सिर्फ 2.14 करोड़ प्रवासी मजदूरों को मिला मुफ्त अनाज, गोवा-तेलंगाना में एक भी लाभार्थी नहीं

गोवा और तेलंगाना में फ्री अनाज योजना का एक भी लाभार्थी नहीं (सांकेतिक फोटो, PTI)
गोवा और तेलंगाना में फ्री अनाज योजना का एक भी लाभार्थी नहीं (सांकेतिक फोटो, PTI)

नरेन्द्र मोदी सरकार (Narendra Modi Governemnt) ने अनुमानत: 8 करोड़ मजदूरों के लिए 3,500 करोड़ रुपये की कीमत से दो महीने के लिए मुफ्त अनाज (Free Grains) की घोषणा की थी. ये ऐसे मजदूरों के लिए थी, जिनके पास केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारों की ओर से जारी किए गए राशन कार्ड (Ration Card) नहीं थे.

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नई दिल्ली. सरकार (Government) ने मई और जून के महीने में बिना राशन कार्ड (Without Ration Card) वाले 2.14 करोड़ प्रवासी मजदूरों (Migrant Labourers) को मुफ्त अनाज वितरित (Food Grain Distribution) किया, लेकिन इस योजना के लाभार्थियों मे गोवा और तेलंगाना (Goa and Telangana) से कोई भी नहीं है. इस बात की जानकारी बुधवार को केंद्रीय खाद्य मंत्रालय (Union Food Ministry) ने दी.

जबकि दो राज्य गोवा और तेलंगाना (Goa and Telangana) ने दोनों ही महीनों में मुफ्त अनाज (Free Food Grains) का वितरण नहीं किया, छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों (Union Territory), जिनके नाम बिहार (Bihar), गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, सिक्किम और लद्दाख हैं, उन्होंने जून के महीने में अनाज का वितरण नहीं किया. मंत्रालय के आंकड़ों से यह बात सामने आती है.

अब तक 2.14 करोड़ प्रवासी मजदूरों को बांटा गया मुफ्त अनाज
नरेन्द्र मोदी सरकार ने अनुमानत: 8 करोड़ मजदूरों के लिए 3,500 करोड़ रुपये की कीमत से दो महीने के लिए मुफ्त अनाज की घोषणा की थी. ये ऐसे मजदूरों के लिए थी, जिनके पास केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारों की ओर से जारी किए गए राशन कार्ड नहीं थे. जिसके तहत मजदूरों के परिवारों को दो महीने के लिए प्रतिव्यक्ति 5 किलो अनाज और प्रति परिवार 1 किलो चना दाल दी जानी थी.
खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने एक डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया, "अब तक देश भर में 2.14 करोड़ प्रवासी मजदूरों को मुफ्त अनाज बांटा गया है. यह संख्या स्थिर नहीं है (बढ़ रही है)."



कई राज्यों ने प्रवासी मजदूरों के चले जाने से नहीं लागू की योजना
उन्होंने कहा, "कुछ राज्यों ने जारी किया गया पूरा अनाज उठाया तो कुछ ने ऐसा नहीं किया क्योंकि उनके यहां से प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों में चले गये थे. जबकि कुछ ने उनके लिए जारी किए गये अनाज से ज्यादा लिया क्योंकि उन्हीं राज्यों में प्रवासी मजदूर गये थे."

उन्होंने यह भी बताया कि वास्तव में, छह से सात राज्यों में जिनमें गोवा और तेलंगाना भी शामिल हैं, केंद्र सरकार को यह जानकारी देते हुए पत्र लिखा था कि वे इस योजना को लागू करने में असमर्थ होंगे क्योंकि प्रवासी मजदूर उनके राज्यों से जा चुके हैं.

सचिव ने खराब वितरण की वजह नहीं बताई
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक कुल आवंटित अनाज 8 लाख टन में से 80% को 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने उठा लिया था. अन्य 8 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने थोड़ा अनाज उठाया.

हालांकि, ये राज्य अब तक इन दो महीनों के अंदर 1,07,031 टन अनाज का वितरण कर चुके हैं. सचिव ने यह भी बताया कि 12 राज्यों में कुल आवंटित अनाज का 1% से भी कम वितरण किया गया. वहीं सिक्किम, उत्तराखंड, ओडिशा, पुदुचेरी, केरल उन राज्यों में रहे जो वितरण में पिछड़ रहे हैं.

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हालांकि, उन्होंने योजना के तहत खराब वितरण की कोई वजह नहीं बताई. राज्यों से इस योजना के सभी लाभार्थियों की लिस्ट 15 जुलाई तक देने को कहा गया है.
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