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हरियाणा के 4 बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं तिहाड़ में सज़ा काट रहे ओम प्रकाश चौटाला

News18Hindi
Updated: October 5, 2019, 7:55 AM IST
हरियाणा के 4 बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं तिहाड़ में सज़ा काट रहे ओम प्रकाश चौटाला
चौटाला पहले सीएम हैं जो किसी घोटाले के आरोप में दोषी साबित हुए और उन्हें सज़ा मिली

चौटाला पहले सीएम हैं जो किसी घोटाले के आरोप में दोषी साबित हुए और उन्हें सज़ा मिली

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  • Last Updated: October 5, 2019, 7:55 AM IST
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हरियाणा की राजनीति में चौधरी देवीलाल की राजनीतिक विरासत को उनके बड़े बेटे ओमप्रकाश चौटाला ने आगे बढ़ाने का काम किया. देवीलाल के दिल्ली की राजनीति में पहुंचने की वजह से ओमप्रकाश चौटाला को मुख्यमंत्री का पद थाली में सजा हुआ मिल गया. हरियाणा में  ओमप्रकाश चौटाला चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं. लेकिन अब सूबे की सियासत को वो तिहाड़ में रह कर साध रहे हैं.

चौटाला पहले सीएम जिन्हें दोषी साबित होने पर मिली सज़ा

दरअसल शिक्षक भर्ती घोटाले के मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने जनवरी 2013 में इंडियन नेशनल लोकदल पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश चौटाला, उनके बेटे अजय सिंह समेत 55 अन्य लोगों को सज़ा सुनाई है. पिता-पुत्र को 10-10 साल की सज़ा सुनाई गई. पिता-पुत्र दोनों ही तिहाड़ जेल में बंद हैं.

चौटाला पहले सीएम हैं जो किसी घोटाले के आरोप में दोषी साबित हुए और उन्हें सज़ा मिली. ओमप्रकाश चौटाला पहली बार 2 दिसंबर 1989 को हरियाणा के सीएम बने. इसके बाद जुलाई 1990, मार्च 1991 और जुलाई 1999 में हरियाणा के मुख्यमंत्री बने.

7 बार विधायक का चुनाव जीता

हरियाणा की राजनीति के बेताज बादशाह रहे हैं ओमप्रकाश चौटाला. अपने पिता पूर्व उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के जींद संसदीय क्षेत्र की उचाना कलां विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते और जीतते आए. चौटाला सात बार हरियाणा विधानसभा के लिए चुने गए. वह 1970, 1990,1993, 1996, 2000, 2005 और 2009 में हरियाणा विधानसभा का चुनाव जीते. साल 2009 में उन्होंने बेहद करीबी मार्जिन से कांग्रेस के बीरेंद्र सिंह को हराया. चौटाला ने 621 वोटों से बीरेंद्र सिंह को हराने का रिकॉर्ड बनाया.

अब जबकि जनप्रतिनिधि अधिनियम के मुताबिक किसी अपराध में दोषी और दो साल के से अधिक के कारावास की सजा पाने वाला कोई भी व्यक्ति सजा खत्म होने के छह साल बाद तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य रहेगा. ऐसे में  जब अजय सिंह चौटाला के लिए राजनीतिक रण समाप्त हुआ तो उनकी विरासत को संभालने के लिए उनके बड़े बेटे दुष्यंत चौटाला मैदान में उतरे. लेकिन इंडियन नेशनल लोकदल पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए अभय सिंह चौटाला ने दुष्यंत के लिए जगह नहीं रखी.  पारिवारिक कलह इतने चरम पर पहुंची कि दादा ओमप्रकाश ने अपने दोनों पोतों और बेटे अजय सिंह को ही पार्टी से बाहर निकाल दिया.
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पारिवारिक कलह से टूटी पार्टी

हरियाणा की सियासत में सत्ता के शिखर पर रहने वाली इंडियन नेशनल लोकदल आज पार्टी और परिवार की टूट की वजह बिखर चुकी है और राजनीतिक वजूद के लिए संघर्ष कर रही है. आज चौटाला को अपने ही पोतों से सियासी टक्कर का सामना करना पड़ा रहा है. चाचा-भतीजे की सियासी जंग को दादा ओमप्रकाश चौटाला तिहाड़ से खामोशी से देखने के लिए मजबूर हैं.

चौधरी देवीलाल की चौथी पीढ़ी सियासत के महाभारत में राजनीतिक तलवार खींचकर आमने-सामने है. पारिवारिक फूट की वजह से ही इनेलो 3 विधायकों पर सिमट गई है. पहले लोकसभा चुनाव से पहले पारिवारिक कलह की वजह से पार्टी टूटी तो अब विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के कद्दावर नेता बीजेपी और जजपा में शामिल हो गए.

चौटाला परिवार के भीतर पार्टी के वर्चस्व की लड़ाई नई बात नहीं है. जो दौर आज ओमप्रकाश चौटाला देख रहे हैं वही हालात चौधरी देवीलाल के समय भी थे. तब देवीलाल के दोनों बेटे रणजीत और ओमप्रकाश चौटाला के बीच सत्ता का संघर्ष था. लेकिन जब देवीलाल ने ओमप्रकाश चौटाला के प्रति अपने पितृमोह का इज़हार किया तो रणजीत कांग्रेस में शामिल हो गए. इसी तरह जब ओमप्रकाश चौटाला ने छोटे बेटे अभय सिंह चौटाला के प्रति पितृप्रेम दिखाया तो अजय सिंह चौटाला को बाहर का रास्ता दिखा दिया. संघर्ष का केंद्र वहीं है सत्ता. केवल धुरी देवीलाल से बदलकर अब ओमप्रकाश चौटाला हो गई है.

 

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First published: October 5, 2019, 7:55 AM IST
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