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नदियों से लेकर कोरोना तक, पढ़ें PM मोदी के 'मन की बात' से जुड़ी 10 बड़ी बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में नदियों को बचाने पर दिया जोर.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में नदियों को बचाने पर दिया जोर.

मन की बात (Mann Ki Baat) कार्यक्रम के जरिए पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कहा, वैक्‍सीनेशन में देश ने कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. इस लड़ाई में हर भारतवासी की अहम भूमिका है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) आज एक बार फिर अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात (Mann Ki Baat) के जरिए राष्‍ट्र को संबोधित किया. मन की बात के 81वें संस्‍करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नदियों को बचाने पर जोर दिया. उन्‍होंने कहा, मैं देशवाशियों से आग्रह करूंगा कि भारत में, कोने-कोने में साल में एक बार तो नदी उत्सव मनाना ही चाहिए.

    पीएम मोदी ने कहा, दीनदयाल जी के जीवन से हमें कभी हार न मानने की भी सीख मिलती है. विपरीत राजनीतिक और वैचारिक परिस्थितियों के बावजूद भारत के विकास के लिए स्वदेशी मॉडल के विजन से वे कभी डिगे नहीं. आज बहुत सारे युवा बने-बनाए रास्तों से अलग होकर आगे बढ़ना चाहते हैं. वे चीजों को अपनी तरह से करना चाहते हैं. दीनदयाल जी के जीवन से उन्हें काफी मदद मिल सकती है. इसलिए युवाओं से मेरा आग्रह है कि वे उनके बारे में जरूर जानें. इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा, वैक्‍सीनेशन में देश ने कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. इस लड़ाई में हर भारतवासी की अहम भूमिका है. हमें अपनी बारी आने पर वैक्‍सीन तो लगवानी ही है पर इस बात का भी ध्यान रखना है कि कोई इस सुरक्षा चक्र से छूट ना जाए.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात से जुड़ी 10 बड़ी बातें :-

