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चुनाव से पहले पुडुचेरी में कांग्रेस को झटका, कद्दावर नेता 'नम:शिवायम्' BJP में शामिल

बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ ए. नम:शिवायम् और अन्य पार्टी ज्वाइन करने वाले नेता. (तस्वीर-ANI)
बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ ए. नम:शिवायम् और अन्य पार्टी ज्वाइन करने वाले नेता. (तस्वीर-ANI)

नम:शिवायम् (A Namassivayam) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की. नम:शिवायम् के पार्टी छोड़ने को कांग्रेस के लिए बड़ा धक्का माना जा रहा है क्योंकि वो पहले राज्य के पार्टी अध्यक्ष भी रह चुके हैं और स्थानीय राजनीति में उनका अच्छा-खासा प्रभाव है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 28, 2021, 8:57 PM IST
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नई दिल्ली. पुडुचेरी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ए नम:शिवायम् (A Namassivayam) और पार्टी के एक अन्य नेता ई थिप्पन्थन बृहस्पतिवार को भाजपा में शामिल हो गए. थिप्पन्थन ने हाल ही में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. दोनों नेता भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की उपस्थिति में दिल्ली पार्टी में शामिल हुए. सामाजिक कार्यकर्ता ए जयकुमार भी पार्टी में शामिल हुए. नम:शिवायम् ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की. उल्लेखनीय है कि पुडुचेरी में अप्रैल-मई में तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और असम के साथ ही विधानसभा चुनाव होने हैं.

राज्य के पार्टी अध्यक्ष भी रह चुके हैं नम:शिवायम्
नम:शिवायम् के पार्टी छोड़ने को कांग्रेस के लिए बड़ा धक्का माना जा रहा है क्योंकि वो पहले राज्य के पार्टी अध्यक्ष भी रह चुके हैं और स्थानीय राजनीति में उनका अच्छा-खासा प्रभाव है. दो सदस्यों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस को झटका तो लगा है लेकिन राज्य सरकार नंबर के मामले में अब भी मजबूत है. दरअसल पुडेचेरी की विधानसभा में 29 सदस्यों का चुनाव होता है और तीन सदस्य मनोनीत किए जाते हैं. इस वक्त कांग्रेस के पास अपने 12 विधायकों के अलावा डीएमके के 3 और एक स्वतंत्र विधायक का समर्थन है. वहीं विपक्ष में एनआर कांग्रेस के पास 7, अन्नाद्रमुक के पास 4 और बीजेपी के पास तीन विधायक हैं.


गौरतलब है कि इस्तीफे के पहले नम:शिवायम् मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी और पार्टी नेतृत्व पर उनकी परेशानियों को अनसुना करने का आरोप लगा चुके हैं. उन्होंने कहा है कि पार्टी लीडरशिप की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है और मुख्यमंत्री सिर्फ केंद्र सरकार और लेफ्टिनेंट गवर्नर से टकराव करते रहते हैं. इस कारण घोषणापत्र में किए गए वादों पर कोई काम नहीं हो पा रहा है.
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