जब अटल ने प्रणब मुखर्जी के समर्थन में कहा था-ये क्यों भागेंगे, ये अपने बाप के बेटे हैं

जब अटल ने प्रणब मुखर्जी के समर्थन में कहा था-ये क्यों भागेंगे, ये अपने बाप के बेटे हैं
प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में अटल बिहारी वाजपेयी को 'समझौता न करने वाला राष्ट्रवादी' बताया था. (फाइल फोटो)

इमरजेंसी में हुई अत्यधिक सख्ती की जांच को लेकर शाह कमीशन का गठन किया गया था. देश के पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब The Coalition Years में शाह कमीशन को लेकर घटना का जिक्र किया था.

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  • Last Updated: August 31, 2020, 8:55 PM IST
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नई दिल्ली. इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) द्वारा 1975 में लगाई गई इमरजेंसी (Emergency) के बाद हुए चुनाव में जनता पार्टी (Janata Party) की सरकार बनी थी. मोरार जी देसाई (Morarji Desai) देश के प्रधानमंत्री बने और उनकी सरकार में अटल बिहार वाजपेयी विदेश मंत्री बनाए गए थे. इमरजेंसी में हुई अत्यधिक सख्ती की जांच को लेकर शाह कमीशन का गठन किया गया था. देश के पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब The Coalition Years में शाह कमीशन को लेकर घटना का जिक्र किया था.

प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में किया जिक्र
प्रणब मुखर्जी ने लिखा था, '14 नवंबर 1977 को मुझे शाह कमीशन के सामने पेश होने का समन जारी किया गया था. हालांकि मैंने पार्टी की सैद्धांतिक पोजीशन ली और शाह कमीशन के सामने सबूत देने से इंकार कर दिया. कमीशन के सामने पेश होने के बाद जब मैं संसद पहुंचा तो वहां राजनारायण और वाजपेयी से मुलाकात हुई. राज नारायण ने मुझ पर तंज करते हुए कहा-डर से भाग गए? इससे पहले कि मैं कुछ कह पाता वाजपेयी खुद ही बोल पड़े-क्यूं डर से भागेंगे? ये अपने बाप के बेटे हैं.'

प्रणब मुखर्जी ने लिखा था- 'मुझे ऐसा लगा कि अटल बिहारी वाजपेयी को व्यक्तिगत तौर पर मेरा स्टैंड पसंद आया था.' प्रणब ने अपनी इस किताब में अटल बिहार वाजपेयी को 'राष्ट्रवाद से समझौता न करने वाला नेता' करार दिया था. उन्होंने लिखा था कि वाजपेयी ऐसे नेता थे जो दूसरों को क्रेडिट देने में पीछे नहीं रहते थे. उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण का भी जिक्र किया है.
दरअसल आर्थिक सुधारों को लेकर अटल ने कहा था-हमने सुधारों की शुरुआत नहीं की है, हम तो बस उस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया था कि हम उन आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रहे हैं जिन्हें नरसिम्हा राव सरकार ने शुरू किया और फिर बाद की यूनाइटेड फ्रंट सरकारों ने भी जारी रखा था.



'बेचारे जॉर्ज को छोड़ दीजिए'
प्रणब ने लिखा है कि अटल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को व्यक्तिगत तौर पर नहीं लेते थे. प्रणब ने इसे लेकर अटल सरकार के दौरान का एक किस्सा भी किताब में लिखा है. उन्होंने लिखा है कि मैंने चीन के बारे में दिए गए एक वक्तव्य को लेकर जॉर्ज फर्नांडिस की तीखी आलोचना की थी.

तब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रणब की सीट के पास जाकर कहा था-बेचारे जॉर्ज को छोड़ दीजिए. प्रणब लिखते हैं- 'तब मैंने अटल जी से कहा कि आप मेरे सीनियर हैं, मेरे पास आने की बजाए आप मुझे अपने पास भी बुला सकते थे. हालांकि इसके बाद भी मैंने जॉर्ज की आलोचना जारी रखी लेकिन अटल जी की रिक्वेस्ट की वजह से लहजा पहले से थोड़ा नरम कर दिया था.'
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