आंध्र के गांव से सुप्रीम कोर्ट तक ऐसे पहुंचे जस्टिस एनवी रमन्ना, दिए ये अहम फैसले

किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले एनवी रमन्ना ने साइंस और लॉ में ग्रेजुएशन किया है

किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले एनवी रमन्ना ने साइंस और लॉ में ग्रेजुएशन किया है

जस्टिस रमन्ना (Justice Nuthalapati Venkata Ramana) का जन्म अविभाजित आंध्र प्रदेश के पुन्नावरम गांव में 27 अगस्त 1957 को हुआ था. उन्होंने 10 फरवरी 1983 में वकालत शुरू की थी. जिस दौरान चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, उस दौरान जस्टिस रमन्ना आंध्र प्रदेश सरकार के एडिशनल एडवोकेट जनरल हुआ करते थे.

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  • Last Updated: March 24, 2021, 4:42 PM IST
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नई दिल्ली. देश के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) एसए बोबडे (SA Bobde) ने सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे सीनियर जज एनवी रमन्ना (Justice NV Ramana) का नाम अपने उत्तराधिकारी के तौर पर सरकार को भेजा है. ऐसे में साफ है कि जस्टिस रमन्ना देश के 48वें मुख्य न्यायाधीश होंगे. मौजूदा सीजेआई एसए बोबडे 23 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं. अगर सरकार ने सीजेआई बोबडे की सिफारिश मंजूर कर ली, तो जस्टिस रमन्ना 24 अप्रैल को सीजेआई पद की शपथ लेंगे. उनका कार्यकाल 26 अगस्त 2022 तक रहेगा.

जस्टिस रमन्ना (Justice Nuthalapati Venkata Ramana) का जन्म अविभाजित आंध्र प्रदेश के पुन्नावरम गांव में 27 अगस्त 1957 को हुआ था. उन्होंने 10 फरवरी 1983 में वकालत शुरू की थी. जिस दौरान चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, उस दौरान जस्टिस रमन्ना आंध्र प्रदेश सरकार के एडिशनल एडवोकेट जनरल हुआ करते थे.

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किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले एनवी रमन्ना ने साइंस और लॉ में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद उन्होंने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट, केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट में कानून की प्रैक्टिस शुरू की. राज्य सरकारों की एजेंसियों के लिए वो पैनल काउंसेल के तौर पर भी काम करते थे. 27 जून 2000 में वो आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में स्थायी जज के तौर पर नियुक्त किए गए. इसके बाद साल 2013 में 13 मार्च से लेकर 20 मई तक वो आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ़ जस्टिस रहे.
2 सितंबर 2013 को जस्टिस रमन्ना का प्रमोशन हुआ. इसके बाद वो दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस नियुक्त किए गए. फिर 17 फरवरी 2014 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया. उन्हें कानून के अलावा दर्शन और साहित्य में गहरी रुचि है.

परिवार में कौन-कौन हैं ?

जस्टिस रमन्ना के परिवार में उनकी पत्नी एन शिवमाला और दो बेटियां डॉक्टर एनएस भुवना और एनएस तनुजा हैं. तीन साल पहले यानी 31 मार्च, 2018 को उन्होंने अपनी संपत्ति का जो ब्योरा दिया था, उसके मुताबिक उन पर 30 लाख रुपये की देनदारी थी. इसके अलावा उनके और उनके परिवार के पास हैदराबाद और नोएडा समेत आंध्र प्रदेश में कुछ प्लॉट के अलावा खेती की पुश्तैनी जमीन समेत कुछ और अलग कृषि जमीन भी थी.



जस्टिस रमन्ना ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर ये कुछ खास फैसले दिए:-

1. जस्टिस एनवी रमन्ना और जस्टिस सूर्यकांत की एक बेंच ने इस साल जनवरी में हाउस वाइफ्स को लेकर बड़ा फैसला दिया था. बेंच ने कहा कि घर में किसी महिला के काम का मूल्य उसके ऑफिस जाने वाले पति से किसी भी सूरत में कम नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने 1993 में लता वाधवा बनाम स्टेट ऑफ बिहार के केस में फैसला देते हुए कहा था कि हाउस वाइफ की सेवा का कोई एक पहलू नहीं है. वह पूरे परिवार की देखरेख करती है. मामला यह था कि दिल्ली के एक कपल की सड़क हादसे में अप्रैल 2011 में मौत हो गई. उनकी दो बेटियों और पिता की ओर से मुआवजे के लिए अर्जी दाखिल की गई. मोटर एक्सिडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया कि पीड़ित पक्ष को 47 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए. इस रक़म को दिल्ली हाईकोर्ट ने घटाकर 22 लाख कर दिया.

फिर मामला सुप्रीम कोर्ट में आया.सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा राशि 33 लाख 20 हजार रुपये कर दी. इस तरह सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एनवी रमन्ना की अगुआई वाली बेंच ने दिल्ली के कपल की मौत के मामले में उनके परिजनों को मुआवजा राशि बढ़ाकर देने का आदेश दिया.

2. जस्टिस रमन्ना सुप्रीम कोर्ट की उस बेंच में शामिल थे, जिसने जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट के निलंबन पर तत्काल समीक्षा करने का फैसला सुनाया था. वो उस ऐतिहासिक बेंच में भी शामिल रहे हैं, जिसने देश के मुख्य न्यायाधीश के दफ्तर को राइट टू इंफॉर्मेशन ऐक्ट (आरटीआई) के दायरे में लाया.

3. दिल्ली के एनसीटी राज्य मंत्री, मोहम्मद अनवर के केस में जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस एसए नज़ीर और जस्टिस सूर्यकांत की 3-जजों की बेंच ने कहा कि आईपीसी की धारा 84 के तहत मानसिक क्रूरता के बचाव का सफलतापूर्वक दावा करने के लिए आरोपी को दिखाना होगा कि लड़की गंभीर मानसिक बीमारी या दुर्बलता से पीड़ित थी.

4. साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की संविधान पीठ ने अहम फैसला देते हुए कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय भी सूचना के अधिकार के दायरे में आता है.

5. जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की 5-जजों वाली संविधान पीठ ने वित्त अधिनियम, 2017 की धारा 184 की वैधता को बरकरार रखा. बेंच ने कहा कि उक्त धारा विधायी कार्यों के अत्यधिक प्रतिनिधिमंडल से ग्रस्त नहीं है.

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'जजों का जीवन गुलाबों की सेज नहीं'

इसके अलावा पिछले साल ही एक कार्यक्रम में जस्टिस रमन्ना ने जजों के जीवन के बारे में एक बहुत बड़ी बात कही थी. उन्होंने कहा था, 'मेरे अपने अनुभव से, मैं कह सकता हूं कि जजों की जिंदगी गुलाबों की सेज नहीं है.' जस्टिस रमन्ना ने कहा था, 'लोग जो सोचते हैं, सच्चाई उससे बहुत ही अलग होती है. मुझे लगता है कि मौजूदा समय में जज बनने के लिए दूसरे पेशे से कहीं ज्यादा त्याग की जरूरत पड़ती है. देश के भविष्य के लिए ऐसा करना पड़ता है, क्योंकि यह मजबूत स्वतंत्र जजों पर निर्भर है.'
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