मीसा बंदी से RSS के सरकार्यवाह तक, जानिये कैसा रहा दत्तात्रेय होसबले का सफर

दत्तात्रेय होसबोले आज RSS के सरसंघकार्यवाह निर्वाचित हुए हैं. (तस्वीर RSS Facebook)

दत्तात्रेय होसबोले आज RSS के सरसंघकार्यवाह निर्वाचित हुए हैं. (तस्वीर RSS Facebook)

13 वर्ष की आयु में संघ के स्वयंसेवक बने दत्तात्रेय (Dattatreya Hosabale) 1972 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े. जब जेपी आंदोलन जोर पकड़ा तो उन्होंने 1975-77 के दौरान पौने दो साल मीसा के तहत कारावास झेला.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 20, 2021, 4:35 PM IST
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देव कुमार पुखराज

बेंगलुरु.
बेंगलुरु में RSS की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में सरकार्यवाह ( General Secretary) पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुए दत्तात्रेय होसबले (Dattatreya Hosabale) का जन्म कर्नाटक के शिमोगा जिले के सोराबा कस्बे में 01 दिसम्बर, 1955 में हुआ. उन्होंने बेंगलुरु यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में एमए किया है.

13 वर्ष की आयु में संघ के स्वयंसेवक बने दत्तात्रेय 1972 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े. जब जेपी आंदोलन जोर पकड़ा तो उन्होंने 1975-77 के दौरान पौने दो साल मीसा के तहत कारावास झेला. जेल से छूटे तो नागपुर को केन्द्र बनाया. इमरजेंसी के दौरान दो हस्तलिखित पत्रिकाओं का संपादन भी किया.

नागपुर से छात्र राजनीति में प्रवेश
1978 में नागपुर नगर सम्पर्क प्रमुख के रूप में विद्यार्थी परिषद में पूर्णकालिक कार्यकर्ता हुए. विद्यार्थी परिषद में अनेक दायित्वों का निर्वहन करते हुए राष्ट्रीय संगठन-मंत्री के पद को सुशोभित किया. गुवाहाटी में युवा विकास केन्द्र के संचालन में दत्तात्रेय की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही. अंडमान निकोबार द्वीप समूह और पूर्वोत्तर भारत में विद्यार्थी परिषद के कार्य-विस्तार में होसबले की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

विदेश प्रवास और संघ दायित्व

दत्तात्रेय होसबले ने नेपाल, रूस, इंग्लैण्ड, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों की यात्राएं की है. विद्यार्थी परिषद में कार्य करने के दौरान सम्पूर्ण भारतवर्ष में उनके प्रवास होते रहे. कुछ वर्ष पहले जब पड़ोसी देश नेपाल में भीषण भूकंप आया तो बाद संघ द्वारा भेजी गयी राहत-सामग्री लेकर राहत दल प्रमुख के नाते वो नेपाल गए. महीनों वहां रहकर सेवा-कार्य किया. वर्ष 2004 में इनको संघ के अखिल भारतीय सह-बौद्धिक प्रमुख बनाया गया. फिर 2008 में दायित्व परिवर्तन कर सह-सरकार्यवाह की जिम्मेवारी सौंपी गयी. आज सरकार्यवाह का दायित्व सौंपा गया. अभी भैयाजी जोशी इस दायित्व को संभाल रहे हैं.



कई भाषाओं के जानकार

दत्तात्रेय होसबले की मातृभाषा कन्नड़ है. स्नातकोत्तर तक पढ़ाई अंग्रेजी भाषा में की. इसके अतिरिक्त हिंदी, संस्कृत, तमिल, मराठी जैसी कई भाषाओं के भी वे जानकार हैं. साथ ही लोकप्रिय कन्नड़-मासिक पत्रिका ‘असीमा’ के संस्थापक-संपादक हैं.

तीन साल का होता है कार्यकाल

संघ में प्रत्येक तीन वर्षों पर चुनाव की प्रक्रिया अपना कर जिला संघचालक, विभाग संघचालक, प्रांत संघचालक, क्षेत्र संघचालक के साथ-साथ सरकार्यवाह का चुनाव होता है. बाद में ये निर्वाचित पदाधिकारी कोर ग्रुप से सलाह विचार कर अपनी टीम बनाते हैं. आमतौर पर यह कमेटी तीन साल तक काम करती है. लेकिन अधिकांश मामलों में इनका एक्सटेंशन होता रहता है. जरूरत के हिसाब से बीच में भी कुछ पदों पर बदलाव होता रहता है. संघ की प्रतिनिधि सभा सर्वोच्च निर्णायक बॉडी है, जो क्षेत्र प्रचारक और प्रांत प्रचारकों के दायित्व में बदलाव पर मुहर लगाती है. प्रतिनिधि सभा की बैठक में ही बाकी बड़े फैसले और भविष्य की कार्ययोजना पर मुहर लगती है.
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