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विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर बोले- 'बहुत मुश्किल दौर' से गुजर रहे भारत और चीन के संबंध

विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर बोले- 'बहुत मुश्किल दौर' से गुजर रहे भारत और चीन के संबंध

भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर.

भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर.

Munich Security Conference: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, ''स्वाभाविक तौर पर सीमा की स्थिति संबंधों की स्थिति का निर्धारण करेगी. जाहिर तौर पर फिलहाल चीन के साथ भारत के संबंध बहुत कठिन दौर से गुजर रहे हैं.'' उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों के साथ भारत के संबंध जून 2020 से पहले भी काफी अच्छे थे.

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म्यूनिख: भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर (Subrahmanyam Jaishankar) ने शनिवार को कहा कि चीन द्वारा सीमा समझौतों का उल्लंघन करने के बाद उसके साथ हमारे संबंध (India-China Relations) बहुत कठिन दौर से गुजर रहे हैं. एस जयशंकर ने रेखांकित किया कि ”सीमा की स्थिति संबंधों की स्थिति का निर्धारण करेगी.” भारतीय विदेश मंत्री ने जर्मनी के म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (Munich Security Conference) 2022 परिचर्चा को संबोधित करते हुए यह बात कही.

भारत-चीन सीमा पर 45 साल शांति रही, अब स्थिति बदली
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, ”भारत को चीन के साथ एक समस्या है. वह समस्या यह है कि 1975 से 45 साल तक भारत-चीन सीमा पर शांति रही. दोनों देशों का सीमा प्रबंधन सामान्य और स्थिर रहा. इन वर्षों में दोनों देशों का कोई सैनिक हताहत नहीं हुआ. अब यह स्थिति बदल गई है, क्योंकि हमने चीन के साथ सीमा वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control) पर सैन्य बलों की तैनाती नहीं करने का समझौता किया था. लेकिन चीन ने उस समझौते का उल्लंघन किया.”

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, ”स्वाभाविक तौर पर सीमा की स्थिति संबंधों की स्थिति का निर्धारण करेगी. जाहिर तौर पर फिलहाल चीन के साथ भारत के संबंध बहुत कठिन दौर से गुजर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों के साथ भारत के संबंध जून 2020 से पहले भी काफी अच्छे थे.

गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद तनाव ज्यादा बढ़ा
पांगोंग त्सो झील (Pangong Tso Lake) के पास हिंसक झड़प के बाद भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा गतिरोध शुरू हो गया था और दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे अपने सैनिकों और हथियारों की तैनाती बढ़ा दी थी. 15 जून, 2020 को गलवान घाटी में हुई एक हिंसक झड़प के बाद तनाव और ज्यादा बढ़ गया था. एस जयशंकर ने एमएससी में हिंद-प्रशांत पर एक परिचर्चा में भाग लिया, जिसका उद्देश्य यूक्रेन को लेकर नाटो देशों और रूस के बीच बढ़ते तनाव पर व्यापक विचार-विमर्श करना था.

Tags: China india lac, EAM S Jaishankar, India china border dispute

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