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आतंकी मोर्चे पर कमजोर हुआ पाकिस्तान, जहूर-मलिक की गिरफ्तारियों ने तोड़ी कमर

सांबा बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल के जवान
सांबा बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल के जवान

Jammu-Kashmir Terrorism: पुलवामा हमले की दूसरी बरसी पर नेटवर्क18 सांबा सेक्टर पहुंचा और पाकिस्तान (Pakistan) के इरादों को नाकाम करने वाली सीमा सुरक्षा बल की तैयारियों के संबंध में जानकारी जुटाई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 13, 2021, 5:11 PM IST
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(आदित्य राज कौल)
नई दिल्ली. अनंतनाग (Anantnag) और सांबा (Samba) पुलिस के संयुक्त प्रयासों की वजह से बड़ी आतंकी साजिश नाकाम हो गई है. बीते गुरुवार की मध्यरात्री पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के समूह टीआरएफ के आतंकी जहूर अमहद राठेर (Zahoor Ahmad Rather) को गिरफ्तार किया है. वहीं, बीते हफ्ते पुलिस ने शोपियां जिले से जैश के आंतकी हिदायतुल्लाह मलिक (Hidayatullah Malik) को गिरफ्तार किया था. इन दोनों आतंकियों की गिरफ्तारी से जम्मू और कश्मीर में पाकिस्तानी आतंक की कमर टूट गई है. फिलहाल इन दोनों से पूछताछ के आधार पर राज्य में छापामार कार्रवाई जारी है.

अनंतनाग पुलिस ने जहूर अहमद राठेर उर्फ खालिद उर्फ साहिल को सांबा जिले के बारी ब्राह्मणा से गिरफ्तार किया है. जहूर ने तीन भारतीय जनता पार्टी के नेताओं समेत एक पुलिसकर्मी की हत्या की है. अब्बास शेख के बाद द रेसिस्टेंस फोर्स में जहूर दूसरे नंबर का कमांडर है. अनंतनाग पुलिस एसएसपी संदीप चौधरी ने इस मामले की पुष्टि की है, लेकिन आगे की जानकारी देने से मना कर दिया है. शनिवार को पुलिस आतंकी को अदालत में पेश कर रिमांड पाने की कोशिश करेगी.

सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सूत्रों ने जानकारी दी है कि जहूर सांबा में पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आ रहे हथियारों की खेप लेने आया था. सांबा सेक्टर में मौजूद अंतरराष्ट्रीय सीमा हथियारों की आवाजाही के लिए एक बड़ा रास्ता है. खास बात है कि 1985 में जन्मे जहूर ने आतंक की ट्रैनिंग पीओके में हिजबुल मुजाहिदीन से 2004 में ली थी और 2006 में सरेंडर कर लिया था. 2020 में वो एक बार फिर लश्कर की टीआरएफ के जरिए सक्रिय हुआ.
इसी तरह पुलिस ने बीते हफ्ते शोपियां जिले से हिदायतुल्लाह मलिक को गिरफ्तार किया है. वह पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के समूह लश्कर-ए-मुस्तफा का प्रमुख है. बीते साल पुलिस ने विस्फोटकों से लदी एक गाड़ी को पकड़ा था. इस गाड़ी को तैयार करने में मलिका का हाथ था. खूफिया इनपुट की वजह से पुलवामा पुलिस ने बड़ी अनहोनी को रोक लिया था.



मलिक से कई सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ कर रहीं हैं. इन पूछताछ में जानकारी मिली है कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर भी साजिश रची जा रही थी. आतंकी ने पूछताछ में बताया कि जैश, डोभाल और नई दिल्ली स्थित सरदार पटेल भवन में उनके दफ्तर को निशाना बनाने की प्लानिंग कर रहा था. मलिन ने मई 2019 में सरदार पटेल भवन दफ्तर की जानकारी जुटाई थी. साथ ही उसने रैकी के वीडियो पाकिस्तान में हैंडलर्स को भेजे थे.

CNN-News18 ने मलिक के गिरफ्तार होने की जानकारी सबसे पहले दी थी. आतंकी से पुलवामा समेत दूसरी घटनाओं को लेकर पूछताछ हो चुकी है. यह खबरें उस समय सामने आईं जब नेटवर्क18 सांबा सेक्टर पहुंचा और भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर काफी समय बिताया. पुलवामा हमले की दूसरी बरसी पर नेटवर्क18 ने सांबा सेक्टर पहुंचा और पाकिस्तान के इरादों को नाकाम करने वाली सीमा सुरक्षा बल की तैयारियों के संबंध में जानकारी जुटाई.

कॉन्ट्रीब्यूटिंग एडिटर आदित्य राज कौल अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के कई मोर्चों पर पहुंचे. यहां हाल ही में बीएसएफ ने एक पाकिस्तानी घुसपैठियों को ढेर किया था और एक सुरंग का पता लगाय था. इस सुरंग का इस्तेमाल आतंकी भारत में घुसपैठ के लिए करते थे. इस काम में आतंकियों को पाकिस्तानी रेंजर्स और आईएसआई की मदद मिलती थी. इस घुसपैठिए को सुरक्षाबलों ने सांबा सेक्टर के चाक फकीरा बॉर्डर आउटपोस्ट पर 8 फरवरी को मारा था. वहीं, सुरंग का पता बोबियां गांव में लगाया गया था.

सूत्र बताते हैं कि इससे पहले माना जाता था कि आतंकी बीते कुछ सालों में नाले का उपयोग ज्यादा कर रहे हैं. जबकि, अब रणनीति में बदलाव हुआ है और घुसपैठ के लिए सुरंगों का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है. हाल के कुछ महीनों में जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों ने आतंकियों को भारत में घुसपैठ कराने के लिए इन सुरंगों का सहारा लिया है.

यह भी पढ़ें: जम्मू-कश्मीर: BJP के तीन कार्यकर्ताओं की हत्या करने वाला संदिग्‍ध आतंकी जहूर अहमद गिरफ्तार

14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ जवान मारे गए थे. नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, जैश के आतंकी अशाक नेंगरु ने हमले के कुछ महीनों पहले 'अपने तीन ट्रकों का इस्तेमाल कर जम्मू सीमा से कश्मीर घाटी में आतंकियों को घुसपैठ कराई थी.' 'पाकिस्तान जाने से पहले अक्टूबर 2017 से लेकर सितंबर 2018 तक अशाक ने जैश के 33 पाकिस्तान आतंकियों को अपने ट्रक में जम्मू बॉर्डर से कश्मीर घाटी पहुंचाया था.'

मामले की जांच कर रहे NIA के अधिकारी ने बताया कि नेंगरू जैश के नेतृत्व के साथ मिलकर सक्रिय रूप से काम कर रहा है. नई दिल्ली में सुरक्षा जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान के आईएसआई के जरिए अशाक को खालिस्तानी समूहों से मिलवाया गया है. यह मुलाकात जम्मू के साथ-साथ पंजाब बॉर्डर पर भी ड्रोन के जरिए हथियारों की आवाजाही बढ़ाने के लिए हुई है.

खूफिया एजेंसियों का मानना है कि आर्टिकल 370 हटने के बाद कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर पाकिस्तान कश्मीर घाटी में आंतरिक अशांति फैलाना चाहता है. वहीं, बीएसएप लगातार आधुनिक उपकरणों की मदद से सीमा पर हो रही गतिविधियों पर नजर रख रही है.
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