महंगे स्कूलों से सस्ते स्कूल और फिर सरकारी स्कूल: कोविड के चलते शिक्षा में भी हुआ पलायन

महंगे स्कूलों से सस्ते स्कूल और फिर सरकारी स्कूल: कोविड के चलते शिक्षा में भी हुआ पलायन
लोग अपने बच्चों को कम खर्च वाले और सरकारी स्कूलों में पढ़ाने पर मजबूर हैं (सांकेतिक फोटो)

'फी स्ट्रक्चर' (fee structure) को पूरा करने में असमर्थ, कई माता-पिता (parents) अपने बच्चों को कम खर्चीले या सरकारी स्कूलों (Government Schools) में स्थानांतरित कर रहे हैं.

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(इरम आगा)

नई दिल्ली. कोविड-19 महामारी (Covid-19 Pandemic) ने जो आर्थिक उथल-पुथल (economic upheaval) पैदा की है, उसने कई परिवारों को नौकरियों के लिए दूसरे शहरों में पलायन करने या अपने मूल स्थानों (native places) पर वापस जाने के लिए मजबूर किया है. लेकिन बढ़ती महामारी (pandemic) ने एक अलग प्रकार के पलायन (Migration) को भी जन्म दिया है- बड़े प्राइवेट स्कूलों से कम खर्च वालों में या कुछ मामलों में, सरकारी वित्तपोषित स्कूलों (government-funded schools) में भी.

सभी क्षेत्रों की नौकरियों में छंटनी और सैलरी में कटौती के दौर में अभिभावकों (parents) के लिए ’महंगे स्कूल’ के टैग का खर्च उठा पाना चिंता का प्रमुख विषय बन गया है. 'फी स्ट्रक्चर' (fee structure) को पूरा करने में असमर्थ, कई माता-पिता अपने बच्चों को कम खर्चीले या सरकारी स्कूलों (Government Schools) में स्थानांतरित कर रहे हैं. कुछ स्कूल प्रशासन (school administrations) पर फीस में रियायतें नहीं देने या तिमाही फीस (quarterly fees) की मांग को लेकर नाराज हैं.



एक मुश्किल फैसला
हरियाणा के जय सिंह ने कहा, "ऐसा नहीं है कि मेरे बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिलेगी, अगर मैं उन्हें एक निजी स्कूल में नहीं भेजूंगा," जिस निजी स्कूल में वर्तमान में सिंह के बच्चे पढ़ते हैं, उसे पत्र लिखने से पहले सिंह ने बहुत सोचा था. उन्होंने उन्हें सूचित किया कि वह जल्द ही अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजेंगे. उन्होंने कहा, "इस तरह से तीन बच्चों को एक साथ शिक्षित नहीं किया जा सकता है."

एक दुकान में हेल्पर के रूप में प्रति माह 12,000-15,000 रुपये की कमाई करते हुए, सिंह पहले अपने तीन बच्चों के लिए 6,200 रुपये स्कूल फीस देने में सक्षम थे- अपने दोनों बड़े बच्चों के लिए 2,300 रुपये और सबसे छोटे वाले के लिए 1,600 रुपये. लेकिन इन दिनों पैसा आना मुश्किल है. उन्होंने कहा, "मुझे उन्हें एक सरकारी स्कूल में भेजना होगा और इसके लिए मुझे शर्मिंदा नहीं होना चाहिए."

'ऊंची फीस नहीं दे सकते, बच्चे को दे दें स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र'
सिंह ने कुछ दिन पहले वैश्य मॉडल स्कूल के प्रिंसिपल को लिखा था और उन्हें सूचित किया गया था कि उन्होंने अपनी नौकरी खो दी है और अब अपने बच्चों को एक निजी स्कूल में नहीं भेज सकते. उन्होंने स्कूल के अधिकारियों को अपने बच्चों के स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र देने को कहा था.

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उन्होंने लिखा था, “मैंने महामारी के कारण अपनी नौकरी खो दी है. मैं आपके उन तीन बच्चों की ऊंची फीस का भुगतान करने में सक्षम नहीं हूं, जो आपके स्कूल में पढ़ते हैं. मैं अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजना चाहता हूं. कृपया स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र प्रदान करें ताकि उन्हें एक नए स्कूल में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए.” सिंह की तरह, कई अन्य माता-पिता नई वास्तविकता का सामना करने के लिए मजबूर हैं.
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