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अफगानिस्‍तान के पूर्व उप राष्‍ट्रपति अमरूल्‍ला सालेह ताजिकिस्‍तान में, तुर्की बना मध्‍यस्‍थ: सूत्र

अफगानिस्‍तान के पूर्व उप राष्‍ट्रपति अमरूल्‍ला सालेह ताजिकिस्‍तान में, तुर्की बना मध्‍यस्‍थ: सूत्र

अफगानिस्‍तान के पूर्व उप राष्‍ट्रपति अमरूल्‍ला सालेह (टोपी पकड़े हुए) . (फाइल फोटो)

अफगानिस्‍तान के पूर्व उप राष्‍ट्रपति अमरूल्‍ला सालेह (टोपी पकड़े हुए) . (फाइल फोटो)

अफगानिस्‍तान (Afghanistan) के पूर्व उप राष्‍ट्रपति अमरूल्‍ला सालेह (Amrullah Saleh) और तालिबान (taliban) के प्रबल विरोधी नेता के बेटे अहमद मसूह को ताजिकिस्‍तान (Tajikistan) सरकार ने 'लो प्रोफाइल' में रहने को कहा है. सूत्रों का कहना है कि तालिबान के कारण अफगानिस्‍तान को गहरे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, ऐसा दावा किया गया है कि मसूद, दुशांबे और पेरिस की यात्राएं करता रहता है.

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नई दिल्‍ली. अफगानिस्‍तान (Afghanistan) के पूर्व उप राष्‍ट्रपति अमरूल्‍ला सालेह (Amrullah Saleh) और तालिबान (taliban) के प्रबल विरोधी नेता के बेटे अहमद मसूह को ताजिकिस्‍तान (Tajikistan) सरकार ने ‘लो प्रोफाइल’ में रहने को कहा है. सूत्रों ने यह जानकारी दी है. दोनों को लेकर पहले भी दावा किया गया था कि वे ताजिकिस्‍तान में हो सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि तालिबान के कारण अफगानिस्‍तान को गहरे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, ऐसा दावा किया गया है कि मसूद, दुशांबे और पेरिस की यात्राएं करता रहता है.

वहीं सूत्रों का कहना है कि तालिबान नेताओं और अफगानिस्‍तान में बची हुई राजनीतिक संस्‍थाओं के बीच मध्‍यस्‍थता के लिए तुर्की महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. सूत्रों ने कहा कि तुर्की का मानना ​​है कि ‘अफगानिस्तान एक प्रभावी क्षेत्र है, और तुर्की ने अपना दूतावास वहां बनाए रखा है. सूत्रों ने बताया कि मध्‍यस्‍थता करते हुए तुर्की का लक्ष्‍य है वह मुस्लिम वर्ल्‍ड का नेतृत्‍व करे, तुर्की यह बताने की कोशिश कर रहा है कि समावेशी सरकार होनी चाहिए.

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इस बीच, यह माना जा रहा है कि तालिबान, कट्टरपंथी नेतृत्‍व को यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि कट्टरपंथ को लेकर आम राय नहीं बन पा रही है.  यदि सहमति नहीं बनी तो वहां और अधिक समूह बन सकते हैं. सूत्रों ने यह आशंका जताई है कि तालिबान यदि सहमति से अलग रहता है तो यहां कई छोटे समूह बन सकते हैं और इससे स्थितियां बेकाबू हो जाएंगी.

दरअसल, कट्टरपंथियों के सत्‍ता में आने के बाद दुनिया की बड़ी ताकतें अफगानिस्तान पर प्रभाव डालने के लिए कोशिश कर रही हैं. ऐसे समय तुर्की सुर्खियों में आ रहा है. काबुल से पश्चिम देशों के चले जाने के बाद केवल तुर्की ही है जो अभी भी वहां बना हुआ है. तुर्की, अफगानिस्‍तान के साथ अपने मजबूत ऐतिहासिक और सांस्‍कृतिक संबंधों के लिए जाना जाता है. उसे उम्‍मीद है कि वह अपनी भूमिका ढंग से निभाएगा.

Tags: Afghanistan, Amrullah Saleh, Tajikistan, Taliban

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