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सख्‍ती के बाद भी खाली नहीं हुए पूर्व सांसदों के आवास, कहीं नौकर तो कहीं नौकरशाहों ने डाला है डेरा

News18Hindi
Updated: October 4, 2019, 6:50 PM IST
सख्‍ती के बाद भी खाली नहीं हुए पूर्व सांसदों के आवास, कहीं नौकर तो कहीं नौकरशाहों ने डाला है डेरा
आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय को कई पूर्व सांसदों से सरकारी आवास खाली कराने में काफी मशक्‍कत करनी पड़ रही है.

आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs) ने सख्त प्रावधानों वाले सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम (Public Premises Eviction of Unauthorized Occupants Act) के तहत 230 पूर्व सांसदों के सरकारी बंगले खाली कराने की कार्रवाई शुरू की थी. इस दौरान अजीब-अजीब मामले सामने आ रहे हैं.

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  • Last Updated: October 4, 2019, 6:50 PM IST
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नई दिल्‍ली. सख्त कानून लागू होने के बावजूद लगभग 50 पूर्व सांसदों ने अभी भी लुटियन दिल्ली के सरकारी आवास खाली नहीं किए हैं. पूर्व सांसदों से सरकारी बंगले खाली कराने के लिए आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs) की ओर से शुरू की गई कार्रवाई के दौरान पता चला कि इन बंगलों में कहीं नौकर (Servants) तो कहीं नौकरशाह (Bureaucrats) जमे हुए हैं. सूत्रों के अनुसार पिछले सप्ताह तक सरकारी बंगला (Allotted Houses) खाली नहीं करने वाले 50 पूर्व सांसदों को मंत्रालय के संपदा विभाग (Estate Department) ने कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब तलब किया था. इनमें से सिर्फ चार पूर्व सांसदों ने इस सप्ताह बंगले खाली किए हैं.

नियम के मुताबिक छह महीने में खाली करना था बंगला
मंत्रालय ने सख्त प्रावधानों वाले सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम (Public Premises Eviction of Unauthorized Occupants Act) के तहत 230 पूर्व सांसदों के सरकारी बंगले खाली कराने की कार्रवाई शुरू की थी. बंगले खाली कराने के दौरान कई मामले सामने आए हैं. इनमें पूर्व सांसद मोहम्मद असरारुल हक को आवंटित साउथ एवेन्यू के 16 और 18 नंबर बंगले को खाली कराने में विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ी. हक का पिछले साल निधन हो गया था. उनके परिजनों को नियमानुसार छह महीने के भीतर यानी 6 जून से पहले आवास खाली करना था.

विभाग को बंगलों के दरवाजे पर चस्‍पा करना पड़ रहा है नोटिस

17वीं लोकसभा (Lok Sabha) के गठन के बाद हक का बंगला जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) से अनुच्छेद-370 (Article-370) हटाने के मुद्दे पर संसद में जोरदार भाषण देकर चर्चा में आए लद्दाख (Ladakh) के सांसद जामयांग टी. नामग्याल को आवंटित किया गया. नामग्याल जब बंगले में रहने के लिए पहुंचे तो दोनों बंगलों और सर्वेंट क्वार्टर में ताला पड़ा मिला. पता चला कि इनमें कांग्रेस के पूर्व सांसद का नौकर रह रहा है. नौकर ने आवास की चाभी नामग्याल को नहीं दी. शिकायत मिलने पर विभाग को आवास के दरवाजे पर 20 सितंबर को दिवंगत सांसद के परिजनों के नाम नया नोटिस (Notice) चस्पा कर सख्ती बरतनी पड़ी. इसके बाद नौकर ने इस सप्ताह आवास खाली करने की सूचना विभाग को दी है.

कश्‍मीर मुद्दे पर संसद में जोरदार भाषण देकर चर्चा में आए लद्दाख के सांसद जामयांग टी. नामग्याल को कांग्रेस के पूर्व सांसद के नौकर ने बंगले की चाभी देने से ही इनकार कर दिया.


डेरा डाले प्रशासनिक अधिकारी को भेजा कारण बताओ नोटिस
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केरल (Kerala) से कांग्रेस (Congress) के पूर्व राज्यसभा सदस्य दिवंगत एमआई शाहनवाज के साउथ एवेन्यू स्थित बंगले का मामला सामने आया है. इसमें एक नौकरशाह रह रहे हैं. शाहनवाज का पिछले साल नवंबर में निधन हो गया था. बतौर सांसद उन्हें आवंटित 77 नंबर बंगला अब 17वीं लोकसभा के लिए भाजपा के सिलचर से निर्वाचित सदस्य राजदीप रॉय को आवंटित किया गया है. रॉय की ओर से संपदा विभाग को पिछले सप्ताह भेजी शिकायत में बताया गया कि आवास में एक प्रशासनिक अधिकारी रह रहे हैं. विभाग ने इस पर संज्ञान लेते हुए पूर्व सांसद के परिजनों को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है.

बंगला खाली नहीं करने के लिए कोर्ट पहुंच गए एक सांसद
इसी तरह राज्यसभा (Rajya Sabha) के एक सदस्य के अनुरोध पर साउथ एवेन्यू के एक बंगले में बतौर अतिथि रह रहे एक पूर्व सांसद से भी बंगला खाली कराने में संपदा विभाग को मशक्कत करनी पड़ रही है. बतौर अतिथि रह रहे पूर्व सांसद ज्‍यादा उम्र और खराब सेहत का हवाला देकर विभाग से घर खाली नहीं कराने का अनुरोध कर रहे हैं. पिछले महीने उनका अनुरोध नहीं मानने पर पूर्व सांसद अदालत (Court) की शरण में चले गए. सूत्रों के अनुसार अदालत से उन्हें कोई राहत नहीं मिलने के बाद विभाग ने अब बंगला जबरन खाली कराने की तैयारी कर ली है.

230 पूर्व सांसदों को छह महीने में खाली करने थे बंगले
जून में लोकसभा चुनाव के बाद 230 पूर्व सांसदों को छह महीने के भीतर सरकारी आवास खाली करना था. इस बीच, अगस्त में सख्त प्रावधानों वाला संशोधित कानून संसद से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद मंत्रालय ने 12 सितंबर को अधिसूचना जारी कर इसे लागू कर दिया. सरकारी बंगला नहीं छोड़ रहे पूर्व सांसदों को संशोधित कानून के तहत सितंबर के अंतिम सप्ताह में भेजे गए नोटिस में अब तक आवास नहीं छोड़ने का कारण बताने को कहा गया है. विभाग ने निर्धारित समयसीमा में जवाब नहीं देने या संतोषजनक कारण नहीं बता पाने वाले पूर्व सांसदों का आवास कानूनी प्रक्रिया के तहत खाली कराने की तैयारी कर ली है.

बंगला खाली नहीं करने वालों में कई बड़े नाम भी शामिल
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, भाजपा के ओम प्रकाश यादव, कांग्रेस के कमलनाथ, निर्दलीय सांसद रहे पप्पू यादव और कांग्रेस की रंजीता रंजन सहित अन्य दलों के नेताओं को नोटिस भेजा गया है. हुड्डा को पंत मार्ग पर 9 नंबर बंगला, कमलनाथ के नाम तुगलक रोड पर 1 नंबर बंगला और ओम प्रकाश यादव को पंत मार्ग पर 7 नंबर बंगला आवंटित था. जानकारी के मुताबिक, विभाग को कमलनाथ का बंगला ख़ाली किए जाने की सूचना शुक्रवार को दी गई.

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First published: October 4, 2019, 6:50 PM IST
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