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'IAS का व्यवहार अशोभनीय लेकिन निलंबन रास्ता नहीं', आयुष सिन्हा को सस्पेंड करने की मांग पर क्या बोले अधिकारी

'IAS का व्यवहार अशोभनीय लेकिन निलंबन रास्ता नहीं', आयुष सिन्हा को सस्पेंड करने की मांग पर क्या बोले अधिकारी

किसान, IAS आयुष सिन्हा के निलंबन की मांग कर रहे हैं (फाइल फोटो)

किसान, IAS आयुष सिन्हा के निलंबन की मांग कर रहे हैं (फाइल फोटो)

साल 2018 बैच के आईएएस अधिकारी और करनाल के पूर्व एसडीएम आयुष सिन्हा के एक वायरल वीडियो क्लिप के बाद विवाद खड़ा हो गया जिसमें उन्होंने पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारी किसानों को घेरा तोड़ने पर मारने और उनका सिर फोड़ने का 'निर्देश' दिया था

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  • News18Hindi
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    अमृता नायक दत्ता

    चंडीगढ़/ नई दिल्ली. हरियाणा (Haryana) सरकार द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी आयुष सिन्हा (Ayush Sinha) का तबादला करने के के फैसले के बावजूद प्रदर्शनकारी किसानों ने गुरुवार को उनके निलंबन की मांग को लेकर करनाल में मिनी सचिवालय के बाहर धरना जारी रखा. साल 2018 बैच के आईएएस अधिकारी और करनाल के पूर्व एसडीएम सिन्हा के एक वायरल वीडियो क्लिप के बाद विवाद खड़ा हो गया जिसमें उन्होंने पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारी किसानों को घेरा तोड़ने पर मारने और उनका सिर फोड़ने का ‘निर्देश’ दिया था. उनके निलंबन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों का आंदोलन तेज होने पर हरियाणा सरकार ने बुधवार को 19 अन्य अधिकारियों के साथ उनका तबादला कर दिया. हालांकि राज्य सरकार ने उनके तबादले का कोई कारण नहीं बताया.

    उधर तबादले से एक दिन पहले हरियाणा के मुख्य सचिव विजय वर्धन ने घटना पर विस्तृत रिपोर्ट और सिन्हा से उनकी टिप्पणी के लिए स्पष्टीकरण मांगा था. News18.com से बात करते हुए वरिष्ठ किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि प्रदर्शनकारी सिन्हा के निलंबन पर अपनी मांग पर कायम रहेंगे. उन्होंने कहा, ‘ट्रांसफर कोई सजा नहीं है. हम उनके निलंबन की मांग जारी रखेंगे.’ ऐसे में सवाल यह उठता है कि सिविल सेवकों से जुड़े मौजूदा नियम किसी अधिकारी को निलंबित करने के बारे में क्या कहते हैं? News18.com ने सिविल सेवकों के लिए लागू नियमों को समझने के लिए कई वर्किंग और रिटायर्ड नौकरशाहों से बात की.

    ‘उनके शब्दों का चयन गलत था’
    News18.com से बात करने वाले कई रिटायर्ड और वर्किंग ऑफिसर्स ने नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि सिन्हा द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों का चयन गलत था. शायद एक सिविल सेवक के लिए ‘अशोभनीय’ भी था.

    अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के अनुसार, राज्य या केंद्र सरकार उस सिविल सेवक के निलंबन का आदेश दे सकती है, जिसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है या लंबित है. सिन्हा के मामले में, हरियाणा सरकार ने अब तक यह नहीं बताया है कि क्या वह करनाल के पूर्व एसडीएम के खिलाफ किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं या नहीं.

    पंजाब के एक आईएएस अधिकारी ने दोहराया कि अखिल भारतीय सेवा के नियमों के तहत कोई अधिकारी तभी निलंबित किया जा सकता है जब उसके खिलाफ आरोप तय हो गए हों और अनुशासनात्मक कार्रवाई या तो विचाराधीन है या फिर लंबित है.

