Choose Municipal Ward
    CLICK HERE FOR DETAILED RESULTS

    NIA को मिला सबूत- यूरोप फिजी से समाजसेवा के लिए आए चंदे से हो रही टेरर फंडिंग

    राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सबूत मिले हैं कि घाटी में आतंकवादियों का समर्थन करने के लिए अफ्रीकी और यूरोपीय देशों के विदेशी दान का दुरुपयोग किया गया था. (सांकेतिक तस्वीर)
    राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सबूत मिले हैं कि घाटी में आतंकवादियों का समर्थन करने के लिए अफ्रीकी और यूरोपीय देशों के विदेशी दान का दुरुपयोग किया गया था. (सांकेतिक तस्वीर)

    Terror Funding: एनआईए द्वारा बुधवार को ग्यारह जगहों पर छापा मारा गया जिनमें नौ श्रीनगर में, एक बांदीपोरा और बेंगलुरु में हैं. हालांकि पिछले सप्ताह एनआईए द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में केवल विशिष्ट नामों के बजाय "ट्रस्ट और एनजीओ" नाम शामिल हैं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 29, 2020, 12:32 AM IST
    • Share this:
    नई दिल्ली. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) को टेरर फंडिंग (Terror Funding) के लिए यूरोपीय और अफ्रीकी देशों से मिले चंदे की रकम के गलत इस्तेमाल के सबूत मिले हैं. टेरर फंडिंग के साथ कश्मीर (Kashmir) स्थित गैर सरकारी संगठनों (Non Government Organization) के लिंक की जांच करने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सबूत मिले हैं कि घाटी में आतंकवादियों का समर्थन करने के लिए अफ्रीकी और यूरोपीय देशों के विदेशी दान का दुरुपयोग किया गया था.

    एनआईए द्वारा बुधवार को ग्यारह जगहों पर छापा मारा गया जिनमें नौ श्रीनगर में, एक बांदीपोरा और बेंगलुरु में हैं. हालांकि पिछले सप्ताह एनआईए द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में केवल विशिष्ट नामों के बजाय "ट्रस्ट और एनजीओ" नाम शामिल हैं. अधिकारियों ने न्यूज18 को बताया कि जिन संगठनों को लेकर जांच की जा रही थी उनमें- जकात, फला-ए-इन्सानियत, जेकेसीएस-जम्मू एंड कश्मीर फॉर सिविल सोसायटी, एपीडीपीके-एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स ऑफ डिसअपीयर्ड पर्सन्स एंड एथ्राउट शामिल हैं.

    ये भी पढ़ें- जेपी नड्डा ने तेजस्वी यादव को बताया पॉलिटिकल टूरिस्ट, कहा- सिर्फ चुनाव के समय दिखते हैं



    इन लोगों के यहां की गई छानबीन
    एनआईए ने एक बयान में कहा कि कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं. जिनके परिसरों की तलाशी ली गई, उनमें खुर्रम परवेज (सिविल सोसाइटी के जम्मू-कश्मीर गठबंधन के समन्वयक), उनके सहयोगी परवेज अहमद बुखारी, परवेज अहमद मटका और बेंगलुरु की सहयोगी स्मिता शेषाद्री के साथ-साथ पेरेंट्स ऑफ डिसअपीयर्ड पर्सन एसोसिएशन की चेयरपर्सन परवीना अहंगर भी शामिल हैं. बयान में कहा गया कि एनजीओ एथ्राउट और जीके ट्रस्ट के कार्यालयों की भी तलाशी ली गई.

    एनआईए के वरिष्ठ अधिकारियों ने न्यूज को बताया, "ये एनजीओ पंजीकृत नहीं थे, उनके पास एफसीआरए लाइसेंस नहीं था. फिर भी, उन्हें पाकिस्तान, यूरोप और यहां तक ​​कि फिजी और पूर्वी तिमोर जैसे देशों से फंड मिल रहा था." एजेंसी के अधिकारियों ने दावा किया कि इन गैर सरकारी संगठनों के लिए आने वाले धन का दुरुपयोग "आतंकवादी समूहों के कैडर" के समर्थन में किया गया था, और साथ ही ऐसे प्रकाशनों के लिए किया गया जिसमें, "जानबूझकर भारत सरकार के खिलाफ असंतोष के बीज बोए, भारतीय सेना को एक दमनकारी के रूप में चित्रित किया और आतंकवादियों के मानवाधिकारों का हनन करने पर लीपापोती की गई."

    ये भी पढ़ें- ड्रग्स का मुद्दा सिर्फ बॉलीवुड का नहीं, ये पूरे देश की सुरक्षा का मसला: नड्डा

    खातों में आएं हैं करोड़ों रुपये
    अधिकारियों ने कहा कि जांच के दौरान, "डिजिटल उपकरणों से उनके खिलाफ सबूत पाए गए और इसमें पैसे के नुकसान का संकेत देने वाले साक्ष्य थे." जांच से जुड़े एक एनआईए अधिकारी ने कहा, "इन संगठनों के खाते में करोड़ों आए, फिर भी एनजीओ से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा कि उनके पास बैंक खाता नहीं है."

    एक अन्य अधिकारी ने कहा कि संदिग्ध स्मिता शेषाद्रि के खिलाफ सबूत मिले हैं, जो बेंगलुरु स्थित पर्यटन एनजीओ समीकरण के साथ काम करती है. अधिकारी ने कहा, "अभी तक समीकरण को फंसाने के लिए कुछ भी नहीं है, लेकिन शेषाद्रि की भूमिका को तलाशी के दौरान जब्त किए गए सबूतों से बदल दिया गया है. डिजिटल उपकरणों में इसके खिलाफ सबूत पाए गए हैं."

    डिजिटल उपकरणों को एनआईए द्वारा फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में भेजा जा रहा है. एजेंसी ने आरोप लगाया है कि पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने छापा मारकर भारत के खिलाफ एक हथियार के रूप में अपनी कलम चलायी.
    अगली ख़बर

    फोटो

    टॉप स्टोरीज