क्या प्याज पर लगे काले दाग से फैल सकता ब्लैक फंगस? फेसबुक पोस्ट के दावों की जानिए सच्चाई

 ब्लैक फंगस

ब्लैक फंगस

कोविड के मामलों में रिकॉर्ड इजाफा होने के बाद जिस तरह से कई केसों में बिना जांच परख के लोगों ने दवाइयां इस्तेमाल कीं और ऑक्सीजन देने के दौरान की लापरवाहियों के चलते ब्लैक फंगस के मामले सामने आ रहे हैं.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus In India) के घटते मामलों के बीच देश में ब्लैक फंगस (Black fungus) के केस बढ़ रहे हैं. माना जा रहा है कि बीते दिनों कोविड के मामलों में रिकॉर्ड इजाफा होने के बाद जिस तरह से कई केसों में बिना जांच परख के लोगों ने दवाइयां इस्तेमाल कीं और ऑक्सीजन देने के दौरान की लापरवाहियों के चलते ब्लैक फंगस के मामले सामने आ रहे हैं. एक ओर जहां आमजन ब्लैक फंगस के इलाज के लिए अस्पतालों का रुख कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ब्लैक फंगस और उसके उत्पन्न होने की वजहों को लेकर कई किस्म के दावे किए जा रहे हैं.

कुछ दावे तो ऐसे हैं जिनमें कहा जा रहा है कि घर में रखे फ्रिज और प्याज से भी ब्लैक फंगस हो सकता है. क्या यह सच है? नहीं. हम सभी को एक ओर जहां संक्रमण का मुकाबला करना है तो वहीं दूसरी ओर झूठी खबरों और दावों से दूर रहते हुए खुद को सुरक्षित भी रखना है.

क्या है फेसबुक पोस्ट में!

ऐसी ही एक फेसबुक वायरल हो रही है, जिसमें कहा गया है- 'घरेलू ब्लैक फंगस से सावधान रहें. अक्सर जब आप प्याज खरीदते हैं, तो आपने उस पर एक काली परत जरूर देखी होगी. दरअसल, ये ब्लैक फंगस है. रेफ्रिजरेटर के अंदर रबर पर दिखाई देने वाली काली फिल्म भी ब्लैक फंगस है. अगर इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह काला फंगस फ्रिज में रखे खाद्य पदार्थों के जरिए आपके शरीर में आसानी से घुस सकता है.'
आपको बता दें कि इस फेसबुक पोस्ट में किया गया हर दावा पूरी तरह से झूठा है. रेफ्रिजरेटर के अंदर एक काला मोल्ड बनाने वाला फंगस और प्याज पर काली परत बनाने वाला फंगस, म्यूकोरमाइकोसिस का कारण बनने वाले फंगस से बिल्कुल अलग है. इसलिए दावा झूठा है.

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AIIMS निदेशक ने क्या बताया?



एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि फंगल संक्रमण को रोकने के लिए आक्रामक तरीके से काम करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 के मामलों में कमी आने से फंगल संक्रमण के मामलों में कमी आने की संभावना है.

'ब्लैक फंगस' शब्द की उत्पत्ति पर बोलते हुए, गुलेरिया ने कहा, 'याद रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि म्यूकोरमाइकोसिस ब्लैक फंगस नहीं है. यह एक गलत नाम है. दरअसल, ब्लड की सप्लाई कम होने के कारण त्वचा का रंग कुछ फीका पड़ जाता है. इससे ऐसा लगता कि वह जगह काली हो गई. जिसके चलते इसे ब्लैक फंगस नाम मिला.

इस समय ब्लैक फंगस के 11,717 मामले

उधर केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौडा ने कहा कि दवा की आपूर्ति मरीजों की संख्या के आधार पर की गयी है. देश के विभिन्न हिस्सों में इस समय ब्लैक फंगस के 11,717 मामले हैं. इससे पहले केंद्र की ओर से 24 मई को एम्फोटेरिसिन-बी की 19,420 शीशियों की आपूर्ति की गयी थी जबकि 21 मई को 23,680 शीशियां विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मुहैया कराई गयी थीं.

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, कर्नाटक में ब्लैक फंगस का इलाज करा रहे लगभग 481 मरीजों के लिए एम्फोटेरिसिन-बी की 1,220 अतिरिक्त शीशियां आवंटित की गई हैं. गौडा की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार गुजरात में ब्लैक फंगस के सर्वाधिक 2,859 मरीज हैं, इसके बाद महाराष्ट्र में 2,770, आंध्र प्रदेश में 768, मध्य प्रदेश में 752, तेलंगाना में 744 और उत्तर प्रदेश में 701 मरीज हैं.


ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों के कारण देश के कई राज्यों में एम्फोटेरिसिन-बी दवा की मांग कई गुना बढ़ गयी है. देश में ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को लेकर डॉक्टरों ने चिंता व्यक्त की है. कोविड-19 से ठीक हो चुके मरीजों में इसके मामले सामने आ रहे हैं. कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वाले लोगों को इससे अधिक खतरा है.

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