ड्रोन से पहुंचाई जाएगी वैक्‍सीन और दवाइयां, भारत में आज से शुरू हुआ ट्रायल, जानें सब कुछ

तेलंगाना सरकार का ये पाइलट प्रोजेक्ट वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की परियोजना 'मेडिसिन फ्रॉम द स्काई' का हिस्सा है.

तेलंगाना सरकार ने ड्रोन का इस्तेमाल करके वैक्सीन की सप्लाई कितनी व्यवहारिक हो सकती है इसे लेकर एक परियोजना लॉन्च की है. इस तरह से लोगों को वैक्सीन लगने में गति मिलेगी. इस जांच में तेलंगाना सरकार के साथ फ्लिपकार्ट और डुन्जो है.

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    हैदराबाद. अगर आपको लगता है कि ड्रोन महज़ एक लुभावना खिलौना भर है या फिर बहुत हुआ तो उसका इस्तेमाल कुरियर या पिज्ज़ा डिलिवरी में हो सकता है. तो आपको अपनी सोच बदलनी चाहिए. देश के कई हिस्सों में ड्रोन से कोविड की वैक्सीन डिलीवर करने के बारे में गंभीरता से विचार किया जा रहा है. खासतौर पर ऐसे इलाकों में जहां तक लोगों का पहुंचना आसान नहीं होता है, अभी तक ऐसा कुछ हुआ तो नहीं है लेकिन इस पर ईमानदारी से प्रयास शुरू किया गया है.

    तेलंगाना सरकार ने ड्रोन का इस्तेमाल करके वैक्सीन की सप्लाई कितनी व्यवहारिक हो सकती है इसे लेकर एक परियोजना लॉन्च की है. इस तरह से लोगों को वैक्सीन लगने में गति मिलेगी. इस जांच में तेलंगाना सरकार के साथ फ्लिपकार्ट और डुन्जो है.

    उधर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने भी ड्रोन ऑपरेटर की निविदा बुलाई है, जिसका उद्देश्य वैक्सीन डिलीवरी का एक ऐसा प्रारूप तैयार करना है जिससे ऐसे इलाकों में वैक्सीन पहुंचाना सहज हो पाए जहां पहुंचना मुश्किल होता है.

    मेडिसिन फ्रॉम द स्काई प्रोजेक्ट का है हिस्सा
    तेलंगाना सरकार का ये पाइलट प्रोजेक्ट वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की परियोजना 'मेडिसिन फ्रॉम द स्काई' का हिस्सा है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के जारी किए गये पेपर से जानकारी मिलती है कि चिकित्सा आपूर्ति श्रंखला यानि मेडिकल सप्लाई चेन अक्सर जिन चुनौतियों का सामना करती है उनमें ज्यादातर आधारभूत संरचनाओं से जुड़ी होती है. मसलन पहाड़ी इलाकों में खराब सड़कें आपूर्ति मार्ग जो मानसून के चलते टूट फूट गए हैं. कई इलाकों में बिजली की आपूर्ति का अभाव ये सभी परेशानियां आपूर्ति में बाधा डालती हैं.

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    कैसे किया जा सकता है चिकित्सा आपूर्ति में बदलाव
    तेलंगाना सरकार की इस परियोजना में उनके साथ ईकॉमर्स प्लेटफार्म फ्लिपकार्ट और डुन्जो भी आगे आए हैं. इसके लिए फ्लिपकार्ट ड्रोन के ज़रिए अपनी आपूर्ति श्रंखला के तरीकों और अनुभवों को साझा करेगा और ये समझेगा कि इसमें बदलाव करके किस तरह से चिकित्सा आपूर्ति की जा सकती है.

    फ्लिपकार्ट जियो लोकेशन और ट्रेकिंग विशेषज्ञता भी साझा करेगा जिसका इस्तेमाल वो रोज़मर्रा में व्यापक स्तर पर सामान डिलीवर करने में करता है. इसके अलावा ईकॉमर्स प्लेटफार्म डुन्जो जिसे गूगल का समर्थन प्राप्त है, पहले से ही बेयांड विजुअल लाइन ऑफ साइट (BVLOS) ड्रोन डिलिविरी की जांच के लिए डुन्जो एयर कंन्सोर्टियम का हिस्सा है. ये प्लेटफॉर्म भी तेलंगाना सरकार के मेडिसिन फ्रॉम द स्काई प्रोजेक्ट में अपनी शोध को शामिल करेगा. डुन्जो डिजिटल के फाउंडर और सीईओ कबीर बिस्वास का कहना है कि हमें पूरा विश्वास है कि मेडिसिन फ्रॉम दि स्काय परियोजना में हमारी भागीदारी से देश और राज्यों के साथ संपर्क सुगम हो सकेगा.

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    इससे उन लोगों को तात्कालिक मदद मिल पाएगी, जो दूरदराज के इलाकों में रहने के कारण चिकित्सकीय सुविधा और वर्तमान में वैक्सीन से वंचित हैं. तेलंगाना सरकार के आईटीई एंड सी विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस जयेश रंजन का कहना है 'ये देश की अपने आप में पहली परियोजना है जिसमें BVLOS कई सारे ड्रोन एक साथ उड़ाएगा, और इस तरह ग्रामीण इलाको में आपूर्ति श्रंखला की समानता को सुनिश्चित किया जा सकेगा.'

    इस साल अप्रैल में तेलंगाना सरकार ने नागर विमानन मंत्रालय और नागर विमान महानिदेशालय को एक साल की अवधि के लिए चिकित्सकीय सुविधाएं पहुंचाने के लिए ड्रोन के प्रयोग की अनुमति दी है.

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    डिलीवरी के लिए ड्रोन के इस्तेमाल के उद्देश्य से यूएएस 2021 के नियम के मुताबिक तेलंगाना सरकार को एक अवधि के लिए इस काम की इजाजत दी गई है. उधर आईसीएमआर ने जून 11 को एचएलएल इन्फ्रा की मार्फत जो निविदा जारी की है उसके लिए जिस ड्रोन की आवश्यता होगी, उसकी रेंज कम से कम 35 किलोमीटर, वर्टीकल एल्टिट्यूड क्षमता कम से कम 100 मीटर और जो 4 कम से कम 4 किलो वजन उठा सके, और सामान डिलीवर करके वो अपने उड़ान वाली जगह पर वापस आने में सक्षम हो.

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