अयोध्या फैसले में खामियां हैं, लेकिन हमें आगे बढ़ने की जरूरत है : यशवंत सिन्हा

यशवंत सिन्हा ने अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की है.
यशवंत सिन्हा ने अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की है.

पूर्व बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) ने कहा कि अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय गलत है, इसमें कई खामियां हैं लेकिन मुस्लिम समुदाय फैसले को स्वीकार करना चाहिए.

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  • Last Updated: November 18, 2019, 2:17 AM IST
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मुंबई. पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) ने अयोध्या मुद्दे (Ayodhya issue) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले (Supreme Court verdict) की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले पर कोर्ट के फैसले में कई खामियां हैं, बावजूद इसके मुस्लिम समुदाय को इसे स्वीकार करना चाहिए. सिन्हा ने रविवार को मुंबई साहित्य महोत्सव में यह बयान दिया.

यशवंत सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर पूंछे गये सवाल पर कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट का फैसला गलत निर्णय है, इसमें कई खामियां हैं लेकिन मैं फिर भी मुस्लिम समुदाय से फैसले को स्वीकार करने के लिए कहूंगा.’ उन्होंने कहा, ‘चलिए आगे बढ़ते हैं. उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद कोई फैसला नहीं है.’

इस बीच सिन्हा ने यह भी दावा किया कि लाल कृष्ण आडवाणी और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं को शुरुआत में बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर पछतावा था, लेकिन बाद में वे राम मंदिर आंदोलन का श्रेय लेने लगे.



रिव्यू पिटीशन दायर करेगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
गौरतलब है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ  पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर करने का ऐलान कर दिया है. बता दें कि लखनऊ के मुमताज डिग्री कॉलेज में 3 घंटे चली बैठक के बाद पर्सनल लॉ बोर्ड ने ये निर्णय लिया. बोर्ड की प्रेस कांफ्रेंस में सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि बोर्ड ने तय किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर रिव्यू पेटीशन दाखिल करेगा.

उन्होंने कहा कि बोर्ड ने साथ ही फैसला किया है कि मस्जिद के लिए दी गई 5 एकड़ की जमीन मंजूर नहीं है. उल्लेखनीय है कि  इससे पहले जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने भी रिव्यू पिटीशन दायर करने की बात कही थी. उन्होंने कहा कि हम न मस्जिद को दे सकते हैं और न ही उसकी जगह कोई जमीन ले सकते हैं. मुकदमे में हमें हमारा हक नहीं दिया गया. मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिन्द रिव्यू पिटीशन दाखिल करेगी.

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