Home /News /nation /

तालिबान शासन पर हुर्रियत; 4 दशक के संघर्ष पर लग सकता है विराम, इस्लाम में मानवता और समानता की जगह

तालिबान शासन पर हुर्रियत; 4 दशक के संघर्ष पर लग सकता है विराम, इस्लाम में मानवता और समानता की जगह

कश्मीरी अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक (AP Photo/ Dar Yasin)

कश्मीरी अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक (AP Photo/ Dar Yasin)

Jammu and Kashmir: हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने उम्मीद जताई है कि युद्ध प्रभावित देश अफगानिस्तान में नया प्रशासन समावेशी एवं व्यापक आधार वाला होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated :

    श्रीनगर. मीरवाइज उमर फारूक (Mirwaiz Umar Farooq) की अगुवाई वाले हुर्रियत काफ्रेंस (Hurriyat Conference) के धड़े ने गुरुवार को उम्मीद जतायी कि अफगानिस्तान (Afghanistan) में नई सरकार के गठन से उस देश में चार दशक से चल रहे संघर्ष पर पूर्ण विराम लग जाएगा और अनिश्चितता खत्म हो जाएगी. अमेरिकी सैन्यबलों की वापसी के बाद में तालिबान  (Taliban) ने पिछले महीने अफगानिस्तान की सत्ता संभाल ली और उसने सभी महत्वपूर्ण शहरों एवं नगरों पर नियंत्रण कायम कर लिया. तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल को भी अपने नियंत्रण में ले लिया एवं मंगलवार को मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद (Mullah Mohammad Hassan Akhund) के नेतृत्व में अंतरिम सरकार की घोषणा कीं.

    हुर्रियत ने आशा प्रकट की है कि इस युद्ध प्रभावित देश में नया प्रशासन समावेशी एवं व्यापक आधार वाला होगा. उसने कहा कि यह अवश्य ध्यान में रखा जाना चाहिए कि इस्लाम धर्म मानव समानता एवं अधिकार, आर्थिक निष्पक्षता एवं धार्मिक सहिष्णुता को मौलिक मूल्यों में रूप में समर्थन करने पर पूरी तरह स्पष्ट है.

    अफगानिस्तान एवं कश्मीर के बीच फर्क सबको मालूम- हुर्रियत
    उसने एक बयान में कहा, ‘पिछले एक महीने में अफगानिस्तान में भ्रामक एवं अराजक घटनाक्रम के बाद हुर्रियत को अब आस है कि नई सरकार के गठन से चार दशक के अनवरत संघर्ष एवं अनिश्चितता पर पूर्ण विराम लगेगा.’ हुर्रियत ने कहा कि दो संघर्ष क्षेत्र एक समान नहीं होते हैं और अफगानिस्तान एवं कश्मीर के बीच फर्क सबको मालूम है.

    हुर्रियत ने कहा कि लेकिन ‘कश्मीर में हम उस देश के आम लोगों से समानुभूति कर ही सकते हैं क्योंकि वे भी 40 सालों से भयंकर अनिश्चितता में रह रहे थे.’ उन्होंने कहा, ‘लंबे समय की अनिश्चितता अपनी कीमत वसूलती ही है और हम आशा करते हैं कि अफगानिस्तान के लोग शीघ्र उससे बाहर आयेंगे. हमें यह भी उम्मीद है कि देश अपने भविष्य के निर्माण एवं अपनी आकांक्षाओं को साकार करने की प्रक्रिया शुरू करेगा एवं सभी क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सदस्य देश उसे अपना सहयोग देंगे.’

    तालिबान को ‘सच्ची शरिया’ का पालन करना होगा: महबूबा
    इससे पहले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को कहा था कि अफगानिस्तान की बागडोर संभालने वाले तालिबान को ‘सच्ची शरिया’ का पालन करना चाहिए, जोकि महिलाओं सहित सभी के अधिकारों की गारंटी देता है. महबूबा ने कहा, ‘तालिबान एक वास्तविकता के रूप में सामने आया है. सत्ता में पहली बार उसकी छवि मानवाधिकारों के विरोधी की तरह थी. अगर वह अफगानिस्तान पर शासन करना चाहता हैं, तो उसे कुरान में निर्धारित सच्चे शरिया कानून का पालन करना होगा, जोकि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के अधिकारों की गारंटी देता है.’

    जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर तालिबान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ व्यापार करना चाहता है तो उसे धार्मिक कट्टरता से दूर रहना चाहिए. महबूबा ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो यह अफगानिस्तान के लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर देगा.

    Tags: Afghanistan, Hurriyat conference, India, Jammu kashmir, Taliban

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर