लाइव टीवी

Digital Prime Time: बदलेगा न्यायिक सेवा का स्वरूप- AIJS की तैयारी में सरकार

Anil Rai | News18Hindi
Updated: February 3, 2020, 10:50 PM IST
Digital Prime Time: बदलेगा न्यायिक सेवा का स्वरूप- AIJS की तैयारी में सरकार
सरकार का मानना है कि युवा अवस्था में सीधे जिला जज बनने वाले न्यायाधीश तय समय पर प्रमोशन पाकर सर्वोच्च न्यायलय तक पहुंच सकते हैं.

सूत्रों की मानें तो न्यायिक सेवा आयोग के लिए सरकार ने एक ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है. इस ड्राफ्ट के तहत AIJS परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवार की आयु 28 वर्ष से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए. साथ ही उसे 7 साल का न्यायिक कार्य का अनुभव होना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 3, 2020, 10:50 PM IST
  • Share this:
केन्द्र सरकार ने देश में न्यायिक सेवा के स्वरूप को बदलने की तैयारी कर रही है. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट और जिला स्तर पर ज्यादा से ज्यादा युवा न्यायाधीशों को मौका देने के लिए सरकार अखिल भारतीय स्तर पर न्यायिक सेवा आयोग बनाने की तैयारी में है. इस संबंध में सरकार संघ लोकसेवा आयोग की तरह न्यायित सेवा आयोग बनाने की तैयारी में है. अब तक लोअर कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक न्यायधीशों का चयन राज्य स्तर पर होता है और उसके अलग-अलग राज्यों से न्यायधीश सर्वोच्च न्यायालय में आते हैं.

सूत्रों की मानें तो न्यायिक सेवा आयोग के लिए सरकार ने एक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. इस ड्राफ्ट के तहत AIJS परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवार की आयु 28 वर्ष से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए. साथ ही उसे 7 साल का न्यायिक कार्य का अनुभव होना चाहिए, किसी विश्वविद्यालय में कानून पढ़ाने वाले के 7 साल के अनुभव को भी बराबर माना जाएगा. यूपीएससी परीक्षा की तरह AIJS पास करने वाले की नियुक्ति भी ट्रेनिंग के बाद जिला जज के स्तर पर की जाएगी. सरकार का मानना है कि युवा अवस्था में सीधे जिला जज बनने वाले न्यायाधीश तय समय पर प्रमोशन पाकर सर्वोच्च न्यायलय तक पहुंच सकते हैं. अब तक अलग-अलग राज्यों में HJS परीक्षा के जरिए चुने जाने वाले जज हाईकोर्ट से आगे नहीं पहुंच पाते.

भारत के मुख्य न्यायाधीश ने AIJS परीक्षा और सिलेबस के लिए वर्तमान जज की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया है इस कमेटी में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य भी मेंबर होंगे साथ ही पिछले साल जून में सरकार ने राज्य सरकारों को विचार जानने के लिए पत्र भी लिखा था.

आसान नहीं है सरकार की राह

सरकार भले ही न्यायिक सेवा आयोग बनाने की तैयारी कर रही हो लेकिन इसको बनाना इतना आसान भी नहीं है. इसके पहले भी कई बार सरकार इस दिशा में कदम आगे बढ़ाने की कोशश कर चुकी है. सरकार ने पिछले साल भी अखिल भारतीय न्यायिक सेवा परीक्षा कराने का प्रस्ताव रखा था लेकिन तब 9 हाईकोर्ट में इस प्रस्ताव का विरोध किया था जबकि आठ ने प्रस्तावित ढांचे में बदलाव की बात कही थी सिर्फ दो हाईकोर्ट ने सरकार के इस प्रस्ताव का इसका समर्थन किया था. इसके पहले 1961, 1963 और 1965 में मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के गठन के पक्ष लिया गया था लेकिन ये प्रस्ताव कागजो से आगे नहीं बढ़ सका. विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इस तरह के परीक्षा कराने की सिफारिश की गई थी. हाल ही में केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी अदालतों में में युवा प्रतिभाओं को मौका देने के लिए राष्ट्रीय स्तर परीक्षा कराने की वकालत की थी.

60 साल से चल रही है कोशिश
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जब सब चाहते हैं कि देश भर में अखिल भारतीय न्यायिक सेवा आयोग बने और युवा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में पहुंचे तो आखिर क्या वजह है कि लगातार 60 साल से ज्यादा समय से प्रस्ताव के बाद भी ऐसा आयोग नहीं बन पा रहा है. इस सेवा के न लागू होने के एक कारण सीआरपीसी और सीपीसी के प्रावधानों का माना जा रहा है. इन प्रावधानों के तहत अधीनस्थ न्यायलयों में आदेश स्थानीय भाषा में भी किया जा सकता है. कुछ लोगों का मानना है कि AIJS के लागू होने के बाद एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतर होने लगेगा और भाषा की समस्या आएगी. कुछ राज्य सरकारें और हाईकोर्ट को लगता कि AIJS हो जाने के बाद जजों की नियुक्तियों में उनकी भूमिका सिमट जाएगी, कुछ राज्य इसे संघीय ढांचे के खिलाफ भी मानते हैं, इसके अलावा और भी कई कारण है जिनके नाते अब तक AIJS का प्रस्ताव कागजों से आगे नहीं बढ़ पाया.क्या होगा बदलाव
अखिल भारतीय न्यायिक सेवा आयोग लागू करने से ऐसी उम्मीद की जा रही है कि प्रतिभावान युवा कम उम्र में ही न्यायिक सेवा में आ जाएंगे. साथ ही देश के अलग-अलग राज्यों में न्यायिक सेवा में नियुक्ति और पदोन्नति में एकरूपता आ सकती है. न्यायिक सेवा आयोग बनने के बाद लगातार न्यायाधीशों की नियुक्ति में जो पक्षपात के आरोप लगते हैं वह भी समाप्त हो जाएंगे. AIJS में न्यायधीशों का चयन कम उम्र में ही हो जाएगा ऐसे में उच्च न्यायलय और सर्वोच्च न्यायलय में पहुंचने तक उन्हें लम्बा न्यायिक अनुभव हासिल हो जाएगा. अभी तक न्यायिक सेवा में परीक्षा के जरिए सिर्फ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तक पहुंचा जा सकता था ऐसे में बहुत सारे प्रतिभावन युवक इस सेवा की ओर जाने से बचते थे.

ये भी पढ़ें-
देश में बीते 3 साल में सड़क हादसों से हुई 4.5 लाख से ज्यादा मौतें

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 3, 2020, 9:09 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर