पूर्व नौकरशाहों ने कृषि क्षेत्र के कानूनों के समर्थन में बयान जारी किया

नए कृषि कानून को लेकर किसान आंदोलनरत हैं.
नए कृषि कानून को लेकर किसान आंदोलनरत हैं.

पूर्व नौकरशाहों (Former Bureaucrats) के बयान में आरोप लगाया गया कि देश को अस्थिर करने और अल्पसंख्यकों (Minorities), छात्रों तथा किसानों के बीच असंतोष पैदा करने के लिए ‘‘निहित हित’’ (Vested Interest) वाले लोगों के प्रयासों पर संदेह करने की वजह है.

  • भाषा
  • Last Updated: September 28, 2020, 8:56 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. पूर्व नौकरशाहों (Former Bureaucrats) के एक समूह ने मोदी सरकार (Modi Government) के बनाए कृषि सुधार कानूनों (Agricultural Reform Laws) का सोमवार को समर्थन किया और आरोप लगाया कि किसानों की मनोदशा (Mood of farmers) पर नकारात्मक असर डालने के लिए मुद्दे पर ‘‘दुष्प्रचार’’ (Vicious Propaganda) किया जा रहा है. इन पूर्व नौकरशाहों ने दावा किया कि संसद (Parliament) द्वारा पारित विधेयकों ने देश के किसान समुदाय को शोषण वाली व्यवस्था (Exploitative system) से आजादी दी है. उन्होंने एक बयान में आरोप लगाया, ‘‘आशंका करने की वजह है क्योंकि हमारे समाज (society) में कुछ धड़े देश में दुष्प्रचार कर रहे हैं. हाल के समय में हमने देखा है कि असत्य (Untruth) और तोड़-मरोड़ कर बातों को रखे जाने से अल्पसंख्यकों, छात्रों (Students) की मनोदशा पर बहुत ही नकारात्मक असर पड़ा और अब किसानों के साथ ऐसा किया जा रहा है.’’

पूर्व नौकरशाहों के बयान में आरोप लगाया गया कि देश को अस्थिर करने और अल्पसंख्यकों (Minorities), छात्रों तथा किसानों के बीच असंतोष पैदा करने के लिए ‘‘निहित हित’’ (Vested Interest) वाले लोगों के प्रयासों पर संदेह करने की वजह है. इस समूह में पूर्व वित्त सचिव (Former Finance Secretory) एस नारायण, पूर्व बैंकिंग सचिव डी के मित्तल, पूर्व रक्षा सचिव जी मोहन कुमार, पूर्व पेट्रोलियम सचिव सौरभ चंद्रा और पूर्व नागर विमानन सचिव के एन श्रीवास्तव समेत 32 पूर्व आईएएस अधिकारी (Former IAS Officers) शामिल हैं. परोक्ष तौर पर कांग्रेस का हवाला देते हुए पूर्व नौकरशाहों ने कहा है कि कुछ राजनीतिक दल (Political Parties) जो अब इस कानून का विरोध कर रहे हैं उनके घोषणापत्र में भी बिचौलियों से किसानों (Farmers) को मुक्ति दिलाने और अपनी उपज को कहीं भी बेचने की आजादी दिलाने की बात कही गयी थी.

इन कानूनों से देश के किसानों की प्रगति को धीमा करने वाले अवरोध खत्म किये गये
पूर्व नौकरशाहों ने कहा है कि सरकार ने किसानों के जीवन में बदलाव के लिए महत्वपूर्ण कानून बनाए हैं. इन कानूनों के जरिए देश के किसानों की प्रगति को धीमा करने वाले अवरोधों को खत्म किया गया है . पूर्व नौकरशाहों ने इन कानूनों के तहत किसानों को कहीं भी अपनी उपज बेचने और किसी के साथ भी अनुबंध करने की आजादी के प्रस्तावित फायदों का जिक्र करते हुए कहा है कि किसानों को ‘‘भड़काना’’ आपत्तिजनक है. बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सरकार ने स्पष्ट आश्वासन दिया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था पहले की तरह बनी रहेगी .
पूर्व नौकरशाहों ने कहा कि किसानों को जहां भी दिक्कतें हो रही हैं, वह अपर्याप्त स्थानीय विपणन सुविधा के कारण होती है और इस कारण से बिचौलिए उनका ‘‘शोषण’’ करते हैं . उन्होंने कहा है कि अगर भारत उनके लिए एक बाजार के तौर पर विकसित हो जाए और निजी क्षेत्र उनके उत्पादों की खरीद करे तो किसानों को कभी नुकसान नहीं होगा.



यह भी पढ़ें- कृषि कानून का विरोध: अमरिंदर बोले-मेरा ट्रैक्‍टर, मैं फूंक रहा, तुम्‍हें क्या?

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार द्वारा विभिन्न आर्थिक पैकेजों के साथ ही ऐतिहासिक कानूनों से निश्चित तौर पर किसान समुदायों का उत्थान होगा और वे समृद्ध होंगे. इन कानूनों से किसानों के लिए निष्पक्ष और मुक्त तंत्र का निर्माण होगा.’’ पूर्व नौकरशाहों ने कहा, ‘‘हमारा समूह किसानों को गुमराह करने और राष्ट्रीय पहल को बदनाम करने के निहित हितों के प्रयासों की निंदा करता है. ’’
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज