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Assam Mizoram Border Row: पथराव से लेकर ग्रेनेड अटैक तक... असम-मिजोरम के बीच यूं शुरू हुई खूनी सोमवार की कहानी

असम और मिजोरम में तनाव के चलते सीआरपीएफ तैनात की गई है. (फोटो- न्यूज18 असमिया)

असम और मिजोरम में तनाव के चलते सीआरपीएफ तैनात की गई है. (फोटो- न्यूज18 असमिया)

Assam-Mizoram Border Dispute: अंतरराज्यीय सीमा क्षेत्र में हुई इस हिंसक झड़प में असम पक्ष के 7 लोगों की मौत हो गई और 41 लोग घायल हो गए. इस दौरान जान गंवाने वालों में 6 पुलिसकर्मियों का नाम भी शामिल है.

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    नई दिल्ली. भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित दो राज्यों असम और मिजोरम में बीते सोमवार को अशांति फैल गई थी. इसका कारण दोनों राज्यों के बीच सालों पुराना सीमा विवाद (Border Dispute) बताया जा रहा है. अंतरराज्यीय सीमा क्षेत्र में हुई इस हिंसक झड़प में असम पक्ष के 7 लोगों की मौत हो गई और 41 लोग घायल हो गए. इस दौरान जान गंवाने वालों में 6 पुलिसकर्मियों का नाम भी शामिल है. राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने मृतकों को श्रद्धांजलि दी थी. अब जानते हैं कि आखिर सोमवार को कैसे शुरू हुआ यह सीमा विवाद, जो लाठियों से शुरू होकर आंसू गैस के गोलों से लेकर ग्रेनेड और फिर गोलीबारी में तबदील हो गया. इस घटना के तार रविवार को राष्ट्रीय राजमार्ग 306 से निकले मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथंगा के काफिले से जोड़े जा रहे हैं.

    रविवार: जोरमथंगा शिलॉन्ग से लौट रहे थे. वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तरफ से बुलाई गई उत्तरपूर्वी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में शामिल होने मेघालय की राजधानी पहुंचे थे. लौटने के दौरान वे कुछ समय के लिए असम में रुके, जहां कछार जिले की उपायुक्त कीर्ती जल्ली और जिला पुलिस अधीक्षक वीसी निंबालकर ने उनका स्वागत किया. इस पूरे घटनाक्रम को 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि असम औऱ मिजोरम पक्ष के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर इसके आरोप लगा रहे हैं. झड़प में निंबालकर भी घायल हुए थे.

    सोमवार: असम पुलिस ने लैलापुर के पास एक कैंप पर कब्जा किया. कथित रूप से यह कैंप मिजोरम पुलिस के इंडिया रिजर्व बटालियन की तरफ से बीते साल तैयार किया गया था. असम के स्थानीय लोगों के मुताबिक, IR बटालियन की तुलना में असम पुलिस के जवान काफी ज्यादा थे, लेकिन वैरेंगते में उनकी मौजूदगी की खबर सामने आते ही सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग इकट्ठा होने शुरू हो गए. असम सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, सुबह 11:30 बजे मिजोरम पक्ष के कुछ लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी. उपायुक्त जल्ली की कार पर हमला हुआ, लेकिन वे सुरक्षित बच निकलीं.

    हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, मौके पर मौजूद कई पत्रकार बताते हैं कि गोलीबारी शुरू होने से पहले दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक पत्थरबाजी होती रही. कछार उपायुक्त जल्ली और एसपी निंबालकर समेत असम पक्ष के कुछ अधिकारी लैलापुर के नजदीक स्थित कैंप पर मौजूद थे. करीब 4 बजे मिजोरम के कोलासिब जिले के एसपी कैंप पर पहुंचे, जहां जल्ली ने उन्हें अपनी कुर्सी बैठने के लिए दी. इसके कुछ 20 मिनट बाद ही आंसू गैस के तीन गोले असम पक्ष की सड़क पर गिरे. कुछ मिनटों बाद गोलियों की आवाजें सुनाई दीं. चश्मदीदों के अनुसार, घायल लोगों को नजदीकी शासकीय स्वास्थ्य केंद्र में दाखिल किया गया.

    कुछ समय के लिए इलाका युद्ध क्षेत्र की तरह लग रहा था और इंटरनेट और फोन कनेक्शन बधित रहे. असम पक्ष के स्थानीय लोग पत्थरों और लाठियों से लैस थे, लेकिन उनके पास बंदूकें नहीं थीं. उन्होंने दावा किया है कि मिजोरम पक्ष के पास बंदूकें थीं. गोलीबारी कम से कम आधे घंटे तक जारी रही.

    यह भी पढ़ें: असम-मिजोरम सीमा गतिरोध: मिजोरम के गृह मंत्री व विधायक ने की सीआरपीएफ की आलोचना

    मिजोरम पक्ष का दावा अलग
    राज्य के गृहमंत्री लालचमलियाना ने सोमवार की घटना पर बयान जारी किया. उन्होंने असम पुलिस पर मिजोरम के इलाके में घुसने और हिंसा में शामिल होने का आरोप लगाया. उनकी तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि असम पुलिस के 200 जवान सोमवार को करीब 11:30 बजे वैरेंगते आए और सीआरपीएफ की चौकी पर जबरदस्ती पार कर लिया और वैरेंगते और लैलापुर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुजर रहे कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया.

    बयान के अनुसार, ‘असम पुलिस की तरफ से की जा रही आगजनी की खबरें सुनकर वैरेंगते शहर के लोग मौके पर पहुंचे. इन निहत्थे लोगों को असम पुलिस की तरफ से लाठी चार्ज कर पीटा गया और उनपर आंसू गैस के गोले छोड़े गए. जिसके चलते कई नागरिक घायल हो गए.’ आगे लिखा है, ‘यह विवाद जारी रहा और असम पक्ष की तरफ से 4:50 बजे मिजोरम पुलिस पर आंसू गैस और ग्रेनेड दागे गए. मिजोरम पुलिस ने भी असम पुलिस पर जवाबी गोलीबारी की.’

    भाषा के अनुसार, गृह मंत्री लालचमलिआना ने सीआरपीएफ पर, सोमवार को कोलासिब जिले के वैरेंगते के बाहरी इलाके में असम पुलिकर्मियों को मिजोरम में घुसने और राज्य पुलिस की ड्यूटी पोस्ट पर बलपूर्वक कब्जा करने की अनुमति देने का आरोप लगाया. मिजोरम के एक मंत्री, एक स्थानीय विधायक और वैरेंगते के ग्राम परिषद अध्यक्ष ने भी सीआरपीएफ पर इसी प्रकार के आरोप लगाए. पिछले साल अगस्त में सीमा पर हुए गतिरोध के बाद तनाव कम करने और शांति बहाली के लिए केंद्र सरकार ने मिजोरम-असम सीमा पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया था.

    लालचमलियाना ने कहा है कि सीमा पर अब शांति है. उन्होंने जानकारी दी कि बुधवार को दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख नई दिल्ली में गृह सचिव अजय कुमार भल्ला से मिलेंगे. करीब एक साल पहले भी इस तरह के तनाव की स्थिति बनी थी. कहा जा रहा है कि उस दौरान कुछ उपद्रवियों ने असम के क्षेत्र में सरकारी स्कूल पर बमबारी की थी.

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