रोजाना 10,000 से बढ़कर 3.25 लाख वायल उत्‍पादन, ऐसे भारत ने दूर किया रेमडेसिविर संकट

रेमडेसिविर का उत्‍पादन बढ़कर अब अधिक हो गया है. (File pic)

रेमडेसिविर का उत्‍पादन बढ़कर अब अधिक हो गया है. (File pic)

Remdesivir injection: अप्रैल के पहले हफ्ते रेमडेसिविर का उत्‍पादन क्षमता 36 लाख वायल था. लेकिन कंपनियां मांग के मुताबिक 5-6 लाख वायल का उत्‍पादन कर रही हैं.

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नई दिल्‍ली. देश में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इस समय ऑक्‍सीजन (Oxygen) और रेमडेसिविर (Remdesivir) को लेकर किल्‍लत के हालात अस्‍पतालों में देखने को मिल रहे हैं. इस समस्‍या को दूर करने के लिए अप्रैल के पहले दो हफ्तों में केंद्र सरकार की ओर से बंद दरवाजों के पीछे कई दौर की बातचीत हुई. इसके पीछे मकसद था रेमडेसिविर के उत्‍पादन को बढ़ावा देना. इसका नतीजा यह हुआ कि रेमडेसिविर का उत्‍पादन रोजाना 10000 वायल से बढ़कर 3.25 लाख हो गया है.

सरकारी सूत्रों ने जानकारी दी है कि रेमडेसिविर का उत्‍पादन बढ़ने और उसे लोगों के लिए मुहैया कराने के संबंध में क्‍या किया गया. जैसे ही रेमडेसिविर की मांग बढ़ी, वैसे ही सरकार ने 2 अप्रैल को एक अहम बैठक की. बैठक में मौजूद निजी कंपनियों ने कहा कि उत्पादन की पर्याप्त क्षमता है, लेकिन दवा के लिए शायद ही कोई मांग है, जिससे उत्पादन में कमी आई है.

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दवा कंपनियों ने जानकारी दी कि अप्रैल के पहले हफ्ते रेमडेसिविर का उत्‍पादन क्षमता 36 लाख वायल था. लेकिन कंपनियां मांग के मुताबिक 5-6 लाख वायल का उत्‍पादन कर रही हैं. केंद्र सरकार ने उनसे पूरी क्षमता के साथ उत्‍पादन करने को कहा.
दवा कंपनियों ने अपनी पूरी उत्पादन क्षमता का उपयोग करना शुरू कर दिया लेकिन 10 अप्रैल तक रेमडेसिविर की मांग कई गुना बढ़ गई क्योंकि मामलों में तेजी आनी शुरू हो गई. परिणामस्वरूप लोगों ने दवा की जमाखोरी शुरू कर दी और राज्य सरकारों ने अपने राज्य में स्थित उत्पादन इकाइयों से दवा का निर्यात बंद कर दिया.

केंद्र ने फिर से तीन प्राथमिक उद्देश्यों सामर्थ्य, आपूर्ति प्रबंधन और मांग प्रबंधन को लेकर एक बैठक बुलाई. केंद्र ने फिर से कंपनियों से मुलाकात की और उन्हें बताया कि सरकार दवा पर मूल्य सीमा नहीं लगाएगी क्योंकि इसका उत्पादन पर असर पड़ेगा. इसलिए केंद्र ने कंपनियों को खुद से दवा की कीमत कम करने के लिए कहा. निजी क्षेत्र ने वादा किया कि वे कीमतों को 3,500 रुपये प्रति वायल से रखेंगे, दवा की लागत कहीं भी 6,000 रुपये से 7,500 रुपये प्रति वायल के बीच रहेगी.




दवा की मांग 10 अप्रैल के बाद तेजी से बढ़ी थी, इसलिए सरकार के पास उत्पादन बढ़ाने का टास्‍क था. सरकारी सूत्रों ने कहा, 'हमने इस विचार किया कि जिस भी कंपनी के पास आवश्यक कच्चे माल और डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुमोदित दवा उत्पादन करने के लिए फार्मा कंपनियों के साथ गठजोड़ करना चाहिए और तत्काल उत्पादन शुरू करना चाहिए. केंद्र ने 24 घंटे के भीतर उन्हें अनुमति दे दी. 10 अप्रैल को 20 प्‍लांट थे, जबकि 15 अप्रैल को 58 प्‍लांट हो गए थे.'

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