    "हमारे लिये नदियाँ एक भौतिक वस्तु नहीं है, हमारे लिए नदी एक जीवंत इकाई है, और तभी तो, तभी तो हम नदियों को मां कहते हैं. हमारे कितने ही पर्व हो, त्‍योहार हो, उत्‍सव हो, उमंग हो, ये सभी हमारी इन माताओं की गोद में ही तो होते हैं.
    नदियों का स्मरण करने की परंपरा आज भले लुप्त हो गई हो या कहीं बहुत अल्पमात्रा में बची हो लेकिन एक बहुत बड़ी परंपरा थी जो प्रातः में ही स्नान करते समय ही विशाल भारत की एक यात्रा करा देती थी, मानसिक यात्रा! देश के कोने-कोने से जुड़ने की प्रेरणा बन जाती थी.
    पीएम मोदी ने कहा, मैं तो जानता हूं कई हमारे धार्मिक परम्परा से जुड़े हुए संत हैं, गुरुजन हैं, वे भी अपनी अध्यात्मिक यात्रा के साथ-साथ पानी के लिए नदी के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं. कई नदियों के किनारे पेड़ लगाने का अभियान चला रहे हैं. तो कहीं नदियों में बह रहे गंदे पानी को रोका जा रहा है. लेकिन हर नदी के पास रहने वाले लोगों को, देशवाशियों को मैं आग्रह करूंगा कि भारत में, कोने-कोने में साल में एक बार तो नदी उत्सव मनाना ही चाहिए.
    गुजरात में बारिश की शुरुआत होती है तो गुजरात में जल-जीलनी एकादशी मनाते हैं. उसी प्रकार से बारिश के बाद बिहार और पूरब के हिस्सों में छठ का महापर्व मनाया जाता है. मुझे उम्मीद है कि छठ पूजा को देखते हुए नदियों के किनारे, घाटों की सफाई और मरम्मत की तैयारी शुरू कर दी गई होगी. हम नदियों की सफाई और उन्हें प्रदूषण से मुक्त करने का काम सबके प्रयास और सबके सहयोग से कर ही सकते हैं. ‘नमामि गंगे मिशन’ भी आज आगे बढ़ रहा है तो इसमें सभी लोगों के प्रयास, एक प्रकार से जन-जागृति, जन-आंदोलन, उसकी बहुत बड़ी भूमिका है.
    जब नदी की बात हो रही है, मां गंगा की बात हो रही है तो एक और बात की ओर भी आपका ध्यान आकर्षित करने का मन करता है. बात जब ‘नमामि गंगे’ की हो रही है तो जरुर एक बात पर आपका ध्यान गया होगा और हमारे नौजवानों का तो पक्का गया होगा. आजकल एक विशेष E-ऑक्शन, ई-नीलामी चल रही है. ये इलेक्ट्रॉनिक नीलामी उन उपहारों की हो रही है, जो मुझे समय-समय पर लोगों ने दिए हैं. इस नीलामी से जो पैसा आएगा, वो ‘नमामि गंगे’ अभियान के लिए ही समर्पित किया जाता है. देश भर में नदियों को बचाने की यही परंपरा, यही प्रयास, यही आस्था हमारी नदियों को बचाए हुए है.
    पीएम मोदी ने कहा, कभी भी छोटी बात को छोटी चीज को, छोटी मानने की गलती नहीं करनी चाहिए. छोटे-छोटे प्रयासों से कभी कभी तो बहुत बड़े-बड़े परिवर्तन आते हैं, और अगर महात्मा गांधी जी के जीवन की तरफ हम देखेंगे तो हम हर पल महसूस करेंगे कि छोटी-छोटी बातों की उनके जीवन में कितनी बड़ी अहमियत थी और छोटी-छोटी बातों को ले करके बड़े बड़े संकल्पों को कैसे उन्होंने साकार किया था.
    कुछ ही दिन पहले सियाचिन के इस दुर्गम इलाके में 8 दिव्यांग जनों की टीम ने जो कमाल कर दिखाया है वो हर देशवासी के लिए गर्व की बात है. इस टीम ने सियाचिन ग्‍लेशियर की 15 हजार फीट से भी ज्‍यादा की ऊंचाई पर स्थित कुमार पोस्‍ट पर अपना परचम लहराकर वर्ल्‍ड रिकॉर्ड बना दिया है.
    सियाचिन ग्लेशियर को फतह करने का ये ऑपरेशन भारतीय सेना के विशेष बलों के veterans की वजह से सफल हुआ है. मैं इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व उपलब्धि के लिए इस टीम की सराहना करता हूं. यह हमारे देशवासियों के Can Do Culture, Can Do Determination, Can Do Attitude के साथ हर चुनौती से निपटने की भावना को भी प्रकट करता है.
    पीएम मोदी ने कहा, आज हम लोगों की ज़िन्दगी का हाल ये है कि एक दिन में सैकड़ों बार कोरोना शब्द हमारे कान पर गूंजता है, सौ साल में आई सबसे बड़ी वैश्विक महामारी, COVID-19 ने हर देशवासी को बहुत कुछ सिखाया है. "Healthcare और Wellness को लेकर आज जिज्ञासा भी बढ़ी है और जागरूकता भी. हमारे देश में पारंपरिक रूप से ऐसे Natural Products प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं जो Wellness यानि सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है.
    पीएम मोदी ने कहा, बच्चो में Medicinal और Herbal Plants के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने एक दिलचस्प पहल की है और इसका बीड़ा उठाया है हमारे प्रोफेसर आयुष्मान जी ने. हो सकता है कि जब आप ये सोचें कि आखिर प्रोफेसर आयुष्मान हैं कौन? दरअसल प्रोफेसर आयुष्मान एक कॉमिक बुक का नाम है. इसमें अलग अलग कार्टून किरदारों के जरिए छोटी-छोटी कहानियां तैयार की गई हैं . छोटी-छोटी कहानियां तैयार की गई हैं. साथ ही एलो वेरा, तुलसी, आंवला, गिलॉय, नीम, अश्वगंधा और ब्रह्मी जैसे सेहतमंद मेडिकल प्‍लांट की उपयोगिता बताई गई है.

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