पूर्व PDP नेता का आरोप- महबूबा और उमर अब्दुल्ला ने कश्मीर में आतंकवाद को ज़िंदा रखा

उन्होंने महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) और उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) पर राज्य को लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि दोनों नेताओं ने अनुच्छेद 370 (Article 370) को कमजोर करने में मदद की.

भाषा
Updated: August 14, 2019, 8:43 PM IST
पूर्व PDP नेता का आरोप- महबूबा और उमर अब्दुल्ला ने कश्मीर में आतंकवाद को ज़िंदा रखा
डार ने महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला पर राज्य को लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया (फाइल फोटो)
भाषा
Updated: August 14, 2019, 8:43 PM IST
पूर्व पीडीपी (PDP) नेता फारूक अहमद डार (Farooq Ahmed Dar) ने जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने संबंधी चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि यदि लोगों को इससे लाभ होता है तो इसमें कोई नुकसान नहीं है. उन्होंने नई दिल्ली (New Delhi) का उदाहरण देकर कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) का केंद्र सरकार से लगातार टकराव होता रहता है. इसके बावजूद दिल्ली में विकास हो रहा है.

डार ने कहा, ‘‘यदि लोगों को केंद्रशासित प्रदेश (Union Territory) के दर्जे से लाभ हो सकता है, तो इसमें नुकसान क्या है?’’ डार ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, ‘‘हम 1947 में एक उपभोक्ता राज्य थे और हम 2019 में भी एक उपभोक्ता राज्य है. हम बाह्य आपूर्ति पर निर्भर थे और हम अब भी निर्भर ही हैं.’’ उन्होंने कहा कि शेख अब्दुल्ला (Sheikh Abdullah) के परिदृश्य से जाने के बाद, राज्य सरकारों के अयोग्य नेतृत्व के कारण राज्य आत्मनिर्भर नहीं बन पाया.

डार ने की शेख अब्दुल्ला की तारीफ
डार ने 1948 में जम्मू-कश्मीर के ‘प्रधानमंत्री’ बनने वाले शेख अब्दुल्ला की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘‘वह सबसे बड़े नेता थे जिनके नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर ने भारत को स्वीकार किया.’’ उन्होंने कहा, ‘‘सभी ने इसे स्वीकार किया.’’

महबूबा और उमर पर निशाना
डार ने पीडीपी प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) और नेशनल कांफ्रेंस (National Conference) के नेता उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) पर राज्य के लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि इन दोनों नेताओं ने अनुच्छेद 370 (Article 370) को कमजोर करने में मदद की.

उन्होंने कहा कि यदि सभी नेताओं और अलगाववादियों (Separatists) के दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में घर हो सकते हैं, तो शेष देश के लोगों को कश्मीर (Kashmir) में जगह क्यों नहीं मिल सकती? उन्होंने अब्दुल्ला और मुफ्ती पर राज्य में आतंकवाद (Terrorism) को जीवित रखने का आरोप लगाया.
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गौरतलब है कि मोदी सरकार ने पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाने और राज्य को विभाजित करने का फैसला लिया था. इससे जुड़े संकल्प एवं विधेयक को संसद की मंजूरी मिल चुकी है. दोनों केंद्र शासित प्रदेश --जम्मू कश्मीर और लद्दाख-- 31 अक्टूबर से अस्तित्व में आएंगे.

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First published: August 14, 2019, 8:43 PM IST
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