गुरेज़ से श्रीनगर : वो 28 घंटे जिसने कश्मीर को बदल दिया

हमारी गाड़ी को भी रोका गया. वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी भी कुछ भी कहने की हालत में नहीं थे. गुरेज़ शहर के एक स्थानीय नागरिक श्रीनगर जाना चाहते थे लेकिन उनकी गाड़ी को बार-बार रोका जा रहा था...

News18Hindi
Updated: August 8, 2019, 3:42 PM IST
गुरेज़ से श्रीनगर : वो 28 घंटे जिसने कश्मीर को बदल दिया
सड़कों पर सन्नाटा पसरा था
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Updated: August 8, 2019, 3:42 PM IST
(सुहास मुंशी)

कश्मीर के कई इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात थे. आर्टिकल 370 को लेकर संसद में बहस शुरू हो गई थी. लेकिन इन सबसे बेखबर गुरेज़ शहर के लोगों को कुछ भी पता नहीं चल रहा था कि आखिर हो क्या रहा है. क्या 35A को हटा लिया गया है? क्या भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हो गया है? रविवार रात से दवार और गुरेज़ शहर में लोगों के मोबाइल ने काम करना बंद कर दिया था.

'पहली बार देखा ऐसा'
इलाके में सेना के सैकड़ों ट्रक चक्कर काट रहे थे. गुरेज़ के रहने वाले 60 साल के एक शख्स ने कहा कि उन्होंने ऐसा 90 के दशक में भी नहीं देखा था. उन्होंने कहा, ''मैंने अपने जीवन में इतनी सेना एक साथ नहीं देखी था''. गुरेज़ से 30 किलोमीटर दूर चाय की एक दुकान पर बैठे आदमी ने कहा, ''हमें लगा कि पाकिस्तान से युद्ध का ऐलान हो गया है. चारों तरफ दहशत का माहौल था.''

गुरेज़ से बांदीपुर तक की टैक्सी सर्विस भी कई बार बंद कर दी गई थी. कोई ये कहने की हालत में नहीं था कि क्या इलाके में कर्फ्यू लगा है. आमतौर पर इन इलाकों में इस वक्त खासी हलचल रहती है. लोग यहां सर्दी आने से पहले अपने लिए छह महीने का सामान इकट्ठा कर लेते हैं. लेकिन यहां माहौल अचानक ही बदल गया था.

गाड़ियों को रोका जा रहा था
हमारी गाड़ी को भी रोका गया. वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी भी कुछ भी कहने की हालत में नहीं थे. गुरेज़ शहर के एक स्थानीय नागरिक श्रीनगर जाना चाहते थे लेकिन उनकी गाड़ी को बार-बार रोका जा रहा था. उन्होंने कहा, ''साल 2016 में बुरहान वानी के एनकाउंटर के दौरान भी ऐसा ही हुआ था. पैदल चलते हुए मैं 8 घंटे में श्रीनगर पहुंचा था.''
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यहां एक स्थानीय दुकानदार अपने डिश टीवी पर राज्यसभा टीवी की कार्यवाही देख रहा था. उन्होंने कश्मीरी में कहा, ''370 को खत्म कर दिया गया है''. कुछ लोग उनकी दुकान पर बैठे थे. लेकिन शहर में सड़कों पर हर तरफ सन्नाटा पसरा था. आवाजें सिर्फ सेना की गाड़ियों के काफिले की आ रही थीं.

हमारी किस्मत अच्छी थी कि बांदीपुर से कुछ आगे हमें लिफ्ट मिल गई. हमने लोगों से पूछा कि क्या हो रहा है तो किसी के पास कोई जवाब नहीं था. इसके बाद आगे भी हमारी गाड़ी को कई बार रोका गया.

बाद में स्थानीय ड्राइवर ने बाटमालू तक हमें छोड़ दिया. वो हमें अभी और आगे ले जाते लेकिन बाद में उन्हें घर लौटना मुश्किल हो जाता. उन्होंने मज़ाक करते हुए कहा, ''तुम लोग हमें छोड़कर जा रहे हो. देखना ये लोग हमें जान से मार देंगे.''

आगे बढ़ने पर हमें एक महिला मिली. उन्हें अभी-अभी पता चला कि यहां से 30 किलोमीटर दूर एक सड़क हादसे में उनके बेटे की मौत हो गई थी. मोबाइल फोन बंद थे इसलिए उन्हें काफी देर से पता चला. अब उन्हें ये समझ नहीं आ रहा था कि वो अंतिम संस्कार के लिए अपने बेटे के शव को कैसे लेकर आएं.

CRPF ने रोका
लंच करने के थोड़ी देर बाद हम कश्मीर के प्रेस क्लब पहुंचे. यहां हमें कुछ प्रत्रकारों ने बताया कि CRPF के जवानों ने हमें सड़कों पर टहलने से रोका. उन्होंने कहा, ''हमने उन्हें अपने प्रेस कार्ड दिखाए. CRPF के जवानों ने हमसे कहा तुम लोग बुरहान वानी के भाई लगते हो. ये फर्जी कार्ड कहां से छपवाए हो.''

लोगों को अभी नहीं चला है पता
स्थानीय प्रत्रकारों को पता चल गया है कि आर्टिकल 370 को खत्म कर दिया गया है. लेकिन उन्हें ज़्यादा नहीं पता है क्योंकि पिछले चार दिनों से कोई अखबार नहीं छपा है. जो भी नए लोग उन्हें मिलते हैं वो अफवाह फैलाते हैं कि कई जगह हिंसा हो रही है.

शाम को लाल चौक पर लोग इधर-उधर दुकानों पर नजर आ रहे थे. लोग पूछ रहे थे कि क्या अब यहां कोई मुख्यमंत्री होगा. एक दूसरे शख्स ने पूछा कि क्या अगले हफ्ते मेरी बहन की शादी होगी. घाटी में कर्फ्यू नहीं लगा था लेकिन फिर भी सड़कों पर कम लोग दिख रहे थे. सड़क पर दिख रहे लोगों से पुलिस काफी पूछताछ कर रही थी.

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First published: August 8, 2019, 1:12 PM IST
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