जम्मू-कश्मीर के लोग स्थानीय प्रतिनिधि के जरिए भी विकास चाहते हैं. इसीलिए पंच और सरपंच को सीधे विकास की राशि देने की व्यवस्था पर काम करना शुरू कर दिया गया ताकि ये प्रतिनिधि अपने इलाके के लोगों की जरूरत के मुताबिक विकास करवा सकें. इसके अलावा पंचायत चुनाव के बाद केन्द्र सरकार की जो परियोजनाएं जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में चल रही थी उसमें तेजी लाई गई. इसमें जम्मू के सीमावर्ती इलाकों में बंकर बनाना, कश्मीर और लद्दाख में शिक्षण संस्थाओं के निर्माण कार्य में तेजी का काम प्रमुख था.

8 फरवरी को राज्यपाल शासित जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एक अहम आदेश दिया जिसके तहत लद्दाख को अलग प्रशासनिक और राजस्व जिला बनाया गया.


दूसरा संकेत
8 फरवरी को राज्यपाल शासित जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एक अहम आदेश दिया जिसके तहत लद्दाख को अलग प्रशासनिक और राजस्व जिला बनाया गया. इसके तहत लद्दाख में रेवेन्यू हेड क्वार्टर बनाया गया और अलग आईजी की तैनाती की गई. इस फैसले के बाद जम्मू कश्मीर में तीन डिविजन हो गए जम्मू, कश्मीर और लद्दाख. इससे पहले सिर्फ जम्मू और कश्मीर डिवीजन ही था और लद्दाख कश्मीर डिवीजन में आता था. सरकार ने ये फैसला लेह, लद्दाख और कारगिल के सामाजिक संगठनों की राय के बाद लिया था. इस फैसले के पीछे सरकार की दलील यही थी लद्दाख डिवीजन के लोगों को अलग पहचान मिले और यहां पर जो केन्द्रीय विश्वविद्यालय, टूरिस्ट जोन बन रहा है इस काम में तेजी आए.

तीसरा संकेत
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28 फरवरी 2019 को सरकार का जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन ऑर्डिनेंस और मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में इसका विधेयक लाना, जिसके तहत लाइन ऑफ कंट्रोल की तरह अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर भी रह रहे लोगों नौकरी व अन्य क्षेत्रों में तीन फीसदी आरक्षण का लाभ मिले. इसका लाभ पाने वाले में ज्यादातर लोग जम्मू के ही थे. जबकि लाइन ऑफ कंट्रोल पर रहे लोग कश्मीर से हैं. इस फैसले से सरकार ने एक बार फिर संकेत दिया कि कश्मीर के लोगों की तरह वो लद्दाख और जम्मू के लोगों को भी अहमियत देता है.

चौथा संकेत
कश्मीर दौरे को लेकर गृह मंत्री अमित शाह का सख्त रुख. अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले कश्मीर में चप्पे चप्पे पर सुरक्षाबलों की तैनाती की गई थी. बावजूद इसके गृह मंत्री ने घाटी की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी ली और सुरक्षाबलों को स्पष्ट संदेश दे दिया कि आतंकियों को उन्हीं की भाषा में जोरदार जवाब दिया जाना चाहिए. कश्मीर दौरे से पहले हफ्ते भर में ही दिल्ली गृह मंत्रालय में करीब 6 बैठकें आला अधिकारियों के साथ और कश्मीर दौरे के दौरान श्रीनगर में अलग-अलग एजेंसियों से 5 बैठकें इस बात की ओर इशारा कर रही थीं हर पहलू का बेहद बारीकी से आकलन किया जा रहा है.

पांचवां संकेत
आतंक के खिलाफ सख्त रुख जारी रहना. हालांकि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के वक्त तक घाटी में सक्रिय आतंकियों की कमर काफी हद तक टूट चुकी थी. उन्‍हें बहुत नुकसान पहुंच चुका था बावजूद इसके भारत सरकार का ऑपरेशन आल आउट पूरी तरीके से जारी है. इसके पीछे मकसद यही है कि आतंक जड़ से खत्म हो. इसके नतीजे भी देखने को मिले जब घाटी में इस साल पहले 6 महीनों में घुसपैठ की घटना पिछले साल के मुकाबले 43 फीसदी तक कम हुई. यही नहीं बड़ी तादात में आतंकियों को मारा भी गया. दरअसल, भारत सरकार की रणनीति ये भी थी कि कश्मीर में 'भारत विरोध' का जो माहौल है वो आतंकियों के खात्मे के साथ साथ पूरी तरीके से खत्म हो.

यही नहीं, इस साल जुलाई के आखिरी हफ्ते में सुरक्षाबलों की अतिरिक्त तैनाती ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा कि कश्मीर में कुछ बड़ा होने वाला है और 5 अगस्त को तो गृह मंत्री के बयान से ये साफ हो गया कि कश्मीर से धारा 370 हटेगी, लेकिन इससे पहले से 5 अहम संकेत सरकार के इस महत्वपूर्ण फैसले का मजबूत आधार बने.

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First published: August 6, 2019, 6:17 PM IST
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