Covid-19 : पहली बार ICMR ने एक दिन में टेस्ट किये एक लाख सैंपल्स

Covid-19 : पहली बार ICMR ने एक दिन में टेस्ट किये एक लाख सैंपल्स
प्रतीकात्मक तस्वीर

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने जांच की रणनीति में बड़े बदलाव किए हैं. अब प्रवासी मजदूरों, हॉस्पिटल में भर्ती कोरोना के मरीज और फ्रंट लाइन में काम करने वालों के लिए जांच के लिए अलग नियम बनाए गए हैं.

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नई दिल्ली. देश भर में फैले कोरोना वायरस के बीच एक राहत भरी खबर है कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने एक दिन में एक लाख टेस्ट करने में सफलता हासिल कर ली है. इससे पहले CMR ने सोमवार को कहा कि प्रवासी और लौटने वाले लोगों में अगर इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो इसके सात दिन के भीतर उनकी कोरोना वायरस के लिए जांच की जाएगी.

साथ ही अस्पतालों में भर्ती किसी भी रोगी को और कोविड-19 की रोकथाम और नियंत्रण में लगे फ्रंट लाइन में काम करने वालों के लोगों में इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) के लक्षण दिखने पर उनकी भी आरटी-पीसीआर जांच होगी.

 14वें दिन के बीच एक बार जांच की जा रही 
इसके अलावा किसी संक्रमित मामले के सीधे संपर्क में और अत्यंत जोखिम में रहने वाले ऐसे लोग जिनमें लक्षण नहीं हैं, उनकी संपर्क में आने के पांचवें और दसवें दिन के बीच एक बार संक्रमण का पता लगाने के लिए जांच की जाएगी. अभी तक ऐसे मामलों में पांचवें और 14वें दिन के बीच एक बार जांच की जा रही है.
आईसीएमआर ने देश में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ने के मद्देनजर अपनी रणनीति में बदलाव किया है. नई रणनीति का उद्देश्य संक्रमण को और प्रभावी तरीके से फैलने से रोकना है.



पहले क्या थे नियम?
अभी तक दिशानिर्देशों के अनुसार हॉटस्पॉट या नियंत्रण (कंटेनमेंट) क्षेत्रों में रह रहे आईएलआई के लक्षण वाले लोगों, एसएआरआई रोगियों और ऐसे स्वास्थ्य कर्मियों जिनमें लक्षण दिख रहे हों, की कोरोना वायरस संक्रमण के लिए जांच की जा रही है.

पिछले 14 दिन में अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले ऐसे लोगों जिनमें लक्षण नहीं हैं तथा संक्रमित लोगों के संपर्क में आ रहे लक्षण वाले लोगों की जांच की जा रही थी.

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