अनुच्छेद 370 पर हुड्डा ने क्या इसलिए कांग्रेस पर बोला हमला?

Kinshuk Praval | News18Hindi
Updated: August 19, 2019, 1:57 PM IST
अनुच्छेद 370 पर हुड्डा ने क्या इसलिए कांग्रेस पर बोला हमला?
रोहतक की परिवर्तन रैली में भूपेंद्र सिंह हुड्डा

जनसंख्या के हिसाब से 2 प्रतिशत से कम की आबादी के बावजूद देश की सेनाओं में 10 फीसदी से ज्यादा का योगदान देने के कारण हरियाणा की राजनीति राष्ट्रवाद की धुरी पर घूमती है

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 19, 2019, 1:57 PM IST
  • Share this:
रोहतक में परिवर्तन महारैली कर हरियाणा के पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा ने हरियाणा की राजनीति में एक बड़े परिवर्तन का संकेत दे दिया है. पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने रैली में अपनी ही पार्टी पर हमला बोला. हुड्डा ने केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले का समर्थन करते हुए कांग्रेस पर भटकने का आरोप लगाया. ऐसे में सवाल उठता है कि ऐन विधानसभा चुनाव से पहले हुड्डा का पार्टी लाइन से अलग हटकर बयान क्या राजनीतिक संकेत देता है?

सेना में हरियाणा का 10 फीसदी प्रतिनिधित्व

कांग्रेस ने हुड्डा को लगातार दो बार हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाया. लेकिन अब उसी कांग्रेस से हुड्डा का मोहभंग होता दिख रहा है. बदले-बदले से हुड्डा बागी नज़र आ रहे हैं. क्या इसकी सबसे बड़ी राजनीतिक वजह ये है कि हरियाणा में हर दूसरा या तीसरा परिवार भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहा है? दरअसल, देश की आबादी में 2 प्रतिशत से भी कम का प्रतिनिधित्व रखने वाला हरियाणा सशस्त्र सुरक्षा बल में 10 फीसदी का प्रतिनिधित्व रखता है. इसी वजह से हुड्डा इस बड़े वोटबैंक को राष्ट्रीयता और अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर  नाराज़ नहीं करना चाहते हैं. हुड्डा खुद भी स्वतंत्रता सेनानी परिवार से आते हैं. उनके पिता रणबीर सिंह हुड्डा स्वतंत्रता सेनानी और संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य थे. यही वजह है कि हुड्डा अपनी पारिवारिक विरासत पर भी राष्ट्रीयता के मुद्दे पर कोई आंच आने देना कतई नहीं चाहते हैं.  

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का घोषणा-पक्ष बना था चुनावी मुद्दा

साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के घोषणा-पत्र में देशद्रोह कानून खत्म करने और सेना और सुरक्षाबलों के विशेषाधिकार को कम करने जैसे वादे किए गए थे. इन वादों की वजह से तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को बैकफुट पर आना पड़ गया था क्योंकि कश्मीर और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर बीजेपी ने कांग्रेस को घेर लिया था. जहां राहुल गांधी एक तरफ 72 हज़ार रुपये सालाना इनकम की गारंटी और गरीबी हटाओ जैसे नारों के साथ एक नई धारा तैयार कर रहे थे तो दूसरी तरफ कांग्रेस के घोषणा-पत्र से राष्ट्रीयता की पिच पर कांग्रेस क्लीन-बोल्ड हो गई थी. हुड्डा अब वैसी गलती हरियाणा में नहीं दोहराना चाहते हैं. हुड्डा ये जानते हैं कि हरियाणा के विधानसभा चुनाव में अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला बड़ा सियासी मुद्दा बनेगा तो ऐसे में उसके ब्रह्मास्त्र बनने से पहले ही उसकी काट निकालते हुए उन्होंने समर्थन कर दिया.

क्या हुड्डा बनाएंगे नई पार्टी?

अनुच्छेद 370 पर मोदी सरकार का समर्थन कर हुड्डा ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं. रोहतक की रैली में हुड्डा ने ये भी कहा कि, ‘हमारी पार्टी रास्ते से भटक गई है. यह पहले वाली कांग्रेस नहीं रह गई है. मेरे लिए पहले देश है. राष्ट्रवाद पर मैं किसी से समझौता नहीं करता हूं.’
Loading...

कांग्रेस पर हमले के दौरान हुड्डा का ये बड़ा आरोप है. मौजूदा कांग्रेस की कमान एक बार फिर सोनिया गांधी के हाथों में है. इसके बावजूद कांग्रेस पर भटकने का आरोप लगा कर हुड्डा न सिर्फ कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बना रहे हैं बल्कि कहीं न कहीं वो अपनी दूसरी संभावित पार्टी का चाल-चरित्र-चेहरा भी सामने रख रहे हैं. सियासी गलियारों में ये अटकलें तेज़ हैं कि हुड्डा विधानसभा चुनाव से पहले अपनी अलग पार्टी बना सकते हैं. ये कयास लगाए जा रहे हैं कि हुड्डा की पार्टी का नाम स्वराज कांग्रेस या स्वाभिमान कांग्रेस हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो हरियाणा की राजनीति में कांग्रेस से टूटकर अलग पार्टी बनाने वाले कुलदीप बिश्नोई की हरियाणा जनहित कांग्रेस का ये एक्शन-रीप्ले होगा.



हुड्डा के बागी तेवरों में सोनिया के लिए संदेश

अनुच्छेद 370 के मामले में मोदी सरकार के फैसले का समर्थन कर हुड्डा कांग्रेस आलाकमान को ये संदेश भेजने की भी कोशिश कर रहे हैं कि हरियाणा में कांग्रेस के पास उनके अलावा दूसरा विकल्प नहीं है. 13 मौजूदा विधायकों की मंच पर मौजूदगी के साथ राज्य में 4-4 डिप्टी सीएम पद का ऐलान कर हुड्डा अपनी राजनीतिक ताकत की हुंकार भर रहे हैं. हुड्डा ये बताना चाहते हैं कि जैसे पंजाब में अमरिंदर सिंह कांग्रेस के कैप्टन हैं वैसे ही हुड्डा हरियाणा में कांग्रेस के कैप्टन हैं. हरियाणा में पार्टी की अंदरूनी कलह के चलते कमजोर होती कांग्रेस के नेतृत्व पर हुड्डा दावा ठोक कर सीएम पद पक्का करना चाहते हैं. अगर उन्हें 72 साल की उम्र में सीएम पद की गारंटी कांग्रेस आलाकमान से नहीं मिलती है तो वो अपनी नई पार्टी के ऐलान में देर नहीं लगाएंगे क्योंकि उनके पास कई राजनीतिक बहाने मौजूद हैं.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 19, 2019, 1:57 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...