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    अरुण जेटली के परिवार को नहीं चाहिए पेंशन, पत्नी ने जरूरतमंद कर्मचारियों के लिए की दान

    अरुण जेटली का 24 अगस्त को निधन हो गया था.
    अरुण जेटली का 24 अगस्त को निधन हो गया था.

    पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) का 24 अगस्त को दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था. जेटली काफी समय से एक के बाद एक बीमारी से लड़ रहे थे.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 1, 2019, 10:17 AM IST
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    नई दिल्ली. पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) के परिवार ने मौत के बाद मिलने वाली उनकी पेंशन दान कर दी है. दिवंगत नेता की पत्नी संगीता जेटली ने इस बारे में राज्यसभा सभापति और उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू (Venkaiah Naidu) को चिट्ठी लिखी है. संगीता जेटली ने अपने पति की पेंशन उन कर्मचारियों को दान करने को कहा है जिनकी सैलरी कम है. जेटली परिवार के फैसले के बाद अब उनकी पेंशन राज्यसभा के कम सैलरी वाले कर्मचारियों को दी जा सकती है. बता दें कि पेंशन के रूप में परिवार को सालाना करीब 3 लाख रुपये मिलते.

    अरुण जेटली के परिवार में पत्नी संगीता जेटली के अलावा बेटी सोनाली और बेटा रोहन हैं. ये दोनों ही अपने पिता की तरह वकील हैं. वकालत में ये जेटली परिवार की तीसरी पीढ़ी है. अरुण जेटली वकालत और राजनेता के साथ-साथ दिल्ली व जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष भी रहे.

    कब हुआ था अरुण जेटली का निधन?
    बता दें पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) का 24 अगस्त को दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था. जेटली काफी समय से एक के बाद एक बीमारी से लड़ रहे थे. इसी के चलते उन्‍होंने लोकसभा चुनाव, 2019 में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर कैबिनेट में शामिल नहीं करने की गुजारिश की थी.
    arun jaitley
    जेटली काफी समय से एक के बाद एक बीमारी से लड़ रहे थे.




    जेटली के निधन के वक्त विदेश में थे पीएम मोदी
    अरुण जेटली के निधन के समय पीएम मोदी विदेश दौरे पर थे. पीएम मोदी ने अरुण जेटली को श्रद्धांजलि देते हुए लगातार चार ट्वीट किए थे. उन्होंने लिखा था, 'मैंने एक अहम दोस्त खो दिया है, जिन्हें दशकों से जानने का सम्मान मुझे प्राप्त था. मुद्दों पर उनकी समझ बहुत अच्छी थी. वो हमें अनेक सुखद स्मृतियों के साथ छोड़ गए. हम उन्हें याद करेंगे.'

    प्रधानमंत्री मोदी ने ये भी लिखा था कि बीजेपी और अरुण जेटली के बीच एक ना टूटने वाला बंधन था. उनके मुताबिक, 'एक तेजस्वी छात्र नेता के तौर पर उन्होंने आपातकाल के समय हमारे लोकतंत्र की सबसे आगे होकर रक्षा की थी. वो हमारी पार्टी का लोकप्रिय चेहरा थे. जिन्होंने समाज के अलग-अलग तबकों तक पार्टी के कार्यक्रमों और विचारों को स्पष्ट रूप से पहुंचाया.'

    सांसदों को कितनी मिलती है पेंशन?
    साल 2010 में हुए संशोधन के अनुसार संसद से रिटायर होने के बाद सदस्यों को 20 हजार रुपये प्रति माह पेंशन मिलती है. साथ ही उनके कार्यकाल के एक साल के आधार पर 1500 रुपये अधिक मिलते हैं. खास बात ये है कि पेंशन हर सदस्य को मिलती है, चाहे उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया हो गया नहीं. इसके अलावा किसी भी पूर्व सांसद के निधन के बाद उनके पति या पत्नी को पेंशन का आधा हिस्सा दिया जाता है.

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