पंजाब: प्रकाश बादल SIT के सामने नहीं होंगे पेश, कोटकपूरा और बेअदबी मामले में पूछे जाने थे 82 सवाल

पूर्व सीएम प्रकाश बादल ने कहा है कि वह स्वस्थ होने पर खुद चंडीगढ़ स्थित उनके आवास पर SIT के सवालों के जवाब देंगे.

Sacrilege Case: इससे पहले भी रिटायर्ड IPS कुंवर विजय प्रताप की अगुवाई वाली SIT पिछले साल 16 नवंबर को प्रकाश सिंह बादल से पूछताछ कर चुकी है. गौरतलब है कि 2015 में बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप चोरी हो गए थे.

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    चंडीगढ़. कोटकपूरा गोलीकांड (Kotkapura Firing) और गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी (Sacrilege of Guru Granth Sahib) के मामलों में अब शिरोमणि अकाली दल के सरंक्षक और पूर्व सीएम प्रकाश बादल (Prakash Badal) खराब स्वास्थ्य के कारण अब हाईकोर्ट के निर्देशों पर बनी SIT के समक्ष 16 जून को पेश नहीं होंगे. उन्हें खराब स्वास्थ्य के कारण डॉक्टरों ने दस दिन तक आराम करने की सलाह दी है.

    पूर्व सीएम ने कहा है कि वह स्वस्थ होने पर खुद चंडीगढ़ स्थित उनके आवास पर SIT के सवालों के जवाब देंगे. उधर बताया जा रहा है कि इस मामले में शिअद के प्रधान सुखबीर बादल को भी SIT पूछताछ के लिए तलब कर सकती है. पूर्व सीएम से पूछताछ के लिए एसआईटी ने 82 सवालों की लिस्ट तैयार की है. SIT अभी तक पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी, डीजीपी इकबालप्रीत सहोता और स्पेशल डीजीपी होमगार्ड रोहित चौधरी सिंह से पूछताछ कर चुकी है.

    क्या है मामला
    इससे पहले भी रिटायर्ड IPS कुंवर विजय प्रताप की अगुवाई वाली SIT पिछले साल 16 नवंबर को प्रकाश सिंह बादल से पूछताछ कर चुकी है. गौरतलब है कि 2015 में बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप चोरी हो गए थे. जिसके करीब तीन माह बाद पुलिस ने कुछ ऐसे पोस्टर बरामद किए थे जिनमें बेअदबी के लिए डेराप्रमियों का हाथ होने का अंदेशा जताया गया था.

    अक्टूबर माह में जब दोबारा से बेअदबी की घटना जब दोबारा सामने आई तो 12 अक्टूबर 2015 को सिख संगठनों के नेताओं ने पहले बरगाड़ी और फिर कोटकपूरा के मेन चौक में आकर प्रदर्शन शुरू कर दिया. 14 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों पर कोटकपूरा और बहिबल कलां में फायरिंग कर दी थी जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि पुलिस सहित कई लोग घायल हो गए थे.

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    तीन बार जांच के लिए गठित किए आयोग
    तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पंजाब पुलिस के डीजीपी सुमेध सैनी का तबादला कर दिया था और मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए 16 अक्टूबर 2015 को रिटायर्ड जज जस्टिस जोरा सिंह के नेतृत्व में आयोग का गठन किया था. इस आयोग पर जब सिख संगठनों ने सवाल उठाए तो 27 दिसंबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस मार्कंडेय काटजू के नेतृत्व में एक अन्य जांच आयोग का गठन किया गया.

    एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस काटजू की रिपोर्ट को फरवरी 2016 में अकाली-भाजपा सरकार ने मानने से इनकार दिया. यही नहीं जस्टिस जोरा सिंह की रिपोर्ट को भी 30 जून 2016 में सरकार ने नकार दिया. कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद 2017 को जस्टिस रणजीत सिंह के नेतृत्व में एक जांच आयोग का गठन कर जांच शुरू की. जस्टिस रणजीत सिंह आयोग ने 30 जून 2018 को अपनी रिपोर्ट सरकार को दी, जिसमें बेअदबी के मामलों में डेरा की भूमिका पर संदेह जताया गया था. इसके बाद यह जांच अब कई पड़ावों से गुजर रही है और अभी तक कोई साकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए हैं.

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