कांग्रेस और गांधी परिवार के हाथ से फिसल रहा वक्त, जल्द बदलाव की जरूरत

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी (pti)

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी (pti)

वक्त आ गया है कि कांग्रेस (Indian National Congress) को अपने भीतर तेज परिवर्तन करने होंगे. कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार (Nehru-Gandhi Family) दोनों के लिए ही समय तेजी के साथ हाथ से निकल रहा है. इस सोच से बाहर आना होगा कि एक दिन जनता मोदी-शाह के शासन से रुष्ट होकर कांग्रेस का रुख करेगी. ऐसा होने नहीं जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 28, 2020, 8:52 PM IST
  • Share this:

नई दिल्ली. आधुनिक काल के इतिहास में 136 वर्षों का सफर लंबा समय है. यूनाइटेड किंगडम की कंजरवेटिव पार्टी (UK's Conservative Party), अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party of the USA) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) दुनिया की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टियों में से हैं. कांग्रेस के इतने लंबे वर्षों तक लगातार अस्तित्व में बने रहने के पीछे एक मूल मंत्र काम करता रहा और वो है लगातार बदलाव का.

कह सकते हैं कि समय के साथ बदलते रहने के कारण ही कांग्रेस चलती रही. लेकिन शायद अब ये बदलाव कांग्रेस में ठहर सा गया है और यही वजह है कि पार्टी ने 2014 और 2019 में लगातार दो लोकसभा चुनावों में हार देखी है. इससे भी ज्यादा भयावह ये है कि ये पुरानी पार्टी अपनी वैचारिकी, नैतिक साहस, को धार नहीं दे पा रही है. साथ ही पार्टी के भीतर के विभेद नहीं सुलझाए जा रहे हैं. एक दिशाहीनता है.

Youtube Video

राहुल गांधी के इस्तीफे से भी नहीं आया बहुत ज्यादा बदलाव
2019 के नतीजों ने कांग्रेस के आत्मविश्वास और वैचारिकी के प्रति आस्था को डिगा कर रख दिया. राहुल गांधी दूसरे नेताओं को प्रेरणा देने और पार्टी को लीड करने में नाकाम साबित हुए हैं. 2019 चुनावों के बाद उनके इस्तीफे ने भी पार्टी की बहुत ज्यादा मदद नहीं की. कांग्रेस इस वक्त पूरी तरीके से नेहरू-गांधी परिवार पर आश्रित है. प्रियंका द्वारा राहुल की जिम्मेदारियां संभालने की उम्मीद है लेकिन मामला ये है कि 'बिल्ली के गले में घंटी बांधे कौन?'

पार्टी के भीतर लोकतंत्र स्थापित करना होगा

पार्टी के भीतर लोकतंत्र को स्थापित करना भी कांग्रेस के सामने बड़ा चैलेंज है. लीडरशिप में सुधार की आवाज उठाने वाले नेताओं से किसी तरह का खौफ खाने की जरूरत नहीं है. एक अन्य बात जिसे राहुल नकारते रहे हैं और वो व्यक्तिगत छवि. अगर भारतीय राजनीति की तरफ से देखें तो जवाहर लाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी और फिर आज के समय में नरेंद्र मोदी, सभी की व्यक्तिगत छवियों ने पार्टी को चुनाव जिताने में बहुत मदद की है. हम इसे अन्य पार्टियों के उदाहरण के तौर पर भी देख सकते हैं. हाल में केरल में हुए निकाय चुनाव में एलडीएफ ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को पोस्टर बॉय की तरह इस्तेमाल किया. गठबंधन की जबरदस्त जीत हुई है.



पार्टी को अपने भीतर करना होगा जल्द बदलाव

वक्त आ गया है कि कांग्रेस को अपने भीतर तेज परिवर्तन करने होंगे. कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार दोनों के लिए ही समय तेजी के साथ हाथ से निकल रहा है. इस सोच से बाहर आना होगा कि एक दिन जनता मोदी-शाह के शासन से रुष्ट होकर कांग्रेस का रुख करेगी. ऐसा होने नहीं जा रहा है.

(ये वरिष्ठ पत्रकार राशिद किदवई  के निजी विचार हैं, पूरी स्टोरी यहां क्लिक कर पढ़ी जा सकती है.)

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज