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मध्य प्रदेश में जंगल बढ़े या घटे हैं? देखिए, कैसे अफसरों ने मुख्यमंत्री को भी आंकड़ों के बियाबान में उलझा दिया!

मध्य प्रदेश में जंगल बढ़े या घटे हैं? देखिए, कैसे अफसरों ने मुख्यमंत्री को भी आंकड़ों के बियाबान में उलझा दिया!

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान.

Forest cover in MP, truth unveils : अफसरों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) के सामने विभागीय प्रस्तुतिकरण (Departmental Presentation) दिया था. इसमें बताया था कि साल 2005 से 2019 के बीच राज्य में बेहद घने जंगलों का दायरा 2,437 वर्ग किलोमीटर बढ़ गया है.

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भोपाल. अफसरशाही जो करे, सब कम है. अच्छा करने पर आए तो मिसाल बना दे. और गड़बड़ करे तो नजीर बन जाए. ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का है, जहां से जंगलों का क्षेत्रफल (Forest Area) और बाघों की संख्या (Tigers Census) कम-ज्यादा होने की खबरें अक्सर सुर्खियों में रहती हैं. अभी मामला जंगलों के क्षेत्रफल का है, जिसमें अफसरों ने आंकड़ों के बियाबान में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) को भी उलझा दिया. हालांकि जल्द ही इस कारस्तानी का मीडिया के जरिए खुलासा हो गया.

वाकया इसी 3 जनवरी का है. ‘जंगल विभाग’ (मन करे हो तो वन विभाग भी कह सकते हैं) के अफसरों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) के सामने विभागीय प्रस्तुतिकरण (Departmental Presentation) दिया था. इसमें बताया था कि साल 2005 से 2019 के बीच राज्य में बेहद घने जंगलों का दायरा 2,437 वर्ग किलोमीटर बढ़ गया है. यानी एक बड़ी उपलब्धि. लिहाजा, जैसे ही खबर सामने आई, देशभर में इसका चर्चा हुआ.

लेकिन मीडिया ने बता दिया, ये आंकड़ों की कारस्तानी है
चर्चा हुआ तो खबरखोजी इन आंकड़ों की सच्चाई का पता लगाने में जुट गए. इसके नतीजे में करीब हफ्ते भर बाद ‘दैनिक भास्कर’ ने अपनी पड़ताल के जरिए बताया कि ‘जंगल विभाग’ के अफसरों ने जो आंकड़े बताए, वे असल में कारस्तानी हैं. अखबार ने आईएसएफआर (India State Of Forest Report) का हवाला दिया. बताया कि 2,437 में से 2,408 वर्ग किलोमीटर बेहद घने जंगल तो 2007 में ही बढ़ चुके थे. इसके बाद 2007 से 2019 तक 12 साल में सिर्फ 29 वर्ग किलोमीटर ही इस श्रेणी के जंगलों का दायरा बढ़ा. लेकिन अफसरों ने 12 साल की यह सच्चाई नहीं बताई. बजाय इसके 2005 से गिनती शुरू कर 14 सालों के आंकड़े जोड़ दिए और शाबाशी ले ली.

जंगलों की तीनों श्रेणियां मिला लें तो 38 जिलों में जंगल घट गए हैं
अखबार ने आईएसएफआर की 2021 की ताजा रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जंगलों का दायरा तीन श्रेणियों में मापा जाता है. पहली- खुले वन, दूसरी- घने वन और तीसरी- बेहद घने वन. इन तीनों श्रेणियों को मिलाकर अगर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में जंगलों के विस्तार को देखा जाए तो वास्तव में उनका क्षेत्रफल बीते सालों में कम हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के 1,2 नहीं बल्कि 38 जिलों में जंगलों की तीनों श्रेणियों का कुल दायरा कम हुआ है.
हालांकि अफसरों को शायद इसकी चिंता कम, अपनी रिपोर्ट बेहतर करने और शाबाशी लेने की फिक्र अधिक है. कम से कम इस वाकये से तो यही लगता है.

Tags: Chief Minister Shivraj Singh Chouhan, Forest area, Forest department, Hindi news, Madhya pradesh news

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