    ‘एसडीएम का आचरण वास्तव में अशोभनीय’
    एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर News18.com को बताया, ‘इस शक्ति का प्रयोग करने से पहले मामले की परिस्थितियों के साथ-साथ आरोपों की प्रकृति पर भी विचार करना सरकार की जिम्मेदारी है.’ यूपी कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी और भारत सरकार के एक अन्य पूर्व सचिव ने कहा कि निलंबन भी कोई सजा नहीं है. उन्होंने कहा- ‘अगर राज्य सरकार चाहती है, तो  निलंबित किया जा सकता है. मैंने अपने करियर में कई अधिकारियों को पहले सस्पेंड होते देखा है और बाद में जांच के आदेश दिए गए हैं. यह राजनीतिक फैसला है.’ अधिकारी ने कहा कि एसडीएम  (पूर्व) का आचरण वास्तव में अशोभनीय था.

    अधिकारी ने कहा ‘यह व्यवहार सिविल सेवकों को शर्मिंदा करने वाला है. महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस कई बार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग करती है, लेकिन एक मजिस्ट्रेट का काम संतुलन बनाना होता है. उन्होंने (करनाल के पूर्व एसडीएम आयुष सिन्हा) जो कहा वह अनावश्यक था लेकिन उनका तबादला कर दिया गया है. यह अन्य सिविल सेवकों के लिए संदेश है.’

    इससे पहले यूपी में उन्नाव के सीडीओ दिव्यांशु पटेल ने एक पत्रकार के साथ मारपीट की और मोबाइल फोन तोड़. इसका एक वीडियो सामने आया था. राज्य सरकार ने एक घटना पर रिपोर्ट मांगी थी और बाद में दोनों के बीच सुलह हो गई

    ‘निलंबन आगे का रास्ता नहीं’
    कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DOPT) के एक पूर्व सचिव ने नाम न छापने की शर्त पर News18.com को बताया कि आमतौर पर सिविल सेवक की ओर से ‘बड़ी गलती’ के बाद निलंबन का आदेश दिया जाता है. पूर्व IAS अधिकारी ने कहा, ‘तब तक निलंबन का फैसला नहीं लेना चाहिए जब तक कि यह महसूस ना होने लगे कि अधिकारी का उसके पद पर बने रहना जनहित के लिए हानिकारक हो चुका है.’ अधिकारी ने कहा कि निलंबन के सभी मामलों में चार्जशीट का पालन करना होगा. उन्होंने कहा कि निलंबन की समीक्षा 60 दिनों के भीतर होनी है और निलंबन अनिश्चित काल तक जारी नहीं रखा जा सकता है. इस मामले में, अधिकारी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों का चयन अनुचित था, लेकिन वह जनता को संबोधित नहीं कर रहे थे. अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियमों के तहत यह मामला कार्रवाई के योग्य नहीं होगा.’

    अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 का एक प्रावधान IAS, IPS और IFoS (वन) अधिकारियों के लिए लागू है. उसके अनुसार सेवा के सदस्य (अधिकारी) ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जो सदस्यों (अधिकारियों) के लिए ‘अशोभनीय’ हो. अधिकांश अन्य सेवाओं में केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 का पालन होता है.

    केंद्र और राज्यों ने इससे पहले आचरण नियमों का हवाला देते हुए सिविल सेवकों के खिलाफ कार्रवाई की है. इस प्रावधान की अस्पष्टता के चलते कई बार फैसले राजनीतिक या उच्च अधिकारियों पर निर्भर हो जाते हैं.

    DOPT के पूर्व सचिव ने कहा ‘अगर अधिकारी अदालत में जाता है, तो सरकार को अपनी कार्रवाई का बचाव करना होगा. सरकार को अपने अधिकारियों को यह संदेश नहीं भेजना चाहिए कि उसने दबाव में काम किया है.’ News18.com से बात करते हुए एक वरिष्ठ नौकरशाह ने कहा, ‘सिविल सेवक को निलंबित करने का निर्णय राजनीतिक पाले में है. उदाहरण के लिए यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को कई वरिष्ठ नौकरशाहों को अम्बेडकर पार्क के खराब रखरखाव के कारण निलंबित करने के लिए जाना जाता था. अन्य राज्यों ने भी ऐसा किया है.’

    Tags: Chandigarh, Haryana news, IAS, IPS, Karnal, Karnal lathicharge, Karnal news, Kisan Andolan

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