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अयोध्या केस: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ASI के पूर्व निदेशक केके मुहम्मद ने जताई खुशी, कहा- अब हुआ दोषमुक्त

News18Hindi
Updated: November 10, 2019, 9:35 AM IST
अयोध्या केस: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ASI के पूर्व निदेशक केके मुहम्मद ने जताई खुशी, कहा- अब हुआ दोषमुक्त
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या पर दिए अपने फैसले में एएसआई की रिपोर्ट का किया जिक्र.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में फैसला सुनाते हुए सीजेआई रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने कहा था कि कि एएसआई (ASI) की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता. एएसआई की रिपोर्ट में जमीन के भीतर मंदिर होने के सबूत दिए गए हैं.

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  • Last Updated: November 10, 2019, 9:35 AM IST
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नई दिल्ली. अयोध्या मामले (Ayodhya case) में शनिवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने विवादित जमीन रामलला विराजमान (ram lalla virajman) को देने का फैसला सुनाया था. सीजेआई रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि एएसआई (ASI) की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता. एएसआई की रिपोर्ट में जमीन के भीतर मंदिर होने के सबूत दिए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व निदेशक व पद्मश्री केके मुहम्मद ने खुशी जताते हुए कहा कि वह अब खुद को दोष मुक्त महसूस कर रहे हैं.

केके मुहम्मद ने कहा कि अयोध्या मामले में पुरातात्विक व ऐतिहासिक साक्ष्य पूरी तरह से हिंदुओं के पक्ष में रहे हैं. केके मुहम्मद, 1976-77 में पुरातत्वविद प्रोफेसर बीबी लाल के नेतृत्व में अयोध्या में खुदाई करके साक्ष्य इकट्ठा करने वाली टीम में शामिल थे. उन्होंने दावा किया है कि कुछ इतिहासकारों ने लोगों को बरगलाया, जिसके कारण ये मामला इतना पेचीदा होता चला गया है. उन्होंने कहा कि 70 के दशक में अयोध्या की खुदाई के दौरान इस बात के प्रमाण मिले थे कि अयोध्या में मंदिर था. इसी के साथ इन मंदिर के अवशेषों को देखकर पता चलता है कि विवादित जमीन पर कभी भव्य विष्णु मंदिर बना था.

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केके मुहम्मद ने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर के साक्ष्य मौजूद हैं, ये अलग-अलग कालखंडों में लिखे गए ग्रंथों में भी देखने को मिलता है. मुगल सम्राट अकबर के कार्यकाल (1556-1605 ईस्वी) में अबुल फजल ने आइने अकबरी लिखी थी. अबुल फजल ने आईना-ए-अकबरी ने लिखा है कि चैत्र माह में काफी संख्या में हिंदू श्रद्धालु यहां पर पूजा करने के लिए आते थे. इसी तरह जहांगीर के कार्यकाल (1605-1628) में अयोध्या आए ब्रिटिश यात्री विलियम फींस ने भी अपनी यात्रा के दौरान का जिक्र करते हुए लिखा था कि अयोध्या में श्रद्धालु पूजा करने के लिए आते थे.

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उन्होंने बताया कि 1766 में पादरी टेलर ने भी अपनी यात्रा के दौरान का वृतांत बताते हुए लिखा था कि इस स्थल पर हिंदू श्रद्धालु यहां पर पूजा-अर्चना किया करते थे. उन्होंने भी ब्रिटशन यात्री विलियम फींस की तरह ही इस बात का कोई प्रमाण नहीं दिया है कि इस जगह पर कभी नमाज भी पढ़ी जाती थी.

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First published: November 10, 2019, 9:19 AM IST
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