हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर PM मोदी ने इसलिए उठाया आतंकवाद का मुद्दा, PAK को ऐसे देंगे शिकस्त...

अब प्रधानमंत्री ने बिश्केक में फिर से इस मुद्दे को उठाया है और उन्होंने ऐसे देशों की जिम्मेदारी भी तय करने की बात कही है जो आतंकवाद को संरक्षण और आर्थिक मदद देते हैं. जाहिर है उनका इशारा पाकिस्तान की ओर था.

News18Hindi
Updated: June 15, 2019, 9:22 PM IST
हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर PM मोदी ने इसलिए उठाया आतंकवाद का मुद्दा, PAK को ऐसे देंगे शिकस्त...
पीएम मोदी अंतरराष्ट्रीय मंचों से लगातार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे मुल्कों को घेरने की कोशिश कर रहे हैं.
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Updated: June 15, 2019, 9:22 PM IST
अपने दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी न सिर्फ एक वैश्विक नेता के तौर पर मजबूत हुए हैं बल्कि उन्होंने भारत के बदमाश पड़ोसी पाकिस्तान को यह भी बता दिया है कि उसकी नाफरमानियों के बाद भारत भी उसके साथ किसी तरह की रियायत नहीं करेगा. दूसरी बार शपथ लेने के बाद पीएम मोदी लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं, जिसका सीधा इशारा पाकिस्तान की तरफ ही जाता है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और वहां के बड़े अधिकारियों के आग्रह के बावजूद बिश्केक समिट में पाकिस्तान की लगातार उपेक्षा की है. उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान से औपचारिक अभिवादन भी नहीं किया. मतलब पाकिस्तान के लिए उनका संदेश कड़ा है. जब तक आतंकवाद पर पूरी तरह लगाम नहीं तबतक कोई बात नहीं. लेकिन इन सबमें सबसे महत्व की बात है, पीएम मोदी का लगातार आतंकवाद को पालने-पोसने और आर्थिक मदद मुहैया कराने वाले देशों की जिम्मेदारी तय करने की बात.



दूसरे कार्यकाल में अभी तक पाकिस्तान के प्रति प्रधानमंत्री का रुख बहुत कड़ा रहा है
अपने दूसरे कार्यकाल में विदेश जाने की बात करें तो प्रधानमंत्री अभी तक श्रीलंका, मालदीव और SCO समिट के लिए बिश्केक जा चुके हैं. तीनों ही जगहों पर प्रधानमंत्री ने भारत के सबसे प्रमुख एजेंडे के तौर पर आतंकवाद को रखा है. श्रीलंका में उन्होंने हाल ही में हुए आतंकी हमलों के साथ अपनी बात को जोड़कर रखा था. मालदीव में भी उन्होंने आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बात कही थी. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि जब हम पर्यावरण के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय बैठकें और सम्मेलन कर सकते हैं तो आतंकवाद के मुद्दे पर क्यों नहीं.

कई बार प्रधानमंत्री कर चुके हैं आतंकवाद के प्रति वैश्विक सहयोग की बात
अब प्रधानमंत्री ने बिश्केक में फिर से इस मुद्दे को उठाया है और उन्होंने ऐसे देशों की जिम्मेदारी भी तय करने की बात कही है तो आतंकवाद को संरक्षण और आर्थिक मदद दे रहे हैं. ऐसे में लगातार आतंकवाद के मुद्दे को उठाना साफ कर देता है कि उनका इशारा पाकिस्तान की ओर है.

पाकिस्तान वैसे ही लगातार भारत के अंतरराष्ट्रीय दबावों के चलते दुनिया भर में अकेला पड़ चुका है. यूरोपीय देशों के अलावा अमेरिका जैसे पुराने सहयोगी ने भी उसका साथ छोड़ दिया है. एक ओर उसके ऊपर FATF में रैंकिंग में नीचे जाने की तलवार लटक रही है. वहीं दूसरी ओर उसकी अर्थव्यवस्था भी रसातल में जा चुकी है.
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पाकिस्तान का चेहरा बेनकाब करना है लक्ष्य
पाकिस्तान ने कभी आतंकवाद के विस्तार में शरीक होने की बात खुलकर स्वीकारी नहीं है. ऐसे में उसकी छवि कुछ देशों के लिए एक नए उभरते देश की है, जिसे शासन में कई सारी परेशानियां आ चुकी हैं. लेकिन अब प्रधानमंत्री पाकिस्तान के चेहरे से यह नकाब हटा देना चाहते हैं. वे चाहते हैं कि दुनिया उसे आतंक को बढ़ावा देने वाले एक मुल्क के तौर पर पहचाने. वे जानते हैं कि अगर इस पर चर्चा हुई और शोध हुए तो पाकिस्तान के आतंकवाद से गहरे कनेक्शन खुलकर सामने आ जाएंगे.

सेना और आईएसआई संचालित सरकार का चेहरा भी आए सामने
जानकार मानते हैं कि पाकिस्तानी कार्यपालिका, पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के दबाव में काम करती है. ऐसे में अगर लगातार कार्यपालिका पर आतंकवाद से निपटने का दबाव बढ़े तो उसकी सीमित क्षमताओं की बात भी सामने आ जाएगी. जिससे साबित हो जाएगा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री, सेना और आईएसआई के दबाव के चलते चाहकर भी आतंकियों पर एक्शन नहीं ले पाता है. ऐसे में एक असफल लोकतंत्र का असली चेहरा पूरी दुनिया के सामने आ जाएगा. जिसके बाद दुनिया के प्रमुख देश पाकिस्तान को एक लोकतंत्र की तरह ट्रीट करना बंद कर देंगे.

पाक संरक्षित आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने का है प्रयास
पाकिस्तान ने हमेशा से आतंकवाद को भारत और पाकिस्तान के बीच के एक क्षेत्रीय मुद्दे के तौर पर पेश करना चाहा है लेकिन लगातार वैश्विक मंचों पर ऐसे आतंकवाद के बारे में बात करके जिसके पीछे पाकिस्तान का हाथ है, प्रधानमंत्री मोदी इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय बनाना चाहते हैं. पाकिस्तान ऐसे में कई बार कश्मीर की आड़ लेकर बचने की कोशिश करता है. वह चाहता है कि कश्मीर को भी वैश्विक मुद्दा माना जाए लेकिन पीएम मोदी प्रतिष्ठा और प्रभाव दोनों में ही अभी इमरान खान से वैश्विक मंचों पर बहुत कद्दावर छवि रखते हैं. ऐसे में पाकिस्तान लगातार अकेला पड़ता जा रहा है.

आर्थिक मंच पर अकेला पड़ा पाक तो भारत से मदद के लिए देनी होगी आतंक को लगाम
आज पाकिस्तान, अमेरिका के बाद चीन से आर्थिक मदद ले रहा है लेकिन लंबे वक्त के लिए वह अपने शक्तिशाली पड़ोसी भारत को नजरअंदाज नहीं कर सकता है. ऐसे में अगर पाकिस्तान को वाकई अपने आर्थिक हितों का लंबे वक्त के लिए ध्यान रखना है तो अमेरिका की तरह ही चीन से धोखा खाने के बाद अपने शक्तिशाली पड़ोसी भारत की ओर देखना होगा और अगर पाकिस्तान ने खुद या अपनी सिविल सोसाइटी के दबाव में ऐसा कदम उठाया तो भारत की पहली शर्त होगी कि पाकिस्तान पहले आतंक पर लगाम कसे.

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