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WhatsApp जासूसी मामला : RSS के पूर्व विचारक ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख, NCP ने की SIT के गठन की मांग

News18Hindi
Updated: November 4, 2019, 8:54 PM IST
WhatsApp जासूसी मामला : RSS के पूर्व विचारक ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख, NCP ने की SIT के गठन की मांग
वॉट्सऐप की जासूसी के मामले में गोविंदाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.

इस मामले के सामने आने के बाद वॉट्सऐप (Whatsapp) ने शुक्रवार को कहा था, 'किसी भी यूज़र की गोपनीयता और सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है. हमने इस साल तुरंत ही इस मामले को सुलझा लिया था और भारत व अंतरराष्ट्रीय सरकारों को इस सिलसिले में आगाह भी कर दिया था.'

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  • Last Updated: November 4, 2019, 8:54 PM IST
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नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के पूर्व विचारक और राजनीतिक चिंतक केएन गोविंदाचार्य (KN Govindacharya) ने स्पाइवेयर (Whatsapp Spyware) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख किया है. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई अपनी याचिका में उन्होंने आईटी एक्ट के तहत वॉट्सऐप, फेसबुक और एनएसओ के खिलाफ एनआईए की जांच, एफआईआर करने की मांग की है.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (National Congress Party) ने इजरायली स्पाईवेयर ‘पेगासस’ (Pegasus) का इस्तेमाल करके वॉट्सऐप के जरिये देश में कुछ लोगों की अवैध रूप से जासूसी किये जाने की जांच के लिए एसआईटी का गठन करने की मांग की. इसके साथ ही एनसीपी ने केंद्र सरकार से इस संबंध में एक श्वेत पत्र प्रकाशित करने के लिए भी कहा.

वॉट्सऐप ने दी थी जासूसी की जानकारी
बीते 31 अक्टूबर को फेसबुक के स्वामित्व वाली कंपनी वॉट्सऐप ने कहा था कि इजरायली स्पाईवेयर ‘पेगासस’ के जरिये कुछ अज्ञात इकाइयां वैश्विक स्तर पर जासूसी कर रही हैं. भारतीय पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी इस जासूसी का शिकार बने हैं.

राकांपा की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख जयंत पाटिल (Jayant Patil) ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘इजरायली कंपनी एनएसओ (जिसने पेगासस विकसित किया है) को देश में कुछ लोगों की जासूसी करने के लिए लगाया गया था. यह चिंताजनक बात है. केंद्रीय मंत्री (संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी) रविशंकर प्रसाद (Ravishankar Prasad) को जासूसी के आरोपों पर कुछ और प्रकाश डालना चाहिए.’’

एनसीपी ने किया ये दावा
पाटिल ने दावा किया कि फेसबुक (Facebook) ने स्वीकार किया है कि करीब 40 लोग जासूसी के शिकार हुए हैं जिनमें से 14 महाराष्ट्र (Maharashtra) के हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र को आगे आना चाहिए और इस तरह से निशाना बनाए गए लोगों के नाम जारी करने चाहिए. उन्होंने कहा कि मौजूदा सूची सीमित है और लोगों की जासूसी की गई हो सकती है.
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उन्होंने पूछा, ‘‘सूची पहले ही केंद्र को भेज दी गई थी और अब इसकी घोषणा की जानी चाहिए. यह निजता के लिए खतरा है.’’

(भाषा के इनपुट के साथ)

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First published: November 4, 2019, 8:30 PM IST
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