LAC पर तनाव के बीच 'दोस्त' रूस की कोशिशों से 10 दिन में दूसरी बार आमने-सामने होंगे पीएम मोदी और जिनपिंग

पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो.)
पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो.)

चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC Rift) पर जारी गतिरोध के बावजूद पीएम मोदी (PM Modi) और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) रूस की अगुवाई में 10 दिनों से भी कम समय में दूसरी बार आमने-सामने होंगे. इससे पहले दोनों नेता 10 नवंबर को शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) में एक मंच पर आए थे.

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  • Last Updated: November 17, 2020, 6:23 PM IST
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महा सिद्दकी
नई दिल्ली.
भारत और चीन (India China) के बीच पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी गतिरोध के बीच दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष फिर से मंगलवार को आमने-सामने होंगे. बता दें 12वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए ब्रिक्स देशों-ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नेता मंगलवार को बैठक करेंगे. यह बैठक इस साल जुलाई में होने वाली थी, जिसे कोरोना के चलते स्थगित कर दिया गया था. विदेश मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, 'राष्ट्रपति पुतिन के निमंत्रण पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस द्वारा आयोजित 12वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे.'

चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी गतिरोध के बावजूद पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग रूस की अगुवाई में 10 दिनों से भी कम समय में दूसरी बार आमने-सामने होंगे. इससे पहले दोनों नेता 10 नवंबर को शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) में एक मंच पर आए थे.

क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना महत्वपूर्ण- PM
प्रधानमंत्री ने SCO के मंच से चीन और पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया था. चीन और उसकी विस्तारवादी नीति के संबंध में, उन्होंने कहा था, 'भारत का मानना है कि कनेक्टिविटी में सुधार करने के लिए दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना महत्वपूर्ण है.'



भारत और चीन के मौजूदा संकट में चीन एक शांत मध्यस्थ की भूमिका लगातार निभा रहा है. यह बात अलग है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी भी सितंबर में शंघाई सहयोग संगठन की मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान मास्को में व्यक्तिगत रूप से मिले थे, जिसके बाद दोनों LAC पर गतिरोध कम करने के लिए वह पांच सूत्रीय प्रस्ताव के सामने आए थे.

संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था कि मौजूदा स्थिति किसी भी पक्ष के हित में नहीं है, और सीमा पर को बातचीत जारी रखना चाहिए. जल्द से जल्द डिएस्केलेशन हो और  उचित दूरी बनाए रखी जाए साथ ही तनाव कम हो.

रूस ने मई में स्थिति पर चिंता व्यक्त की थी लेकिन हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था. हालांकि, उन्होंने कहा कि साझेदार देशों के बीच विश्वास बनाने के लिए एससीओ और ब्रिक्स जैसे प्लेटफार्म महत्वपूर्ण हैं. सीएनएन-न्यूज 18 से बात करते हुए, मिशन के प्रमुख रोमन बाबूसकिन ने कहा था, 'रूस दोनों के लिए एक विश्वसनीय साझेदार है, और उनके साथ हमारे बहुपक्षीय और द्विपक्षीय संबंध यूरेशिया में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण हैं. इस संबंध में  RIC एक यूनीक प्लेटफॉर्म है जो  संवाद को मजबूत करने और व्यावहारिक सहयोग की ओर आगे बढ़ने के साथ-साथ क्षेत्र में विश्वास बनाने में मदद करता है.'
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