प्रणब मुखर्जी, भूपेन हजारिका और नाना जी देशमुख भारत रत्न से सम्मानित

भारत रत्न (Bharat Ratna) अलंकरण समारोह में उपराष्ट्रपति एम. वैंकया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और अन्य गणमान्य मौजूद रहे.

News18Hindi
Updated: August 8, 2019, 6:33 PM IST
प्रणब मुखर्जी, भूपेन हजारिका और नाना जी देशमुख भारत रत्न से सम्मानित
भारत रत्न (Bharat Ratna) अलंकरण समारोह में उपराष्ट्रपति एम. वैंकया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और अन्य गणमान्य मौजूद रहे.
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Updated: August 8, 2019, 6:33 PM IST
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने गुरुवार को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Former President Pranab Mukherjee), भूपेन हजारिका (Bhupen Hazarika) (मरणोपरांत) और नाना जी देशमुख (Nanaji Deshmukh) (मरणोपरांत) को भारत रत्न (Bharat Ratna) सम्मान दिया गया. भूपेन हजारिका की ओर से उनके बेटे तेज हजारिका ( Tej Hazarika), नाना जी देशमुख की ओर से वीरेंद्र जीत सिंह  (Virendra Jeet Singh)अलंकरण समारोह में मौजूद रहे.

राष्ट्रपति कोविंद ने सबसे पहले नाना जी देशमुख के लिए भारत रत्न लेने आए वीरेंद्र जीत सिंह को अवार्ड दिया. इसके बाद गायक डॉक्टर भूपेन कुमार हजारिका की ओर से आए उनके बेटे तेज हजारिका को यह सम्मान सौंपा. इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति कोविंद ने भारत रत्न से सम्मानित किया.

सम्मान समारोह में उपराष्ट्रपति एम. वैंकया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और अन्य गणमान्य मौजूद थे.

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नानाजी देशमुख

नानाजी देशमुख को मरणोपरांत देश का सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा गया है. नानाजी ताउम्र राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे, लेकिन उन्होंने समाजसेवा का भी काम किया और देश के बड़े विचारकों में भी गिने जाते रहे. लेकिन सबसे बड़ी बात थी उनका उदार सर्वग्राही दृष्टिकोण, जिसके चलते उन्होंने ना केवल महात्मा गांधी, बल्कि जयप्रकाश नारायण को भी मन से स्वीकार किया.

भूपेन हज़ारिका
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सिनेमा, संगीत और कला के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए मशहूर डॉक्टर भूपेन हज़ारिका को भारत रत्‍न दिया जाएगा. वे न केवल हिंदी बल्कि असमिया और बंगाली भाषाओं के कलाजगत के प्रमुख स्तंभ रहे. पद्म और दादा साहेब फालके सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़े गए हज़ारिका ने पहला गीत सिर्फ 10 बरस की उम्र में गाया था.

प्रणब मुखर्जी
प्रणब मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के एक छोटे से गांव मिराटी में एक ब्राह्मण परिवार में 11 दिसंबर 1935 में हुआ था. प्रणब मुखर्जी के पिताजी कामदा किंकर मुखर्जी क्षेत्र के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे. आज़ादी की लड़ाई में वो 10 सालों से ज्यादा समय तक ब्रिटिश जेलों में कैद रहे. उनके पिताजी 1920 से इंडियन नेशनल कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता थे. देश की आजादी के बाद वो 1952 से लेकर 1964 तक पश्चिम बंगाल विधान परिषद के सदस्य रहे. प्रणब ने राजनीति में प्रवेश पिता के हाथ को पकड़ कर ही किया था

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First published: August 8, 2019, 6:32 PM IST
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