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मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री का खुलासा, 'पाक चीन ने मिजो विद्रोह को दिया था समर्थन'

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

मिजो नेशनल फ्रंट के अध्यक्ष ज़ोरामथंगा चाहते हैं कि क्रांतिकारी चे ग्वेरा के जीवन पर बनी फिल्म की तर्ज पर भविष्य में उनकी आत्मकथा पर भी हॉलीवुड की फिल्म बने.

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    कभी खूंखार उग्रवादी रहे और अब पूर्वोत्तर के अहम सियासतदान ज़ोरामथंगा ने अपनी आत्मकथा पूरी कर ली है. मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि उनकी आत्मकथा 'बहुत विवादित' किताब होगी और उस पर पाकिस्तान और चीन, दोनों ही देशों की सरकारों को ऐतराज़ हो सकता है. क्योंकि इसमें मिजोरम में विद्रोह को उनके 'समर्थन' का विस्तृत वर्णन है.

    दो खंडों में लिखी गई किताब को मिजो भाषा में, 'एमआईएलएआरआई' (मिलारी) कहा गया है. इसका अभी अंग्रेजी में अनुवाद किया जा रहा है. मिजो नेशनल फ्रंट के अध्यक्ष ज़ोरामथंगा चाहते हैं कि क्रांतिकारी चे ग्वेरा के जीवन पर बनी फिल्म की तर्ज पर भविष्य में उनकी आत्मकथा पर भी हॉलीवुड की फिल्म बने.

    ज़ोरामथंगा ने विश्वास जताया कि उनकी पार्टी राज्य में अगली सरकार बनाएगी. उन्होंने कहा कि वह पुस्तक के मिजो भाषा में रचित संस्करण का विमोचन 11 दिसंबर को विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद करेंगे. उन्होंने कहा, 'मैंने अपनी आत्मकथा को दो खंडों में लिखा है. यह बहुत विवादित किताब होगी. इसपर पाकिस्तान और चीन की सरकारों को भी आपत्ति हो सकती है.'

    मिजोरम के दो बार मुख्यमंत्री रहे जोरामथंगा ने कहा कि किताब में उनके 20 साल तक भूमिगत रहने के दिनों का विस्तार से उल्लेख है. इसमें यह भी शामिल होगा कि किस तरह से ढाका विफल हुआ और भारत ने ले. जनरल एएके नियाज़ी के एक लाख सैनिकों को पकड़ लिया.

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    ज़ोरामथंगा ने बताया कि एमएनएफ का काडर पूर्वी पाकिस्तान के कमांडो के साथ मिल गया और लेफ्टिनेंट जनरल जेएस अरोड़ा द्वारा पकड़ लिया गया लेकिन बाद में सब भाग गए और फिर जंगल में चले गए. उन्होंने कहा कि आत्मकथा में इस बात का जिक्र है कि हम रंगून (म्यांमा) के जरिए पूर्वी पाकिस्तान से जेम्स बांड की तरह बचकर निकले और अराकान जंगल में कई दिनों तक चले. इसमें बताया गया है कि हम कैसे भुट्टो से मिले और विदेशी धरती से हमने कैसे भारत के साथ शांति वार्ता शुरू की.

    ज़ोरामथंगा ने बताया कि किताब में उनके और एमएनएफ विद्रोहियों के चीन जाने और वहां के प्रधानमंत्री झोउ एनलाई, माओ त्से तुंग, लिन बिआओ और चिआंग चिंग समेत अन्य चीनी नेताओं से मिलने का उल्लेख है. उन्होंने बताया, 'हमने हथियारों इत्यादि के रूप में चीनी सरकार से कैसे मदद हासिल की. इसको भी रिकॉर्ड करना चाहिए. कुछ प्रकाशकों में ये चीजें छापने की हिम्मत नहीं है, लेकिन मैंने इन्हें मिजो भाषा में लिखा है और इसका अब (अंग्रेजी में) अनुवाद किया जा रहा है.'

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    उनसे पूछा गया कि पुस्तक का विमोचन करने की उनकी योजना कब है तो ज़ोरामथंगा ने कहा कि मिजो भाषा में दो खंडों का प्रकाशन पूरा हो चुका है और विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद जब वह सरकार बना लेंगे तो इसका विमोचन किया जाएगा. रुपहले पर्दो पर अपनी जिदंगी को देखने की तमन्ना जाहिर करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी आत्मकथा में एक बेहतरीन हॉलीवुड फिल्म बनने का सारा मसाला मौजूद है.

    उन्होंने कहा उनकी दिलचस्पी बॉलीवुड को अपनी पुस्तक देने में नहीं है क्योंकि उसमें सबकुछ दिखाने की हिम्मत नहीं है. जिसमें भारत सरकार के खिलाफ एमएनएफ की लड़ाई और रणनीतियां शामिल हैं. साथ में अन्य संवेदनशील जानकारी भी हैं.

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