अब ड्रोन से पहुंचाई जाएगी वैक्‍सीन और दवाइयां, बेंगलुरु में आज से शुरू होगा ट्रायल

बेंगलुरु से 80 किलोमीटर दूर गौरीबिदनुर में 30 से 45 दिनों तक चलाया जाएगा ट्रायल. (सांकेतिक तस्वीर)

मेडिकल ड्रोन डिलीवरी का ट्रायल (Medical Drone Delivery Trial) आज से बेंगलुरु (Bengaluru) में शुरू होगा. थ्रोटल एयरोस्पेस सिस्टम्स (Throttle Aerospaces Systems) नाम की कंपनी आज बेंगलुरु से 80 किलोमीटर दूर गौरीबिदनुर में 30 से 45 दिनों तक चलने वाले ट्रायल की शुरुआत करेगी.

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    नई दिल्‍ली. देश में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के मामलों के बीच वैक्‍सीन (Vaccine) को सबसे बड़े सुरक्षा कवच के तौर पर देखा जा रहा है. यही कारण है कि केंद्र सरकार देश के हर नागरिक तक कोरोना वैक्‍सीन पहुंचाना चाहती है. हालांकि कई ऐसे इलाके भी हैं, जहां वैक्‍सीन का समय पर पहुंचना इतना असान नहीं होता. यही कारण है कि ऐसे इलाकों तक कोरोना वैक्‍सीन और दवाओं को ड्रोन से पहुंचाने की तैयारी चल रही है. इस ड्रोन को बियॉन्ड विजुअल लाइन ऑफ साइट (BVLOS) मेडिकल ड्रोन भी कहा जाता है. मेडिकल ड्रोन डिलीवरी का ट्रायल आज से बेंगलुरु में शुरू होगा. थ्रोटल एयरोस्पेस सिस्टम्स (Throttle Aerospaces Systems) नाम की कंपनी आज बेंगलुरु से 80 किलोमीटर दूर गौरीबिदनुर में 30 से 45 दिनों तक चलने वाले ट्रायल की शुरुआत करेगी.

    थ्रोटल एयरोस्पेस सिस्टम्स कंपनी ने इनवोली-स्विस के साथ मिलकर इस प्रोजक्‍ट को आज से शुरू करने का प्‍लान तैयार किया है. बता दें कि इनवोली-स्विस पेशेवर ड्रोन एप्लीकेशन तैयार करने और एयर ट्रैफिक अवेयरनेस सिस्टम बनाने में माहिर है. इसके साथ ही हनीवेल एयरोस्‍पेस इस प्रोजक्‍ट में सेफ्टी एक्‍सपर्ट की भूमिका में मौजूद है. ड्रोन के जरिए सामान को एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर पहुंचाने में इस्‍तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर को रैंडिंट नाम दिया गया है.

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    थ्रोटल एयरोस्पेस सिस्टम्स के CEO नागेंद्रन कंडासामी ने बताया कि मेडकोप्‍टर का छोटा ड्रोन 1 किलोग्राम वजन की दवाओं के बॉक्‍स को 15 किलोमीटर तक ले जाने में सक्षम है जबकि दूसरा मेडकोप्‍टर का दूसरा ड्रोन 2 किलोग्राम वजन के सामान को 12 किलोमीटर तक ले जा सकता है. उन्‍होंने बताया कि 30 से 45 दिनों तक चलने वाले इस ट्रायल में हम ड्रोन की रेंज और सुरक्षा दोनों का ध्‍यान रखेंगे. उन्‍होंने कहा कि DGCA के मुताबिक ट्रायल के दौरान हमें कम से कम 100 घंटे उड़ान भरनी होगी. हालांकि हमारा लक्ष्य करीब 125 घंटे उड़ान भरने का है. ट्रायल के बाद इस प्रोजेक्‍टर को समीक्षा के लिए DGCA को सौंपा जाएगा.

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    पहला आधिकारिक मेडिकल ड्रोन डिलीवरी एक्सपेरिमेंट
    थ्रोटल एयरोस्पेस सिस्टम्स के CEO नागेंद्रन कंडासामी ने बताया कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने 20 मार्च 2020 को ही ड्रोन के ट्रायल की अनुमति दे दी थी. लेकिन कोरोना और अन्‍य कारणों से इस प्रोजेक्‍ट का ट्रायल शुरू करने में देरी हुई. कंडासामी ने बताया कि दो अन्य कंसोर्टियम के पास भी ड्रोन के ट्रायल की अनुमति है लेकिन कानूनी रूप से हमारा पहला आधिकारिक मेडिकल ड्रोन डिलीवरी एक्सपेरिमेंट है.

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