बदल रहा है इंडिया, अब युवाओं के लिए महत्वपूर्ण नहीं रही शादी

बदल रहा है इंडिया, अब युवाओं के लिए महत्वपूर्ण नहीं रही शादी
सांकेतिक तस्वीर

जिन युवाओं की उम्र 25 के आसपास है उनके लिए करियर पहली प्राथमिकता है. शायद नौकरी युवाओं के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त 16% युवा बेरोजगार हैं

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 18, 2019, 9:37 AM IST
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पीढ़ियों से भारतीयों की पहली प्राथमिकता 'घर बसाना' हुआ करती थी, लेकिन अब यह गुजरे जमाने की बात लगती है. डेटिंग ऐप टिंडर ने भारतीय युवाओं पर एक सर्वे किया है, जो बता रहा है कि नई पीढ़ी पुरानी लीक को तोड़कर नए तरीके से जीने की राह तलाश रही है. टिंडर ने 18-25 आयु वर्ग के युवाओं को अपने सर्वे में शामिल किया. सर्वे में शामिल अधिकांश युवाओं ने कहा कि आने वाले पांच सालों के लिए उनकी पहली प्राथमिकता ‘खुद के लिए जीना’ है. यहां तक कि शादी अथवा आर्थिक सुरक्षा युवाओं की पहली पांच प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है.

यह सर्वे भारत के शीर्ष 20 शहरों के 2 हजार लड़के और लड़कियों पर किया गया. 9 जनवरी को प्रकाशित टिंडर की रिपोर्ट के अनुसार, "शिक्षा का स्तर बढ़ने और शहरीकरण में वृद्धि के चलते जनरेशन जेड (Z) स्वतंत्र होना चाहती है और करियर, रिलेशनशिप, इंटरैक्शन, सेल्फ एक्सप्रेशन, सेल्फ-आईडेंटिटी और डायरेक्शन को एक्सप्लोर (ढूढ़ना) करने की स्वतंत्रता चाहती हैं.

'खुद के लिए जीना' के बाद 56% युवाओं की पहली प्राथमिकता अपने माता-पिता को गर्व महसूस कराना है. 56% युवाओं ने स्ट्रांग फ्रेंडशिप बिल्डिंग को अपनी पहली प्राथमिकता बताया. 52% युवा पढ़ाई पूरी करना अपनी पहली प्राथमिकता मानते हैं जबकि 42% युवाओं के लिए वर्ल्ड टूर पहली प्राथमिकता है.



हालांकि, जिन युवाओं की उम्र 25 के आसपास है उनके लिए करियर पहली प्राथमिकता है. शायद नौकरी युवाओं के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त 16% युवा बेरोजगार हैं. यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक 2050 तक 280 मिलियन लोग जॉब मार्केट में प्रवेश करेंगे, जिस वजह से नौकरी के लिए प्रतिस्पर्धा में बढ़ोत्तरी होगी. युवा नौकरी के चिंतित हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपने पैशन के क्षेत्र में ही करियर बनाना चाहते हैं.
जहां तक शादी और बच्चों का सवाल है तो लड़के और लड़कियों दोनों के लिए यह प्राथमिकता में काफी नीचे आती है. संपत्ति जमा करने के बजाय, वे अनुभव इकट्ठा करना चाहते हैं. यह सर्वे लड़के और लड़कियों पर समान रूप से लागू होता है, लेकिन इसमें इस बात का भी खुलासा हुआ कि लड़कों की तुलना में लड़कियों को ‘सैटल’ होने के लिए कम वक्त मिलता है. सर्वे में शामिल दो तिहाई लड़कियों ने कहा कि उनके लिए कड़ी मेहनत करके खुद की पहचान बनाना पहली प्राथमिकता है.

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