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किसान आंदोलन पर ब्रिटिश सांसदों की चर्चा, भारत की ताकीद, आंतरिक मामलों में दखल न दें

किसान आंदोलन (फाइल फोटो)

किसान आंदोलन (फाइल फोटो)

Agricultural reforms in India: किसान भारत सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने और उनकी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्यों (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने की मांग को लेकर 28 नवम्बर से दिल्ली से लगी सीमाओं पर डटे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 10, 2021, 2:34 PM IST
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लंदन. ब्रिटिश संसद में भारतीय किसानों के मुद्दे और कृषि सुधार के मसले पर बहस का मामला अभी थमा नहीं है. विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने ब्रिटेन के उच्चायुक्त को समन कर अनावश्यक और भ्रामक बहस पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. विदेश सचिव ने ब्रिटिश उच्चायुक्त से स्पष्ट कर दिया कि ब्रिटिश संसद में चर्चा एक लोकतांत्रिक देश के राजनीतिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप है. उन्होंने सलाह दी कि ब्रिटेन के सांसदों को दूसरे देशों की घटनाओं की आड़ में वोट बैंक की राजनीति से बचना चाहिए, वो भी खासतौर पर एक साथी लोकतांत्रिक देश के मामले में.

इससे पहले लंदन में भारतीय उच्चायोग ने भारत में तीन कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन के बीच शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता के मुद्दे को लेकर कुछ ब्रिटिश सांसदों के बीच हुई चर्चा की निंदा की. उच्चायोग ने सोमवार शाम ब्रिटेन के संसद परिसर में हुई चर्चा की निंदा करते हुए कहा कि इस ‘‘एकतरफा चर्चा’’ में झूठे दावे किए गए हैं. भारतीय मिशन ने ब्रिटिश मीडिया सहित विदेशी मीडिया के भारत में चल रहे किसानों के प्रदर्शन का खुद साक्षी बन खबरें देने का जिक्र किया और कहा कि इसलिए ‘‘भारत में प्रेस की स्वतंत्रता में कमी पर कोई सवाल नहीं उठता.’’

उच्चायोग ने एक बयान में कहा, ‘‘बेहद अफसोस है कि एक संतुलित बहस के बजाय बिना किसी ठोस आधार के झूठे दावे किए गए... इसने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में से एक और उसके संस्थानों पर सवाल खड़े किए हैं.’’ यह चर्चा एक लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर वाली ‘ई-याचिका’ पर की गई. भारतीय उच्चायोग ने इस चर्चा पर अपनी नाराजगी जाहिर की है. मिशन ने कहा कि आमतौर पर वह सांसदों के एक छोटे समूह के बीच हुई आंतरिक बहस पर कोई टिप्पणी नहीं करता.



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किसानों के प्रदर्शन को लेकर गलत दावेः उच्चायोग
बयान में कहा, ‘‘लेकिन जब भारत पर किसी भी तरह की आशंकाएं व्यक्त की जाती हैं, तो दोस्ती, भारत के लिए प्यार या घरेलू राजनीतिक दबाव के किसी भी दावे से परे उसका अपना रुख स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है.’’ उसने कहा कि किसानों के प्रदर्शन को लेकर गलत दावे किए जा रहे हैं, जबकि ‘‘भारतीय उच्चायोग लगातार याचिका में उठाए हर मुद्दे को लेकर संबंधित लोगों को जानकारी देता रहा है.’’

किसान आंदोलन को 100 दिन से ज्यादा हुए
दिल्ली से लगी सीमाओं पर 100 से अधिक दिन से भारत सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों पर ‘‘बल के इस्तेमाल’’ और प्रदर्शन की खबरें दे रहे पत्रकारों को निशाना बनाए जाने के मुद्दे पर ब्रिटेन के सभी दलों के 10 से अधिक सांसदों के चर्चा करने के बाद मिशन ने यह बयान जारी किया.

गौरतलब है कि किसान भारत सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने और उनकी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्यों (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने की मांग को लेकर 28 नवम्बर से दिल्ली से लगी सीमाओं पर डटे हैं.
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