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    अब कर्नाटक के पूर्व कांग्रेसी CM सिद्धारमैया ने उठाए पार्टी शीर्ष नेतृत्व पर सवाल

    सिद्धारमैया ने जेडीएस के साथ गठबंधन पर सवाल खड़े किए हैं. (तस्वीर विकीपीडिया से साभार)
    सिद्धारमैया ने जेडीएस के साथ गठबंधन पर सवाल खड़े किए हैं. (तस्वीर विकीपीडिया से साभार)

    कर्नाटक के पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री (Former Chief Minister) और वर्तमान विधानसभा में नेता विपक्ष (Leader of Opposition) सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने पार्टी हाईकमान के फैसलों पर सवाल खड़े किए हैं. उऩ्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य में हुई कांग्रेस की दुर्दशा के लिए जेडीएस के साथ गठबंधन को जिम्मेदार माना है.

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    बेंगलुरु. कर्नाटक के पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व (Congress Top Leadership) पर सवाल खड़े किए हैं. कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने जनता दल सेकुलर के साथ गठबंधन पर कहा है-'मैं इकलौता था जिसने आवाज उठाई, इसीलिए मेरी बात पार्टी हाईकमान द्वारा नहीं सुनी गई. मुझे सपोर्ट नहीं मिला. अगर हमने अकेले चुनाव लड़ा होता तो संसदीय चुनाव में कर्नाटक में 7 सीटों से ज्यादा पर जीत हासिल कर सकते थे. मैंने सलाह दी थी कि हमें जनता दल सेकुलर के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ना चाहिए.'

    सिद्धारमैया ने कहा है-मेरी सलाह थी कि लोकसभा का चुनाव हमें कर्नाटक में अकेले लड़ना चाहिए. अगर हम साथ मिलकर लड़े तो भी जेडीएस के वोट हमें ट्रांसफर नहीं होंगे. ठीक इसी तरह हमारे वोट जेडीएस के पाले में नहीं जा पाएंगे. लेकिन मेरी सुनी नहीं गई.

    गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले तक सिद्धारमैया ही राज्य के मुख्यमंत्री थे. चुनाव बाद जब कांग्रेस ने जेडीएस को बिना शर्त समर्थन दिया तब भी सिद्धारमैया इसके खिलाफ थे. बाद में शीर्ष नेतृत्व के रुख को देखते हुए सिद्धारमैया शांत रह गए. लेकिन अब एक बार फिर उन्होंने तीखा बयान दिया है.



    कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन की नींव साल 2018 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान पड़ी थी. सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस ने तीसरे नंबर की पार्टी जेडीएस को बिना शर्त समर्थन दे दिया था. राज्य में कुमास्वामी के नेतृत्व में जेडीएस कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनी थी. कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह में कई विपक्षी दलों के नेता पहुंचे थे और इस कार्यक्रम को एक तरीके से विपक्षी एकता के मंच के तौर पर प्रदर्शित किया गया था.



    लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारा था यूपीए गठबंधन
    जब लोकसभा चुनाव का समय आया तब भी दोनों ही पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन इस बार नतीजे भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में आए. बीजेपी ने राज्य की कुल 28 सीटों में से 25 सीटों पर जीत हासिल की थी. जबकि बीजेपी के सहयोग से खड़ी हुई इंडिपेंडेंट कैंडिडेट सुमलता ने भी जीत हासिल की थी. कांग्रेस और जेडीएस के हाथों में सिर्फ एक-एक सीट हासिल हुई थीं.
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