भारत के इन आवारा कुत्तों की खुली किस्मत, जाएंगे विदेश

पोलैंड के बिजनेसमैन दंपति ने चार स्ट्रीट डॉग्स को गोद लिया है.

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: October 13, 2017, 4:24 PM IST
भारत के इन आवारा कुत्तों की खुली किस्मत, जाएंगे विदेश
पोलैंड के बिजनेसमैन दंपति ने चार स्ट्रीट डॉग्स को गोद लिया है.
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: October 13, 2017, 4:24 PM IST
जिन स्ट्रीट डॉग (गली के आवारा कुत्ते) को कल तक दुत्कार मिलती थी, जिन्हें लोग नफरत की नजर से देखते थे उनकी किस्मत एक विदेशी दंपति ने खोल दी है. उन्होंने इन कुत्तों का नाम भी बदल दिया है. अब ये चार स्ट्रीट डॉग इस्कोजका, रुडोल्फ, ब्लू और लेटका नाम से बुलाए जाएंगे.

पोलैंड के बिजनेसमैन दंपति उनका खास ख्याल रख रहे हैं. रॉबर्ट और मार्टा ने उन्हें सोफा दिया है, एसी कमरे में रखा है. उन्हें अपने वतन ले जाने के लिए इन्हीं नामों से डॉक्युमेंट्स तैयार किए जा रहे हैं.

उन्होंने पीपल फॉर एनिमल के जरिए पांच स्ट्रीट डॉग को गोद लेने की कोशिश की थी, लेकिन एक में थोड़ी दिक्कत की वजह से ऐसा नहीं हो सका. सिर्फ चार की इजाजत मिली. रॉबर्ट और मार्टा का कहना है कि स्ट्रीट डॉग से नफरत करना बंद कीजिए.

यह दंपति इन दिनों बिजनेस के सिलसिले में औद्योगिक सिटी फरीदाबाद में आया हुआ है. यहां के सबसे पॉश सेक्टर-14 में रहता है. यहां पूंजीपति रहते हैं.  जो जंजीर में बंधे कुत्तों को पसंद करता है और गली वाले कुत्तों को देखना नहीं चाहता. 35 वर्षीय राबर्ट और उनकी पत्नी मार्टा ने देखा कि पेड़ के नीचे बैठे कुछ गली के कुत्तों को उसके सामने बने मकान में रहने वाला एक व्यक्ति डंडे मारकर भगा रहा है.

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इससे एक कुत्ते के पैर में गंभीर चोट आ गई. इस घटना से दोनों का मन काफी आहत हुआ. पीपल फॉर एनिमल (पीएफए) की मदद से उन्हें गोद लेने का फैसला लिया. राबर्ट ने बताया कि उन्होंने गली के पांच कुत्तों को गोद लेने के लिए केंद्रीय मंत्री एवं पशु, पक्षियों के अधिकार को लेकर काम करने वाली मेनका गांधी के आफिस में संपर्क किया.

वहां से पीएफए की जिला प्रतिनिधि प्रीति दुबे को पोलैंड के इस दंपति की मदद के लिए कहा गया. पोलैंड के इस कारोबारी दंपति ने कुत्तों को देखभाल करने का शपथ पत्र भरा और दिल्ली में उनकी नसबंदी कराई. जिनमें से चार को पोलैंड ले जाने की इजाजत मिली.

वे न सिर्फ गली के इन चार कुत्तों को प्यार करते हैं बल्कि रोज सुबह-शाम अन्य कुत्तों को भी कुछ न कुछ खिलाते हैं. फिर सेक्टर के उद्योगपतियों ने उनका यह कहकर विरोध किया कि ये कुत्ते बहुत गंदगी फैलाते हैं.

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पीएफए की प्रतिनिधि प्रीति दुबे कहती हैं कि गली वाले कुत्ते, विदेशी कुत्तों से ज्यादा समझदार होते हैं फिर भी न जाने क्यों लोग उनके साथ गलत बर्ताव करते हैं. जबकि विदेशी नस्ल के कुत्तों को घर में रखते हैं. अगर सभी लोग एक-एक स्ट्रीट डॉग इस दंपत्ति की तरह गोद ले लें और उनकी नसबंदी करवा दें तो ये सड़कों पर आवारा नहीं घूमेंगे.

कम ही होता है कि कोई स्ट्रीट डॉग को गोद लेकर विदेश ले जाए. वन्य जीव विशेषज्ञों ने बताया कि इसके लिए सबसे बड़ी शर्त यह है कि कुत्ते को किसी तरह की बीमारी न हो. इस शर्त पर वे चारों खरे उतरे हैं.
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