वित्त मंत्रालय ने पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली को दी श्रद्धांजलि, GST को सफल तरीके से लागू करवाने को बताया ऐतिहासिक

वित्त मंत्रालय ने पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली को दी श्रद्धांजलि, GST को सफल तरीके से लागू करवाने को बताया ऐतिहासिक
बीजेपी नेता अरुण जेटली की पहली पुण्‍यतिथि आज है.

मोदी सरकार के संकट मोचक अरुण जेटली (Arun Jaitley) की पहली पुण्यतिथि पर वित्त मंत्रालय ने कहा कि जीएसटी (GST) लागू करने में जेटली की अहम भूमिका रही है. जीएसटी के आने से लोगों को महंगाई से काफी राहत मिली. .

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 24, 2020, 8:33 PM IST
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नई दिल्ली. वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) को सोमवार को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी. वित्त मंत्रालय ने कई ट्विट कर कहा कि जीएसटी को लागू करने में अरुण जेटली की काफी अहम भूमिका रही है और इसके लिए उन्हें हमेशा याद रखा जायेगा. पूरी दुनिया ने देखा कि जीएसटी लागू होने से भारतीय टैक्सेशन सिस्टम में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला. गौरतलब है पूर्व केंद्रीय मंत्री और जाने माने वकील अरुण जेटली का 24 अगस्त 2019 को निधन हो गया था. जेटली को हाज़िर जवाबी और मोदी सरकार के संकट मोचक के तौर पर भी जाना जाता रहा है.

जीएसटी से पहले टैक्सेशन को लेकर ये थी देश में व्यवस्था
जीएसटी से पहले सामानों और सेवाओं पर टैक्स वसूला जाता था जिससे सामानों के दाम बहुत अधिक हो जाते थे. टैक्स पर वैट,एक्साइज, सेंट्रल सेल टैक्स लगाये जाते थे. जीएसटी से पहले कई उत्पादों में टैक्स का स्टैण्डर्ड रेट 31 फीसदी था. देश भर में अलग-अलग टैक्स दरें थी. टैक्स अनुपालन की लागत भी ज्यादा होती थी. जीएसटी के बाद अनुपालन में धीरे-धीरे सुधार हुआ. करदाताओं का बेस भी 65 लाख से बढ़कर दोगुना 1.24 करोड़ हुआ. जीएसटी के आने से टैक्स कम्लायंस में बढ़ोत्तरी करने में भी मदद मिली.

जीएसटी आने से महंगाई काबू करने में मिली मदद, गृहणियों को मिला लाभ
जीएसटी के आने से लोगों को महंगाई से काफी राहत मिली. रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाले घरेलू सामानों और सेवाओं पर अप्रत्यक्ष कर कम हुआ. हेयर ऑयल, टूथपेस्ट और साबुन पर टैक्स रेट 29.3 फीसदी से घटकर 18 फीसदी पर आ गया. जीएसटी से पहले गेहूं पर 2.5 फीसदी, चावल पर 2.75 फीसदी, आटे पर 3.5 फीसदी टैक्स लगता था लेकिन जीएसटी आने पर इन पर शून्य टैक्स लगता है. इसी तरह किशमिश, मसाले, चीनी, मिल्क पाउडर, सोयाबीन तेल, मूंगफली तेल, पाम तेल, सनफ्लावर तेल, नारियल तेल, सरसों तेल और दूसरे अन्य वेजिटेबल ऑयल पर जीएसटी से पहले 6 फीसदी टैक्स लगता था जो जीएसटी के बाद 5 फीसदी हो गया.



जीएसटी से पहले दही, लस्सी, बटर मिल्क पर 4 फीसदी, बिना ब्रांड के प्राकृतिक हनी पर 6 फीसदी टैक्स वसूला जाता था जो जीएसटी के बाद शून्य हो गया. वहीं जीएसटी आने पर काजू पर 2 फीसदी, मिनरल वॉटर, हेयर ऑयल, टूथपेस्ट और साबुन पर 11.3 फीसदी, अगरबत्ती पर 5 फीसदी, टूथ पाउडर पर 5 फीसदी, 1000 रुपये तक के फुटवियर पर 5 फीसदी और दूसरे फुटवियर पर 13.3 फीसदी कम टैक्स वसूला जा रहा है.

रेफ्रिजरेटर, फ्रिजिंग उपकरणों, वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, फूड ग्राइंडर व मिक्सर, शेवर, हेयर क्लीपर, स्टोरेज वॉटर हीटर, इमर्सन हीटर, हेयर ड्रायर, हैंड ड्रायर, इलेक्ट्रिक ऑयरन, 32 इंच तक की टीवी पर 13.3 फीसदी टैक्स कम हुआ. एलपीजी स्टोव पर 3 फीसदी, एल्यूमिनियम फॉयल पेपर 1 फीसदी, एलईडी पर 3 फीसदी और केरोसिन प्रेशर लालटेन पर 3 फीसदी कम टैक्स हुआ.

इसी तरह जीएसटी आने पर बच्चों के ड्राइंग या कलरिंग बुक पर 7 फीसदी, स्कूल बैग पर 4 फीसदी, प्रिंटर पर 1 फीसदी, स्टैपलर पर 11.3 फीसदी, मेडिकल इस्तेमाल के लिए एक्सरे फिल्म पर 11 फीसदी, ट्रैक्टर पार्ट्स पर दो फीसदी, तौलने वाली मशीनों पर 7 फीसदी, सीमेंट पर 7 फीसदी, फ्लाई एश ईंट या ब्लॉक पर 11 फीसदी, हेलमेट पर 2 फीसदी, सीसीटीवी पर 1 फीसदी, सिलाई मशीन पर 4 फीसदी, दिव्यांगों के लिए कार पर 3 फीसदी, बेबी कैरिज पर 11.3 फीसदी, प्लास्टिक सामानों पर 1 फीसदी और बांस के फर्नीचर पर 11 फीसदी कम टैक्स लिया जाता है. सिनेमा टिकट पर जीएसटी से पहले 35 से 110 फीसदी टैक्स लिया जाता था जो घटकर 12 और 18 फीसदी टैक्स हो गया.

जीएसटी को लेकर आगे ये है चुनौतियां
जीएसटी को लेकर अभी भी कई चुनौतियां सामने खड़ी हैं. पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने को लेकर लंबे समय से मांग चल रही है, ताकि इन पर लगने वाले व्यापक टैक्स मसलन एक्साइज ड्यूटी, वैट सहित सेंट्रल सेल टैक्स को कम किया जा सके. विशेषज्ञों द्वारा सुझाव दिया गया है कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ और पाइप्ड नैचुरल गैस पीएनजी को जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए. इससे जुडे़ कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा मिलनी चाहिए. वहीं उद्योग समूह पीएचडी चैम्बर ने सुझाव दिया है कि कोविड 19 संकट से उबरने के लिए और मांग में तेजी लाने के लिए अगले 6 माह तक सभी टैक्स स्लैब में कम से कम 20 फीसदी कम जीएसटी कर देना चाहिए. इस संकट से उबरने के लिए 12 और 18 फीसदी जीएसटी को एक जीएसटी दर 12 फीसदी कर देना चाहिए. खपत बढ़ाने के लिए जीएसटी दरों को और अधिक तार्किक बनाने की जरूरत है.
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